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US-Israel & Iran War: रूस का बड़ा और सख्त बयान

aaptak.news28@gmail.com March 8, 2026
international law over speak russia

नई दिल्ली। वेस्ट एशिया में इस समय हालात बहुत टेंशन वाले हैं। US और इजराइल के ईरान पर हमलों ने दुनियाभर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच, रूस ने एक बड़ा और कड़ा बयान दिया है। रूस का कहना है कि जिस “इंटरनेशनल कानून” की हम बात करते हैं, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए, रूस ने प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के पुराने प्रपोजल को फिर से लागू करने की मांग की है, जिसमें UN सिक्योरिटी काउंसिल के पांच परमानेंट मेंबर्स (5 देशों) की मीटिंग बुलाने की सिफारिश की गई थी।

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सिर्फ कागजों पर रह गया है कानून

रूस के सरकारी टीवी चैनल, “रूसिया” के साथ एक इंटरव्यू में क्रेमलिन के स्पोक्सपर्सन दिमित्री पेसकोव ने बहुत साफ-साफ बात कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में, हमने वह सबकुछ खो दिया है, जिसे पहले इंटरनेशनल कानून कहा जाता था। पेसकोव ने सवाल किया कि जब कानून ही नहीं रहा, तो किसी से उसके नियमों और उसूलों को मानने के लिए कैसे कहा जा सकता है?

पेसकोव ने इस हालात को समझाने के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल किया-De Jure और De Facto। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कानून, “कानून के हिसाब से,” किताबों या कागजों में दिख सकता है, लेकिन असल में, जमीन पर इसका कोई निशान नहीं बचा है।

पुराने प्रस्ताव पर पुतिन का जोर

पेसकोव ने जोर देकर कहा कि आज दुनिया में कोई भी साफतौर पर यह नहीं बता सकता कि इंटरनेशनल कानून असल में क्या है। इसलिए, किसी से भी इसे मानने के लिए कहना बेकार है। उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी से पहले, पुतिन ने प्रस्ताव दिया था कि दुनिया की पांच बड़ी ताकतें (रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) ग्लोबल सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी पर बात करने के लिए एक साथ मिलें। मौजूदा हालात को देखते हुए, इस प्रस्ताव पर फिर से सोचना बहुत जरूरी है।

अस्थिरता और आर्थिक संकट का खतरा

ईरान पर हमलों का जिक्र करते हुए, पेसकोव ने चेतावनी दी कि इस इलाके में हालात अब काफी हद तक काबू से बाहर हैं। बढ़ते क्षेत्रीय झगड़ों और अनसुलझे मुद्दों का मिला-जुला असर सिर्फ जंग तक ही सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया को बड़े आर्थिक और राजनीतिक नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

US से जवाब की मांग

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने सीधे US पर निशाना साधा। लावरोव ने कहा, US को अपने बड़े प्लान्स को साफ करना चाहिए, जिनकी वजह से ऐसी हालत बन रही है। उन्होंने मांग की कि US बताए कि ये प्लान्स तय इंटरनेशनल नियमों और नॉर्म्स के हिसाब से कैसे हैं। उन्होंने साफ किया कि अब यह तय करने का समय आ गया है कि हम किस तरह की दुनिया में रहते हैं।

क्या है अंतरराष्ट्रीय कानून

अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) संप्रभु राष्ट्रों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और व्यक्तियों के बीच संबंधों, आचरण और कानूनी जिम्मेदारियों को नियंत्रित करने वाले नियमों, मानदंडों और मानकों का एक संग्रह है। यह मुख्य रूप से संधियों, प्रथाओं और सामान्य कानूनी सिद्धांतों के माध्यम से शांति, मानव अधिकार, व्यापार, और युद्ध संचालन जैसे मामलों को विनियमित करता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुख्य पहलू

परिभाषा: यह राष्ट्रों (States) के बीच संबंधों को सुव्यवस्थित करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।

प्रकार: मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।

सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कानून (Public International Law): यह राष्ट्रों (देशों) के आपसी संबंधों को नियंत्रित करता है, जैसे कि सीमा विवाद।

निजी अंतरराष्ट्रीय कानून (Private International Law): यह अलग-अलग देशों के व्यक्तियों या कंपनियों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों को निपटाता है।

स्रोत: अंतरराष्ट्रीय कानून मुख्य रूप से संधियों (Treaties), अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं (Customs), और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के क़ानून के अनुच्छेद 38 के तहत मान्य कानूनी सिद्धांतों से आते हैं।

कार्यक्षेत्र: इसमें मानवाधिकार, समुद्र के कानून (UNCLOS), अंतरिक्ष कानून, पर्यावरण, शरणार्थी, और अंतरराष्ट्रीय अपराध शामिल हैं।

