–आबादी को लेकर INSIGHT UK ने ब्रिटिश संसद के समूह के सामने रखी धार्मिक उत्पीड़न पर रिपोर्ट
-हिंसा, जबरन धर्मांतरण और संपत्ति से बेदखली के आरोपों पर जताई चिंता
नई दिल्ली/लंदन। पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनकी आबादी में आए बदलाव को लेकर ब्रिटिश संगठन INSIGHT UK की एक रिपोर्ट चर्चा में है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने The Religious Persecution of Hindus in Pakistan शीर्षक से अपनी रिपोर्ट ब्रिटिश संसद के ब्रिटिश हिंदुओं से संबंधित सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG) के समक्ष प्रस्तुत की। इसमें पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के सामने धार्मिक भेदभाव, हिंसा, संपत्ति से बेदखली और कथित जबरन धर्मांतरण जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1941 की जनगणना में उस क्षेत्र की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 14.6 प्रतिशत थी, जो आज पाकिस्तान की कुल आबादी में करीब 1.7 प्रतिशत बताई जा रही है। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय भारत के विभाजन, तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान की भौगोलिक सीमाओं और पूर्वी पाकिस्तान के 1971 में अलग होकर बांग्लादेश बनने जैसे ऐतिहासिक बदलावों को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या कहती है पाकिस्तान की 2023 की जनगणना?
पाकिस्तान के आधिकारिक जनगणना आंकड़े इस मुद्दे को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 की जनगणना के अनुसार, देश में 38,67,729 लोगों ने हिंदू धर्म दर्ज कराया था। यह कुल 24.04 करोड़ आबादी का लगभग 1.61 प्रतिशत था। इसके अतिरिक्त, 13,49,487 लोगों को अनुसूचित जाति की अलग श्रेणी में दर्ज किया गया।
इसलिए हिंदुओं की कुल संख्या और प्रतिशत के संबंध में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर दिखाई दे सकता है। इसकी एक वजह जनगणना में हिंदू और अनुसूचित जाति की अलग-अलग गणना भी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में हिंदुओं की सबसे बड़ी आबादी सिंध प्रांत में रहती है।
INSIGHT UK की रिपोर्ट में 1.7 प्रतिशत का उल्लेख इसी व्यापक जनसांख्यिकीय बहस का हिस्सा है। हालांकि, 1941 और वर्तमान के आंकड़ों को सीधे जोड़कर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पूरी गिरावट केवल धार्मिक उत्पीड़न के कारण हुई। इसके लिए अलग-अलग अवधियों के तुलनीय जनगणना आंकड़ों और प्रवासन संबंधी तथ्यों का अध्ययन आवश्यक है।
हिंसा और जबरन धर्मांतरण के आरोप
रिपोर्ट में हिंदू समुदाय के सामने आने वाली समस्याओं में धार्मिक स्थलों पर हमले, सामाजिक भेदभाव, महिलाओं और लड़कियों के अपहरण, कथित जबरन धर्मांतरण तथा जबरन विवाह के आरोपों को प्रमुखता दी गई है। इसमें कहा गया है कि कमजोर आर्थिक और सामाजिक स्थिति वाले परिवारों को न्याय पाने में विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई समुदायों की महिलाओं तथा नाबालिग लड़कियों के कथित अपहरण और जबरन धर्मांतरण के मामले लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय रहे हैं। हालांकि, ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या, दर्ज शिकायतों और दोषसिद्धि के आंकड़ों का आकलन करते समय विश्वसनीय स्रोतों और प्रत्येक मामले के उपलब्ध दस्तावेजों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
विभाजन के बाद विस्थापन और संपत्ति का सवाल
1947 में भारत के विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा और जनसंख्या का स्थानांतरण हुआ था। लाखों लोग अपने घर छोड़कर नई सीमाओं के आर-पार चले गए। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान से पलायन करने वाले अनेक हिंदू परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों से हाथ धोना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति संबंधी कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं ने भी विस्थापित परिवारों की कठिनाइयां बढ़ाईं। इन आरोपों के व्यापक मूल्यांकन के लिए संबंधित कानूनों, संपत्ति के अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की अलग-अलग जांच जरूरी है।
