भोपाल। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट दिसंबर 2024 में भोपाल के मेंडोरी इलाके में 52 kg सोना और 11 करोड़ रुपए कैश मिलने वाले इनोवा कार मामले की जांच कर रहा है। इस मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा से जुड़ी एक और बड़ी प्रॉपर्टी पर अपना शिकंजा कस लिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, भोपाल के शाहपुरा में लगभग 7.5 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा यह स्कूल बिल्डिंग राजमाता (भारतमाता) शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति, भोपाल के नाम पर रजिस्टर्ड है। सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा, उनके साथी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल इस ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर लिस्टेड हैं। जांच में पता चला है कि ट्रस्ट ने सिर्फ बेनामीदार के तौर पर काम किया, जबकि सौरभ शर्मा प्रॉपर्टी के असली मालिक हैं।
बेनामी प्रॉपर्टी घोषित, नोटिस जारी
जांच के बाद स्कूल की बिल्डिंग बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांज़ैक्शन प्रोहिबिशन एक्ट (PBPT एक्ट) 1988 के तहत बेनामी पाई गई। इसके आधार पर, स्कूल की बिल्डिंग को एक्ट के सेक्शन 24(3) के तहत टेम्पररी तौर पर अटैच कर दिया गया है। बेनामी होल्डर्स और असली मालिक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जिस ट्रस्ट की बात हो रही है, उसने स्कूल चलाने के लिए एक बड़ी स्कूल चेन से फ्रेंचाइजी भी ली थी। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब ट्रस्ट के कंस्ट्रक्शन और दूसरी एक्टिविटीज़ के लिए इस्तेमाल हुए फंड के सोर्स की जांच कर रहा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और प्रॉपर्टीज़ के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है।
ई प्रॉपर्टी पहले ही सीज
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि सौरभ शर्मा और उसके साथियों से जुड़े मामलों में PBPT एक्ट के तहत कई अचल प्रॉपर्टीज़ और बेनामी बिज़नेस पहले ही सीज़ किए जा चुके हैं। इस एक्शन को उसी प्रोसेस का अगला हिस्सा माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 18 और 19 दिसंबर, 2024 की रात को ग्वालियर RTO में रजिस्टर्ड एक इनोवा कार भोपाल के मेंडोरी गांव में लावारिस हालत में मिली थी। कार चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। तलाशी के दौरान गाड़ी से 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ रुपए कैश बरामद हुए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जांच की और पाया कि यह प्रॉपर्टी असल में पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा की थी, जो इसे रिश्तेदारों और करीबी लोगों की आड़ में चला रहा था।

आरक्षक सौरभ शर्मा
पूर्व आरटीओ (RTO) आरक्षक सौरभ शर्मा मध्य प्रदेश के एक बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले के मुख्य आरोपी हैं। 2026 की शुरुआत तक, वह और उनके करीबी सहयोगी कानून के घेरे में हैं।
- आय से अधिक संपत्ति का मामला
अथाह संपत्ति: लोकायुक्त, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सौरभ शर्मा के पास सैकड़ों करोड़ की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है।
बरामदगी: दिसंबर 2024 में एक लावारिस कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे, जिसे सौरभ शर्मा से जोड़ा गया। इसके अलावा, भोपाल और ग्वालियर में उनके ठिकानों से लगभग 234 किलो चांदी और अन्य लग्जरी संपत्तियां मिलीं।
हालिया कार्रवाई (जनवरी 2026): आयकर विभाग ने भोपाल के मेंडोरी स्थित एक स्कूल भवन (कीमत 7.5 करोड़ रुपए) को बेनामी संपत्ति मानते हुए अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
- धोखाधड़ी और फर्जी नियुक्ति
फर्जी शपथ पत्र: ग्वालियर के सिरोल थाने में सौरभ शर्मा और उनकी मां उषा (उमा) शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी (FIR) दर्ज की गई है।
मामला: आरोप है कि 2016 में सौरभ ने अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए झूठा शपथ पत्र दिया था कि उनके परिवार में कोई भी सरकारी सेवा में नहीं है, जबकि उनका बड़ा भाई पहले से ही छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी में था।
- कानूनी स्थिति और जांच
गिरफ्तारी और जमानत: लंबी फरारी के बाद सौरभ शर्मा ने जनवरी 2025 में कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। हालांकि, कुछ मामलों में उन्हें जमानत मिली, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर जांचों के कारण उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
ED की कार्रवाई: ED ने अब तक उनकी लगभग 108 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सौरभ शर्मा ने 2015 में सेवा शुरू की थी और 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने महज 7-8 साल की नौकरी में भ्रष्ट तरीकों से 500 से 700 करोड़ रुपये तक की संपत्ति अर्जित की।
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