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स्लीप एपनिया के लिए वैज्ञानिकों ने खोजी गोली : रिसर्च

aaptak.co.in1@gmail.com March 11, 2026
sleep apnea

हेल्थ डेस्क। सल्थिएम नाम की एक दवा ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया वाले लोगों को रात में ज्यादा आसानी से सांस लेने और कुल मिलाकर बेहतर नींद लेने में मदद कर सकती है। ये नतीजे एक यूरोपियन क्लिनिकल ट्रायल से आए हैं, जिसमें गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी ने अहम भूमिका निभाई थी। रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से उन मरीजों के लिए दवा के इलाज की संभावना बढ़ गई है, जिन्हें ब्रीदिंग मास्क झेलने में दिक्कत होती है।

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स्टडी के नतीजे द लैंसेट में पब्लिश हुए थे। ट्रायल में मीडियम से गंभीर स्लीप एपनिया वाले कुल 298 लोगों ने हिस्सा लिया। एक चौथाई पार्टिसिपेंट्स को प्लेसिबो दिया गया, जबकि बाकी का इलाज सल्थिएम की अलग-अलग डोज़ से किया गया। यह स्टडी चार यूरोपियन देशों में हुई और इसमें डबल ब्लाइंड डिज़ाइन को फॉलो किया गया, जिसका मतलब है कि न तो पार्टिसिपेंट्स को और न ही रिसर्चर्स को पता था कि एक्टिव दवा किसे दी जा रही है।

स्टडी से पता चलता है कि सांस रुकने में काफी कमी आई

जिन मरीजों को सल्थिएम की ज्यादा डोज दी गई, उन्हें प्लेसिबो दिए गए मरीजों की तुलना में नींद के दौरान सांस रुकने में 47 परसेंट तक कम रुकावट महसूस हुई। उनमें रात भर ऑक्सीजन लेवल में भी सुधार दिखा।

ऐसा लगता है कि सुल्थिएम शरीर के सांस लेने के कंट्रोल को स्थिर करके और रेस्पिरेटरी ड्राइव को बढ़ाकर काम करता है। इससे नींद के दौरान ऊपरी एयरवे के बंद होने की संभावना कम हो जाती है, जो ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का मुख्य कारण है। ट्रायल के दौरान बताए गए ज़्यादातर साइड इफेक्ट हल्के और कुछ समय के लिए थे।

गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी की साहलग्रेन्स्का एकेडमी में पल्मोनरी मेडिसिन के सीनियर प्रोफेसर जान हेडनर ने इस स्टडी में अहम भूमिका निभाई है। जान हेडनर कहते हैं, “हम लंबे समय से इस इलाज की स्ट्रेटेजी पर काम कर रहे हैं, और नतीजे बताते हैं कि स्लीप एपनिया पर वाकई दवाइयों के जरिए असर डाला जा सकता है। यह एक बड़ी कामयाबी जैसा लगता है, और अब हम यह पता लगाने के लिए बड़ी और लंबी स्टडीज का इंतजार कर रहे हैं कि क्या असर समय के साथ बना रहता है और क्या इलाज ज्यादा मरीजों के ग्रुप के लिए सुरक्षित है।” गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के लुडगर ग्रोटे और काज स्टेनलोफ ने भी इस रिसर्च में अहम योगदान दिया।

कई मरीज CPAP ट्रीटमेंट बर्दाश्त नहीं कर पाते

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया तब होता है, जब नींद के दौरान ऊपरी एयरवे बार-बार बंद हो जाता है। इन घटनाओं की वजह से सांस कुछ समय के लिए रुक जाती है, ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है और नींद में बार-बार रुकावट आती है। समय के साथ, बिना इलाज के स्लीप एपनिया से गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी, स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज शामिल हैं।

