–पूर्व सलाहकार के दावे से बांग्लादेश की राजनीति में हलचल
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के अगस्त 2024 में पतन को लेकर एक नया दावा सामने आया है। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने आरोप लगाया है कि हसीना के देश छोड़ने से पहले ही छात्र नेता नई अंतरिम सरकार के नेतृत्व को लेकर बातचीत कर रहे थे। उनके अनुसार, छात्र नेताओं ने यूनुस को अंतरिम प्रशासन का प्रमुख बनाने की इच्छा जताई थी और उनसे संपर्क स्थापित करने के लिए एक पत्रकार की मदद ली थी।
रिपोर्टों के बाद इस दावे पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या शेख हसीना की सरकार का पतन अचानक हुए जनआंदोलन का परिणाम था या आंदोलन के दौरान ही सत्ता परिवर्तन की अगली व्यवस्था तैयार की जा रही थी। हालांकि, अभी सामने आया बयान किसी व्यापक साजिश को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
सत्ता परिवर्तन से दो दिन पहले संपर्क का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, शफीकुल आलम ने अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि 3 अगस्त 2024 को छात्र नेताओं ने मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपने की संभावना पर चर्चा की थी। इस संपर्क में फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी से जुड़े पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर की मध्यस्थता का भी उल्लेख किया गया है।दावे के मुताबिक, छात्र नेताओं की मंशा थी कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश का प्रशासन किसके नेतृत्व में चलाया जाए, इस पर पहले से सहमति बनाई जाए।
यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया था और देश से बाहर चली गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता खुला और मुहम्मद यूनुस ने उसका नेतृत्व संभाला।
आरक्षण विरोध से शुरू हुआ था आंदोलन
बांग्लादेश में जुलाई 2024 में छात्र आंदोलन की शुरुआत सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध से हुई थी। प्रदर्शनकारी 1971 के मुक्ति संग्राम में शामिल लोगों के वंशजों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था का विरोध कर रहे थे और भर्ती प्रक्रिया में योग्यता को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन जल्द ही व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। सुरक्षा बलों की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की मौतों और सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष ने संकट को गंभीर बना दिया। देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन तेज हुए और सरकार पर राजनीतिक स्वतंत्रता तथा विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर सवाल उठे।
ब्रिटेन की हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी की जनवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, छात्र आंदोलन शेख हसीना सरकार के पतन का प्रमुख तात्कालिक कारण था। रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के आरोपों, शासन के बढ़ते केंद्रीकरण और विपक्ष के लिए सीमित राजनीतिक अवसरों को भी उस समय के असंतोष की पृष्ठभूमि में शामिल किया गया है।
क्या विदेशी ताकतों की भूमिका थी?
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद विदेशी हस्तक्षेप को लेकर भी कई आरोप सामने आए थे। कुछ राजनीतिक दावों में अमेरिका की भूमिका और रणनीतिक हितों का उल्लेख किया गया। लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बीबीसी मॉनिटरिंग की अगस्त 2024 की व्याख्यात्मक रिपोर्ट में विदेशी भूमिका संबंधी आरोपों और अमेरिका से जुड़े दावों का उल्लेख किया गया था। अमेरिकी विदेश विभाग ने उस समय सरकार गिराने में अपने देश की भूमिका के आरोपों को खारिज किया था। शेख हसीना से जुड़ा एक कथित बयान, जिसमें सेंट मार्टिन द्वीप को लेकर विवाद का जिक्र था, उनके बेटे सजीब वाजेद ने फर्जी बताया था।
इसलिए छात्र नेताओं की पूर्व बातचीत के नए दावे को विदेशी साजिश का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। इसके लिए स्वतंत्र और पुष्ट साक्ष्य आवश्यक हैं।
बांग्लादेश की राजनीति पर क्या होगा असर?
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। इसके बाद देश में राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों की प्रक्रिया चली। फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने। ब्रिटेन सरकार की अक्टूबर 2026 की देश-स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं थी और पार्टी पर प्रतिबंध जारी था।
ऐसे समय में पूर्व प्रेस सचिव का बयान 2024 के घटनाक्रम की राजनीतिक व्याख्या को फिर चर्चा में ला सकता है। इससे यह बहस तेज हो सकती है कि आंदोलन के दौरान भविष्य के नेतृत्व को लेकर बातचीत कब शुरू हुई और अंतरिम सरकार के गठन में विभिन्न समूहों की क्या भूमिका थी।
दावा गंभीर, लेकिन जांच जरूरी
शफीकुल आलम के दावे से यह सवाल जरूर उठता है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने से पहले अंतरिम नेतृत्व को लेकर कितनी तैयारी हो चुकी थी। हालांकि, उनकी सरकार को एक सुनियोजित साजिश के तहत गिराया गया था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए छात्र नेताओं, मुहम्मद यूनुस, संबंधित पत्रकार और तत्कालीन प्रशासन के पक्षों को सामने रखना होगा। साथ ही, संपर्क और बातचीत से जुड़े मूल प्रमाणों की स्वतंत्र जांच भी जरूरी है। फिलहाल, यह मामला बांग्लादेश में 2024 के सत्ता परिवर्तन को लेकर जारी राजनीतिक बहस में एक नया अध्याय जोड़ता है।
