भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (अप्रैल 2026) से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के गंभीर आरोप लगाकर सियासी हलचल तेज कर दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका: सिंघार ने दावा किया है कि भाजपा राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए कांग्रेस विधायकों को खरीदने और तोड़ने की कोशिश कर रही है।
दबाव की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर विपक्षी विधायकों पर दबाव बना रही है।
वर्तमान चुनावी समीकरण (अप्रैल 2026)
सीटों का गणित: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटें खाली हो रही हैं। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से भाजपा को 2 और कांग्रेस को 1 सीट मिलना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस की चिंता: कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद विधायकों की अयोग्यता और कानूनी मामलों के कारण समीकरण कुछ कमजोर हुए हैं, जिससे पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
नेता प्रतिपक्ष के आरोपों के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने इन आरोपों को कांग्रेस की हार की बौखलाहट करार दिया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस अपने विधायकों पर भरोसा न होने के कारण ऐसे निराधार आरोप लगा रही है।
मप्र में कब-कब लगे हार्स ट्रेडिंग के आरोप
मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के आरोप कई बार लगे हैं।
अप्रैल 2026: राज्यसभा चुनाव के दौरान आशंका
हाल ही में, अप्रैल 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों से पहले भी राजनीति गर्मा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
2023 विधानसभा चुनाव के बाद
दिसंबर 2023 में चुनावी नतीजों के समय भी कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई थी और बड़े नेताओं को अलर्ट मोड पर रखा था।
मार्च 2020: कमलनाथ सरकार का गिरना
यह मध्य प्रदेश के इतिहास में हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था, जिससे 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार गिर गई थी। कांग्रेस ने उस वक्त भाजपा पर करोड़ों रुपये के प्रलोभन और बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में विधायकों को बंधक बनाकर हॉर्स ट्रेडिंग करने का गंभीर आरोप लगाया था।
(1967): विजयाराजे सिंधिया का विद्रोह
हॉर्स ट्रेडिंग शब्द तब उतना प्रचलित नहीं था, लेकिन 53 साल पहले राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर 36 विधायकों के साथ पाला बदला था, जिससे द्वारका प्रसाद मिश्र की सरकार गिर गई थी। राजनीतिक विश्लेषक इसे मध्य प्रदेश में दल-बदल और सत्ता परिवर्तन की पहली बड़ी घटना के रूप में देखते हैं।
इन घटनाओं के अलावा, समय-समय पर उपचुनावों और निकाय चुनावों के दौरान भी दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर विधायकों या पार्षदों को खरीदने की कोशिश के आरोप लगाते रहे हैं।
