नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 6,769.14 करोड़ रुपए की इनकम बताई, जो नेशनल पार्टियों में सबसे ज्यादा है, जबकि कांग्रेस 918.28 करोड़ रुपए की इनकम के साथ दूसरे नंबर पर रही।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रिपोर्ट में छह नेशनल पार्टियों, BJP, कांग्रेस, CPI(M), AAP, BSP, और NPEP की इलेक्शन कमीशन को जमा की गई सालाना ऑडिट रिपोर्ट में की गई घोषणाओं का एनालिसिस किया गया। छह पार्टियों ने मिलकर 2024-25 में पूरे भारत से इकट्ठा की गई 7,960.09 करोड़ रुपए की इनकम बताई। अकेले BJP ने कुल इनकम का 85.03% हासिल किया।
BJP ने अपनी इनकम का 55.76% खर्च किया, जो 3,774.58 करोड़ था, जबकि कांग्रेस ने लगभग 1,111.94 करोड़ खर्च किए, जो उसकी इनकम से 21.09% (193.66 करोड़) ज्यादा है।

CPI(M) ने 172.60 करोड़ की इनकम बताई, जबकि उसने 173.86 करोड़ खर्च किए। BSP ने 58.58 करोड़ की इनकम बताई, जबकि इस साल उसका खर्च 106.30 करोड़ था। पार्टी का खर्च उसकी इनकम से लगभग 47.71 करोड़ (81.45%) ज्यादा है। AAP ने 39.28 करोड़ की इनकम बताई, जबकि उसने 36.46 करोड़ खर्च किए।
2023-24 और 2024-25 के बीच, BJP की इनकम 55.95% (2,428.67 करोड़) बढ़ी, जबकि कांग्रेस की इनकम में 25.05% (306.83 करोड़) की कमी आई। AAP की इनकम में 73.20% (16.60 करोड़) की बड़ी बढ़ोतरी हुई, जबकि CPI(M) की इनकम में 2.96% (4.96 करोड़) की मामूली बढ़ोतरी हुई। बीएसपी की आय में 9.56% (6.19 करोड़) की कमी आई।
राजनीतिक दलों को पिछले मिला चंदा
भारत में राजनीतिक दलों को पिछले 15 वर्षों में मिलने वाले चंदे (Donation) के पैटर्न में बड़े बदलाव आए हैं, विशेष रूप से इलेक्टोरल बॉन्ड और इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से। चंदे का एक बड़ा हिस्सा कुछ ही प्रमुख पार्टियों, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास केंद्रित रहा है।
चंदे का कुल वितरण (मुख्य राजनीतिक दल)
पिछले कुछ वर्षों में, बीजेपी को मिलने वाला चंदा अन्य सभी दलों की तुलना में काफी अधिक रहा है।
राजनीतिक दल चंदे का विवरण (हालिया रुझान)
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
वर्ष 2024-25 में बीजेपी को 6,654 करोड़ का चंदा मिला, जो पिछले वर्ष के 3,967 करोड़ से काफी अधिक है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
कांग्रेस को 2024-25 में करीब 522.11 करोड़ मिले, जो पिछले वर्ष (1,129 करोड़) की तुलना में कम है।
अन्य दल (TMC, BRS, आदि)
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) जैसे क्षेत्रीय दलों को भी महत्वपूर्ण चंदा मिला है, लेकिन बीजेपी की तुलना में यह काफी कम है।
चंदा प्राप्त करने के मुख्य तरीके
पिछले 15 वर्षों में चंदा देने की प्रक्रियाओं में कानूनी बदलाव हुए हैं।
इलेक्टोरल बॉन्ड (2018-2024): 2018 में शुरू की गई इस योजना के माध्यम से गुमनाम रूप से चंदा दिया जाता था। इसे फरवरी 2024 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया गया।
इलेक्टोरल ट्रस्ट: बॉन्ड योजना बंद होने के बाद, कंपनियां अब प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट जैसे माध्यमों से चंदा दे रही हैं। 2024-25 में, कुल राजनीतिक चंदे का लगभग 82% अकेले बीजेपी को प्राप्त हुआ।
अज्ञात स्रोत: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अनुसार, 2004-05 से 2014-15 के बीच राजनीतिक दलों की आय का 69% हिस्सा “अज्ञात स्रोतों” से आया था।
प्रमुख दानदाता (कॉर्पोरेट जगत)
राजनीतिक दलों को चंदा देने में बड़े कॉर्पोरेट घराने सबसे आगे रहे हैं:
