जबलपुर। मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र को लेकर विवाद वर्तमान में कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए राज्य सरकार की ‘हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी’ (उच्च स्तरीय छानबीन समिति) को इस मामले की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हाईकोर्ट ने सीधे जांच करने के बजाय मामले को छानबीन समिति को सौंप दिया है। समिति को यह तय करना है कि प्रतिमा बागरी के पक्ष में जारी अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र वैध है या नहीं।
यह याचिका कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रतिमा बागरी वास्तव में राजपूत/ठाकुर समुदाय (सामान्य वर्ग) से आती हैं, लेकिन उन्होंने गलत तरीके से SC प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया।
प्रतिमा बागरी सतना जिले की रैगांव (SC आरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक चुनी गई थीं। यदि प्रमाण पत्र-फर्जी पाया जाता है, तो उनकी विधायकी और मंत्री पद दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
विवाद का एक मुख्य बिंदु यह है कि ‘बागरी’ जाति की सामाजिक स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न है। कुछ क्षेत्रों में यह SC में आती है, जबकि अन्य में इसे राजपूत माना जाता है।
पुरानी शिकायतों का हवाला
याचिकाकर्ता के अनुसार, 2003 और 2007 के सरकारी आदेशों के तहत विंध्य और बुंदेलखंड के कुछ बागरी समुदायों को SC की श्रेणी में नहीं रखा गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि समिति 60 दिनों में रिपोर्ट नहीं देती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा अपनी रिट याचिका को सक्रिय करने के लिए स्वतंत्र होगा।
राज्यमंत्री बागरी
प्रतिमा बागरी मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय विकास एवं आवास विभाग की राज्य मंत्री हैं। वह सतना जिले की रैगांव (SC) विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक हैं। वे अपने जाति प्रमाण पत्र को लेकर कानूनी विवाद में हैं।
राजनीतिक परिचय
पद: राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मध्य प्रदेश शासन।
निर्वाचन क्षेत्र: रैगांव, जिला सतना (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट)।
उपलब्धि: वह वर्तमान मोहन यादव सरकार की सबसे कम उम्र की मंत्रियों में से एक हैं।
प्रतिमा बागरी हाल के दिनों में कई कारणों से चर्चा में रही हैं
जाति प्रमाण पत्र विवाद: 24 अप्रैल 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनके एससी (SC) जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने छानबीन समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। यह याचिका कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने गलत तरीके से प्रमाण पत्र बनवाया है।
पारिवारिक विवाद: दिसंबर 2025 में उनके भाई (अनिल बागरी) और बहनोई को गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की खबरें सामने आई थीं। इस मुद्दे पर मीडिया के सवालों पर उनकी प्रतिक्रिया काफी चर्चा में रही थी।
सड़क निर्माण पर सवाल: दिसंबर 2025 में ही उन्होंने अपनी ही सरकार के काम पर सवाल उठाते हुए एक नई बनी सड़क की घटिया गुणवत्ता को सबके सामने उजागर किया था।
