
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की टिप्पणी ने उस राजनीतिक उथल-पुथल पर बहस फिर से छेड़ दी है, जिसके कारण 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार गिर गई थी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में कांग्रेस सरकार इसलिए गिराई, क्योंकि उन्हें लगता था कि पर्दे के पीछे से वही (दिग्विजय सिंह) ही इसे चला रहे थे।
रविवार को सोशल मीडिया पर कमलनाथ ने पार्टी नेताओं से 2020 के प्रकरण को भूल जाने का आग्रह किया। उन्होंने लिखा, “हाल ही में 2020 में मध्य प्रदेश में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के गिरने के बारे में कुछ टिप्पणी की गई है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि पुराने मुद्दों को खोदने का कोई मतलब नहीं है।”
नाथ ने कहा, “लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा सिंधिया को लगता था कि दिग्विजय सिंह सरकार चला रहे हैं। इसी गुस्से के चलते उन्होंने कांग्रेस विधायकों को तोड़कर हमारी सरकार गिरा दी।”
यह बयान मार्च 2020 के राजनीतिक संकट का संदर्भ देता है, जब सिंधिया समर्थक 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसके कारण कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी और भाजपा की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ़ हो गया था।
दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि 2020 में उनकी, कमलनाथ और सिंधिया की एक प्रमुख उद्योगपति के आवास पर मुलाकात हुई थी। उस बैठक के दौरान सिंधिया ने कथित तौर पर नाथ को ग्वालियर और चंबल क्षेत्र से संबंधित लंबित मुद्दों की एक सूची सौंपी थी। सिंह के अनुसार, नाथ उस सूची पर कार्रवाई करने में विफल रहे, जिससे कथित तौर पर सिंधिया को यह विश्वास हो गया कि सिंह ही प्रशासन को नियंत्रित कर रहे हैं, जिससे वह भाजपा में शामिल हो गए।
इस बातचीत ने उस महत्वपूर्ण दौर के दौरान कांग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, कमलनाथ अब बीती बातों को भूल जाने की बात कह रहे हैं, लेकिन यह प्रकरण आगामी चुनावी मुकाबलों से पहले राज्य में राजनीतिक परिदृश्य को आकार दे रहा है।