प्रवर्तन: इसे लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) जैसी संस्थाएँ हैं, लेकिन यह राष्ट्रीय कानूनों की तरह कठोरता से लागू नहीं होता, क्योंकि यह संप्रभु राष्ट्रों की सहमति पर आधारित है।

यह कानून देशों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों और विश्व व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

किस—किस देश ने कब—कब तोड़ा अंतरराष्ट्रीय कानून

अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) का उल्लंघन विभिन्न देशों द्वारा समय-समय पर किया गया है, जिसमें युद्ध, मानवाधिकार उल्लंघन, और संप्रभुता का हनन शामिल है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर और जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन के कुछ प्रमुख उदाहरण।

  1. रूस (Russia)

यूक्रेन आक्रमण (2022-वर्तमान): रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करना और क्षेत्रों पर कब्जा करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत “आक्रामकता का अपराध” (crime of aggression) माना गया है।

क्रीमिया का विलय (2014): रूस ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए क्रीमिया को अपने में मिला लिया।

युद्ध अपराध: यूक्रेन में रूसी सेना द्वारा नागरिकों पर हमले, टॉर्चर और बच्चों के अवैध निर्वासन के मामले सामने आए हैं।

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

इराक युद्ध (2003): संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना इराक पर आक्रमण, जिसे कई देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना गया।

गुआंतानामो बे (2002-वर्तमान): कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार और जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन के आरोप।

ड्रोन हमले: पाकिस्तान, यमन और सोमालिया में ड्रोन हमलों से नागरिकों की मौत, जिसे संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेषज्ञों ने अवैध करार दिया था।

  1. इज़राइल (Israel)

फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा (1967-वर्तमान): वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों (settlements) का निर्माण, जो फोर्थ जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है।

गाजा में कार्रवाई (2023-2024): अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और ICC के समक्ष नागरिकों पर हमले और सामूहिक दंड के आरोप।

  1. चीन (China)

दक्षिण चीन सागर (2016-वर्तमान): स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के फैसले के बावजूद, चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप बनाकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है।

शिंजियांग मानवाधिकार उल्लंघन: मानवाधिकार समूहों ने उइगर मुसलमानों के खिलाफ जनसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप लगाए हैं।

  1. अन्य उदाहरण (इतिहास और वर्तमान)

म्यानमार (2017-वर्तमान): रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कथित नरसंहार।

सीरिया (2011-वर्तमान): गृहयुद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का उपयोग और नागरिकों पर हमले।

अल्बानिया (1946): कोर्फू चैनल मामले में ब्रिटिश जहाजों को नुकसान पहुंचाने के लिए बारूदी सुरंगें बिछाना।

अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के परिणाम

जब कोई देश कानून तोड़ता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) या अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) जैसी संस्थाओं द्वारा जांच का सामना करना पड़ सकता है। यद्यपि इन कानूनों को लागू करना कठिन होता है, लेकिन उल्लंघन करने पर प्रतिबंध (sanctions), कूटनीतिक अलगाव और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किए जा सकते हैं।

हालिया उल्लंघन (2026 और हाल के वर्ष)

इजरायल और अमेरिका (मार्च 2026): स्विट्जरलैंड के रक्षा मंत्री मार्टिन फिफ्स्टर और फिनलैंड के राष्ट्रपति के अनुसार, ईरान पर किए गए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना यूएन की अनुमति के बल का प्रयोग अवैध है।

रूस: यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और वर्तमान संघर्षों के संदर्भ में रूस पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। रूसी अधिकारियों ने खुद वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा है कि “अंतरराष्ट्रीय कानून अब लगभग खत्म हो चुका है”।

इजरायल (ऐतिहासिक और वर्तमान): इजरायल पर फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अवैध बस्तियों का निर्माण, कब्जे वाली भूमि पर सैन्य कार्रवाई और जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।

विशिष्ट श्रेणियों में उल्लंघन

युद्ध अपराध और मानवाधिकार: अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने समय-समय पर विभिन्न देशों के नेताओं और सरकारों के खिलाफ जांच की है। उदाहरण के लिए, 2021 में इजरायल सरकार के खिलाफ युद्ध अपराधों की जांच शुरू की गई थी।

यूरोपीय मानवाधिकार: यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले देशों जैसे रूस, जॉर्जिया, अजरबैजान और आर्मेनिया पर भी मानवाधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के मामले रहे हैं।

नियम और परिणाम

संयुक्त राष्ट्र चार्टर (अनुच्छेद 51): यह केवल आत्मरक्षा में बल प्रयोग की अनुमति देता है। इसके बाहर की गई कोई भी सैन्य कार्रवाई उल्लंघन मानी जाती है।

उल्लंघन के परिणाम: यदि कोई देश कानून तोड़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार उसे अवैध आचरण तुरंत बंद करना होता है और हुई क्षति की भरपाई (Reparations) करनी पड़ती है।

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