-देरी से आईटीआर फाइल करने पर 5000 रुपए तक लेट फीस
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। कई करदाताओं को लगता है कि अगर वे डेडलाइन तक आईटीआर फाइल नहीं कर पाए, तो उन्हें बस लेट फीस या जुर्माना देना होगा और काम हो जाएगा, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। 31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने का मतलब सिर्फ जुर्माना भरना नहीं है, बल्कि आपको कई अन्य वित्तीय नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं।
इनकम टैक्स के सेक्शन 234एफ के तहत, अगर आप 31 जुलाई के बाद यानी बिलेटेड रिटर्न फाइल करते हैं, तो आपको 5,000 रुपए तक की लेट फीस देनी होगी। हालांकि, अगर आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपए से कम है, तो यह जुर्माना अधिकतम 1,000 रुपए होता है।
बकाया टैक्स पर 1 फीसदी ब्याज
अगर आपका कोई टैक्स बकाया बनता है, और आप 31 जुलाई तक आईटीआर नहीं भरते हैं, तो 234ए के तहत आपको हर महीने 1 फीसदी का ब्याज देना होगा। यह ब्याज 1 अगस्त से शुरू होकर उस दिन तक कैलकुलेट होगा, जिस दिन आप अपना आईटीआर फाइल करेंगे।
नुकसान को कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे?
यह एक बहुत बड़ा नुकसान है, जो शेयर बाजार के निवेशकों या कारोबारियों को झेलना पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप शेयर बाजार, बिजनेस या प्रोफेशन में हुए अपने नुकसान को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकते।
रिफंड के ब्याज का नुकसान
अगर आप टीडीएस ज्यादा कटा है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो इनकम आपको उस रिफंड पर ब्याज सेक्शन 244ए के तहत देता है, लेकिन अगर आप आईटीआर भरने में देरी करते हैं, तो आपको देरी वाले महीनों का ब्याज नहीं मिलेगा।
पुरानी टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प छिन जाना
नए नियमों के अनुसार, नई टैक्स व्यवस्था अब डिफॉल्ट व्यवस्था है। अगर आप 31 जुलाई तक अपना आईटीआर फाइल नहीं करते हैं और पुरानी टैक्स रिजीम के तहत 80सी, 80डी, या एचआरए जैसी छूट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते समय आप पुरानी रिजीम का चुनाव नहीं कर पाएंगे। 31 जुलाई की डेडलाइन केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि आपके पैसे बचाने का एक मौका है। अंतिम समय की तकनीकी गड़बडिय़ों और भारी आर्थिक नुकसान से बचने के लिए तुरंत अपना आईटीआर फाइल करें।