टाटा समूह: 2024-25 में टाटा समूह सबसे बड़ा दानदाता रहा, जिसने विभिन्न ट्रस्टों के माध्यम से 915 करोड़ का योगदान दिया।
अन्य प्रमुख नाम: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (100 करोड़), मेघा इंजीनियरिंग, रोंगटा ग्रुप, और बजाज ग्रुप जैसे नाम प्रमुख दानदाताओं में शामिल हैं।
पिछले 15 वर्षों के रुझान (2010 – 2025)
2010-2014: इस दौरान कांग्रेस और बीजेपी दोनों को मिलने वाला चंदा अपेक्षाकृत संतुलित था, हालांकि कॉर्पोरेट चंदा धीरे-धीरे बढ़ रहा था।
2014 के बाद: 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी के चंदे में “छप्पर फाड़” वृद्धि देखी गई, जिससे सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच आर्थिक असमानता बहुत बढ़ गई है।
वर्तमान स्थिति: 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, कुल घोषित राजनीतिक चंदे का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 85%) केवल एक ही पार्टी (बीजेपी) के पास जा रहा है।
विभिन्न वित्तीय वर्षों के लिए प्रमुख दलों को मिला चंदा
वित्तीय वर्ष 2024-25 (अनुमानित और नवीनतम रिपोर्ट)
इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के बंद होने के बाद, राजनीतिक दलों ने इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से चंदा लेना शुरू कर दिया है।
इलेक्टोरल ट्रस्ट चंदा: इस वर्ष इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से मिलने वाले चंदे में 212% की वृद्धि हुई है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP): कुल राजनीतिक चंदे का लगभग 82% (लगभग 3,121 करोड़ रुपये) अकेले भाजपा को प्राप्त हुआ है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): कुल चंदे का लगभग 8% (लगभग 299 करोड़ रुपये) कांग्रेस को मिला है।
अन्य दल: बाकी 10% चंदा (लगभग 400 करोड़ रुपये) अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच विभाजित है。
वित्तीय वर्ष 2023-24
इस वर्ष राष्ट्रीय दलों के चंदे में पिछले वर्ष की तुलना में 199% की भारी वृद्धि दर्ज की गई।
भाजपा: चंदा 719.86 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,243.95 करोड़ रुपये हो गया (211% की वृद्धि)।
कांग्रेस: चंदा 79.92 करोड़ रुपये से बढ़कर 281.48 करोड़ रुपये हो गया (252% की वृद्धि)।
आम आदमी पार्टी (AAP): इसके चंदे में 70% की गिरावट देखी गई और यह घटकर 11.06 करोड़ रुपये रह गया।
वित्तीय वर्ष 2022-23
इस अवधि में घोषित कुल चंदे का बड़ा हिस्सा भाजपा के पास रहा।
भाजपा: लगभग 719.85 करोड़ रुपये।
कांग्रेस: लगभग 79.92 करोड़ रुपये।
अन्य राष्ट्रीय दल: माकपा (CPI-M) और आप (AAP) जैसे दलों को तुलनात्मक रूप से बहुत कम चंदा प्राप्त हुआ।
प्रमुख चंदा स्रोत और ट्रेंड्स
कॉर्पोरेट दान: राजनीतिक दलों को मिलने वाले कुल चंदे का लगभग 89% हिस्सा कॉर्पोरेट या व्यापारिक घरानों से आता है।
इलेक्टोरल ट्रस्ट: प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (Prudent Electoral Trust) जैसे ट्रस्ट सबसे बड़े दानदाताओं में शामिल हैं, जो टाटा और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों से धन जुटाते हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव: चंदा देने के मामले में दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र सबसे आगे रहे हैं।
पारदर्शिता: सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद, अब चंदा देने वालों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य हो गया है, जिससे गुमनाम चंदा देना अब कठिन हो गया है।