पाकिस्तान के संविधान पर भी उठाए सवाल
रिपोर्ट में पाकिस्तान के संवैधानिक प्रावधानों को लेकर भी चिंता जताई गई है। पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद के लिए मुस्लिम होना आवश्यक है। इस कारण हिंदू, ईसाई और अन्य गैर-मुस्लिम नागरिक इन दोनों सर्वोच्च कार्यकारी पदों पर आसीन नहीं हो सकते।
धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर उठाए गए इन सवालों के बीच रिपोर्ट में ब्रिटेन सरकार से पाकिस्तान के साथ बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्रमुखता देने, मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी बढ़ाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रयास मजबूत करने की मांग की गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है चर्चा
INSIGHT UK की पहल से पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ब्रिटेन में संसदीय चर्चा और कूटनीतिक स्तर पर सवाल उठने की संभावना है। हालांकि, रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाना अपने आप में ब्रिटिश सरकार की ओर से किसी नई नीति, सहायता रोकने या प्रतिबंध लगाने के निर्णय का प्रमाण नहीं है। ऐसे किसी कदम की पुष्टि संबंधित सरकारी घोषणा या संसदीय दस्तावेज से ही होगी।
पाकिस्तान में हिंदू आबादी का वर्तमान अनुपात, ऐतिहासिक जनसंख्या परिवर्तन और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े आरोप अलग-अलग लेकिन परस्पर संबंधित विषय हैं। इनका निष्पक्ष आकलन करने के लिए जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों, मानवाधिकार रिपोर्टों और ऐतिहासिक साक्ष्यों को साथ रखकर देखना आवश्यक है।
पाकिस्तान में हिंदू आबादी के वर्षवार आंकड़े: 1941 से 2023 तक
पाकिस्तान में हिंदू आबादी के इतिहास को समझने के लिए कुल जनसंख्या और कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी—दोनों को देखना जरूरी है। उपलब्ध जनगणना आंकड़े बताते हैं कि 1941 के बाद विभाजन और बड़े पैमाने पर पलायन के कारण हिंदुओं की आबादी के अनुपात में बड़ा बदलाव आया। हालांकि, बाद के दशकों में हिंदुओं की दर्ज संख्या बढ़ी है।
वर्षवार हिंदू आबादी के आंकड़े
- जनगणना वर्ष हिंदू आबादी (लगभग) कुल आबादी में हिस्सा
- 1901 30.10 लाख 17.07%
- 1911 27.67 लाख 14.71%
- 1921 29.58 लाख 15.25%
- 1931 32.99 लाख 14.65%
- 1941 39.82 लाख 14.60%
- 1951 5.31 लाख 1.58%
- 1961 6.22 लाख 1.45%
- 1972 9.00 लाख 1.44%
- 1981 12.76 लाख 1.51%
- 1998 24.44 लाख 1.85%
- 2017 44.45 लाख लगभग 2.14%
- 2023 52.17 लाख लगभग 2.17%
स्रोत: ऐतिहासिक जनगणना संकलन और पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 रिपोर्ट।
सबसे बड़ा बदलाव कब आया?
- 1941 में 14.6%
विभाजन से पहले - 1951 में 1.58%
विभाजन के बाद
1941 से 1951 के बीच दर्ज हिंदू आबादी लगभग 39.82 लाख से घटकर 5.31 लाख रह गई। इस अवधि में विभाजन, बड़े पैमाने पर पलायन और जनसंख्या के पुनर्वितरण ने आंकड़ों को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
क्या हिंदू आबादी आज भी लगातार घट रही है?
कुल संख्या के लिहाज से उपलब्ध आंकड़े लगातार गिरावट नहीं दिखाते। ऐतिहासिक संकलन के अनुसार, हिंदुओं की संयुक्त आबादी 1998 में करीब 24.44 लाख, 2017 में 44.45 लाख और 2023 में 52.17 लाख थी। यानी इन जनगणनाओं में कुल संख्या बढ़ी है। हालांकि, 2023 की आधिकारिक जनगणना में हिंदू जाति (Hindu Jati) और अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) अलग-अलग दर्ज हैं।
- हिंदू जाति: 38,67,729 (1.61%)
- अनुसूचित जाति: 13,49,487 (0.56%)
- दोनों श्रेणियों का कुल: 52,17,216 (लगभग 2.17%)।
