2.75 करोड़ की FDR फर्जी मिलने पर कार्रवाई
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भाेपाल। मध्य प्रदेश में शराब दुकानों के ठेकों से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व विशेष कार्य अधिकारी (OSD) और आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भोपाल में शराब दुकानों के ठेके के लिए जमा कराई गई 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की इलेक्ट्रॉनिक फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (e-FDR) जांच में फर्जी पाई गई। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को निलंबन के आदेश जारी किए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल की शराब दुकानों के ठेकों से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, शराब समूह BPL/F-14, पीएंडटी चौराहा से संबंधित ठेके के लिए 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की e-FDR जमा कराई गई थी। जांच के दौरान संबंधित बैंक, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक, ने लिखित रूप में बताया कि उक्त FDR उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी।
इसके बाद दस्तावेजों की प्रामाणिकता और ठेका आवंटन की प्रक्रिया की जांच की गई। शुरुआती जांच में कई प्रक्रियागत अनियमितताओं की बात सामने आई है।
जांच में सात बिंदुओं पर उठे सवाल
विभागीय जांच में प्रतिभूति राशि जमा करने में देरी, निर्धारित श्रेणी में शामिल नहीं होने वाले बैंक की FDR स्वीकार करने और लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया सहित सात बिंदुओं पर सवाल उठे हैं। जांच में यह भी देखा गया कि संबंधित दस्तावेजों की आवश्यक पुष्टि की गई थी या नहीं।
मेसर्स मां माइन्स के लाइसेंस हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों और साझेदारी की जानकारी की जांच में भी कथित विसंगतियां सामने आने की खबर है। इन सभी पहलुओं पर विभागीय कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
एक करोड़ रुपये के कथित भुगतान का आरोप
इस मामले में इससे पहले दो शराब दुकानों के ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये के कथित भुगतान का आरोप भी सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों में मोहित गोगिया के नाम से सामने आए कथित बयान का उल्लेख किया गया है। आरोपों में फर्जी FDR के आधार पर ठेका हासिल करने में मदद किए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि, कथित भुगतान और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्षों का इंतजार है।
पहले OSD के प्रभार से हटाए गए थे रायचूरा
आरोप सामने आने के बाद 9 अक्टूबर 2026 को उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दीपम रायचूरा को अपने OSD के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया था। देवड़ा ने कहा था कि उन्हें मामले की जानकारी मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली और उन्होंने संबंधित विभाग को जांच के निर्देश दिए।
देवड़ा ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिस वित्तीय वर्ष 2024-25 के ठेकों को लेकर आरोप लगाए गए हैं, उस समय रायचूरा भोपाल में आबकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत थे और उस दौरान वे उनके OSD नहीं थे।
अब आगे क्या होगा?
निलंबन के बाद विभागीय जांच और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। जांच में FDR की प्रामाणिकता, ठेका आवंटन की प्रक्रिया, लाइसेंस हस्तांतरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।
डिप्टी CM के OSD पर 1 करोड़ रिश्वत का आरोप, जांच के आदेश
