-अब परिवार वालों को पहले मिलेगा मौका, आधार-आईडी के बिना नहीं होगा रिजर्वेशन
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। रेलवे में तत्काल टिकट से अधिकतर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। तत्काल टिकट के लिए सुबह-सुबह लंबी लाइन, घंटों इंतजार और दलालों की झंझट जैसी शिकायतों पर अब पश्चिम मध्य रेलवे ने नई व्यवस्था लागू किया है। एक अगस्त से भोपाल, जबलपुर और कोटा मंडल के सभी आरक्षण केंद्रों पर तत्काल आरक्षण के लिए नई टोकन प्रणाली लागू होगी। पहली बार यह तय किया गया है कि जो व्यक्ति अपना या परिवार के सदस्य का टिकट बनवाने आएगा, उसे अन्य लोगों की तुलना में प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही टोकन लेने के लिए पहचान और संबंध साबित करने वाले दस्तावेज भी अनिवार्य होंगे।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आरक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, वास्तविक यात्रियों को सुविधा देना और अनधिकृत एजेंटों तथा बिचौलियों पर प्रभावी रोक लगाना है। अब तक तत्काल टिकट के लिए पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर टोकन दिए जाते थे। कोई भी व्यक्ति सुबह लाइन में लगकर टोकन ले सकता था। यह स्पष्ट नहीं होता था कि वह अपने लिए टिकट बनवा रहा है या किसी और के लिए। पहचान संबंधी दस्तावेजों की जांच भी इतनी सख्त नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग बार-बार लाइन में लगकर कई यात्रियों के टिकट बनवाने की कोशिश करते थे, जिससे आम यात्रियों को परेशानी होती थी।
नई व्यवस्था में केवल पहले आने से काम नहीं चलेगा। टोकन लेने वाले को यह बताना होगा कि वह अपना टिकट बनवा रहा है, परिवार के सदस्य का या किसी अन्य व्यक्ति का। इसके आधार पर उसे दो श्रेणियों में रखा जाएगा। प्राथमिकता ‘ए’ में स्वयं और निकट परिवार (माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, भाई-बहन, दादा-दादी) के टिकट शामिल होंगे। इन यात्रियों के सभी आवेदन पहले निपटाए जाएंगे। इसके बाद प्राथमिकता ‘बी’ के तहत अन्य लोगों के टिकटों की बुकिंग होगी।
नई व्यवस्था में स्वयं, परिवार या अन्य व्यक्ति के टिकट के लिए अलग-अलग दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। यदि परिवार के सदस्य का टिकट बनवाया जा रहा है तो संबंध साबित करने वाले सरकारी दस्तावेज भी देने होंगे। वहीं अन्य व्यक्ति का टिकट बनवाने पर उसके पहचान पत्र की स्वयं सत्यापित प्रति और हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे।
एसी तत्काल टिकट के लिए सुबह 8.30 से 9 बजे तक प्रति काउंटर अधिकतम 10 टोकन और स्लीपर (नॉन एसी) के लिए 9 से 9.30 बजे तक अधिकतम 15 टोकन जारी किए जाएंगे। टोकन पर संबंधित काउंटर का नंबर दर्ज रहेगा और उसका रिकॉर्ड रजिस्टर में रखा जाएगा।
नई व्यवस्था में टोकन हस्तांतरणीय नहीं होगा। यानी जिसने टोकन लिया है, टिकट भी वही बनवा सकेगा। बार-बार टोकन लेने वालों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी आसान होगी। रेलवे का मानना है कि इससे फर्जी बुकिंग और दलालों की भूमिका काफी हद तक कम होगी।
यात्रियों को ये फायदा?
परिवार के टिकट बनवाने वालों को प्राथमिकता मिलेगी।
दलालों और बिचौलियों की भूमिका सीमित होगी।
पहचान सत्यापन से फर्जी बुकिंग पर रोक लगेगी।
टोकन वितरण अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगा।
वास्तविक यात्रियों को टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी।
