भोपाल। मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और किसानों को खाद की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधी बात करते हुए स्पष्ट किया कि जिलों में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अवैध शराब की बिक्री, भंडारण और परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, खाद वितरण में लापरवाही और किसानों को परेशानी होने पर संबंधित जिले के कलेक्टर की जवाबदेही तय होगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रदेशव्यापी कार्रवाई
मुख्यमंत्री की सख्ती के पीछे देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान टीआई दिलीप पुरी की मौत की घटना भी अहम वजह है। इस घटना के बाद सरकार ने अवैध शराब के नेटवर्क के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध शराब के परिवहन, भंडारण और खरीद-बिक्री पर एक साथ कार्रवाई की जाए। केवल छोटे विक्रेताओं तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क और उसके मुख्य संचालकों तक पहुंचा जाए। शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी।
मुख्यमंत्री ने पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया है। उनका सवाल है कि जब शराब की बिक्री के लिए निर्धारित दुकानें हैं, तो एजेंटों के माध्यम से अवैध बिक्री कैसे हो रही है?
देवास मामले में सरकार की सख्ती
देवास की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा था। मामले में अवैध शराब नेटवर्क के मुख्य आरोपी राहुल जायसवाल की गिरफ्तारी की जानकारी भी सरकार की ओर से दी गई है। इसके अलावा वाहन चालक और वाहन मालिक सहित अन्य आरोपियों पर कार्रवाई की गई है। आबकारी अधिकारी अमर सिंह बघेल को निलंबित किया गया है।
सरकार ने शहीद टीआई दिलीप पुरी की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत उपनिरीक्षक (एसआई) बनाने और परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
खाद संकट पर कलेक्टरों की जवाबदेही
दूसरी ओर, प्रदेश में रबी सीजन के दौरान किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था भी सरकार की प्राथमिकता में है। खाद की मांग के समय किसानों को समितियों और वितरण केंद्रों पर परेशानी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री का संदेश है कि खाद का पर्याप्त भंडार, समय पर आपूर्ति और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कलेक्टरों को खाद की उपलब्धता और वितरण पर लगातार निगरानी रखने, समितियों तथा बिक्री केंद्रों का निरीक्षण करने और कालाबाजारी या अनियमितता की शिकायतों पर कार्रवाई करने की जरूरत है। खाद वितरण में अव्यवस्था के कारण किसानों को परेशान होना पड़े तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन से तय की जाएगी।
खाद की कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों पर प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। किसानों को यह जानकारी भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए कि किस केंद्र पर कौन-सी खाद और कितनी मात्रा में उपलब्ध है।
पुलिस और प्रशासन को मैदान में उतरने का संदेश
मुख्यमंत्री का यह रुख बताता है कि सरकार अब कानून-व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों पर जिला स्तर पर जवाबदेही तय करना चाहती है। अवैध शराब के मामले में पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई तथा खाद वितरण में कलेक्टरों की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं
अवैध शराब के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना।
इन दोनों मामलों में जिलों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कार्रवाई पर नजर रहेगी।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव सह कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय सोनाली वायंगणकर, एडीजी (इंटेलिजेंस) अंशुमन यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
