नई दिल्ली। शोधकर्ताओं ने हाल ही में ऐसे ब्लड टेस्ट विकसित किए हैं, जो पैंक्रियाटिक कैंसर (अग्नाशय के कैंसर) का शुरुआती चरणों में पता लगाने में सक्षम हैं, जिससे इलाज के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नए ब्लड टेस्ट की मुख्य विशेषताएं
उच्च सटीकता: कुछ नए टेस्ट, जैसे कि National Institutes of Health (NIH) द्वारा समर्थित परीक्षण, शुरुआती चरणों (Stage I/II) में 87.5% और सभी चरणों में 91.9% तक सटीक पाए गए हैं।
चार-बायोमार्कर तकनीक: नया परीक्षण चार विशिष्ट प्रोटीनों (ANPEP, PIGR, CA19-9 और THBS2) के संयोजन का उपयोग करता है। यह केवल मानक CA19-9 टेस्ट की तुलना में बहुत अधिक संवेदनशील है।
लिक्विड बायोप्सी: यह एक प्रकार की ‘लिक्विड बायोप्सी’ है जो रक्त में मौजूद कैंसर सेल्स या उनसे निकलने वाले DNA (cfDNA) के संकेतों को पहचानती है।
AI का उपयोग: कुछ नए परीक्षण, जैसे कि PanMETAI, AI और मेटाबॉलिक फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग करके 94% तक सटीकता के साथ कैंसर का पता लगा सकते हैं।
यह महत्वपूर्ण क्यों?
देर से लक्षण: पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण अक्सर तब तक दिखाई नहीं देते जब तक कि वह शरीर के अन्य अंगों में न फैल जाए। यह टेस्ट उन लक्षणों के आने से पहले ही बीमारी को पकड़ सकता है।
बेहतर जीवन प्रत्याशा: अगर कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो 5 साल की जीवित रहने की दर (survival rate) में काफी सुधार हो सकता है।
वर्तमान उपलब्धता: वर्तमान में ये परीक्षण मुख्य रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों (जैसे कि जिनका पारिवारिक इतिहास रहा हो या जिन्हें अचानक मधुमेह हुआ हो) के लिए सबसे अधिक प्रभावी माने जा रहे हैं। GRAIL Galleri जैसे कुछ मल्टी-कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट पहले से ही उपलब्ध हैं जो पैंक्रियाटिक कैंसर सहित 50 से अधिक प्रकार के कैंसर की जांच कर सकते हैं।