हालांकि, स्लीप एपनिया आम है, लेकिन अभी ऐसी कोई दवा नहीं है जो सीधे इसके असली कारण का इलाज कर सके। सबसे आम थेरेपी कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) है, जिसमें नींद के दौरान एयरवे को खुला रखने के लिए मास्क का इस्तेमाल होता है। हालांकि, CPAP बहुत असरदार है, लेकिन कई मरीजों को इसे इस्तेमाल करने में मुश्किल होती है। आधे से ज्यादा लोग एक साल के अंदर डिवाइस का इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं, क्योंकि मास्क असहज महसूस करा सकता है या नींद में रुकावट डाल सकता है।

सुलथियाम एक मौजूदा दवा है, जिसे पहले बचपन की मिर्गी के एक तरह के इलाज के लिए मंजूरी दी गई थी। रिसर्चर अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या यह स्लीप एपनिया के लिए दवा का इलाज भी बन सकती है।

क्या है स्लीप एप्निया (Sleep Apnea)

एक गंभीर नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है। यदि इसका इलाज न किया जाए, तो यह शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर सकता है और हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

स्लीप एप्निया के मुख्य प्रकार

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (OSA): यह सबसे सामान्य प्रकार है। यह तब होता है जब गले की मांसपेशियां शिथिल (relax) होकर वायुमार्ग को अवरुद्ध कर देती हैं।

सेंट्रल स्लीप एप्निया (CSA): यह तब होता है जब मस्तिष्क सांस को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को सही संकेत नहीं भेज पाता।

कॉम्प्लेक्स स्लीप एप्निया: यह OSA और CSA दोनों का मिश्रण है।

प्रमुख लक्षण
नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

रात के समय: बहुत तेज खर्राटे लेना, सांस रुकने के एपिसोड (अक्सर पार्टनर द्वारा देखे जाते हैं), और सोते समय हांफना या दम घुटने जैसा महसूस होना।

दिन के समय: अत्यधिक नींद आना, सुबह उठने पर सिरदर्द, एकाग्रता में कमी, और चिड़चिड़ापन।

कारण और जोखिम कारक

वजन: अधिक वजन या मोटापा (Obesity) वायुमार्ग में रुकावट पैदा कर सकता है।

शारीरिक संरचना: गर्दन का घेरा अधिक होना, बड़े टॉन्सिल (विशेषकर बच्चों में), या छोटा निचला जबड़ा।

जीवनशैली: धूम्रपान और शराब का सेवन गले की मांसपेशियों को अधिक शिथिल कर देता है।

अन्य कारक: पुरुष होना, बढ़ती उम्र, और परिवार में स्लीप एप्निया का इतिहास।

निदान और उपचार
डॉक्टर आमतौर पर नींद के अध्ययन (Sleep Study/Polysomnography) के माध्यम से इसका निदान करते हैं।

उपचार का प्रकार विवरण
CPAP मशीन एक मशीन जो मास्क के जरिए हवा का हल्का दबाव भेजती है ताकि वायुमार्ग खुला रहे।
जीवनशैली में बदलाव वजन कम करना, शराब छोड़ना और पीठ के बजाय करवट लेकर सोना।
ओरल अप्लायंसेज दांतों में पहनने वाले उपकरण जो जबड़े को आगे रखते हैं ताकि सांस का रास्ता न रुके।
सर्जरी टॉन्सिल हटाना या वायुमार्ग को चौड़ा करने के लिए अन्य प्रक्रियाएं।

वैज्ञानिकों ने पता लगाया-कैसे काम करती है मेमोरी

स्लीप एपनिया के मरीज

दुनिया भर में लगभग 1 अरब (100 करोड़) लोग [ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA)] से पीड़ित हैं। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान बार-बार सांस रुकती है, जो 30 से 69 वर्ष की आयु के लोगों में बहुत आम है। 100 करोड़ में से लगभग 425 मिलियन (42.5 करोड़) लोगों को मध्यम से गंभीर स्लीप एपनिया है।

स्लीप एपनिया के आंकड़े

कुल प्रभावित: लगभग 1 बिलियन लोग (हल्के से लेकर गंभीर स्थिति)।

मध्यम से गंभीर मामले: अनुमानित 425 मिलियन से 458 मिलियन वयस्क।

भारत में स्थिति
भारत में लगभग 10 करोड़ लोगों को स्लीप एपनिया की समस्या हो सकती है, जो वर्किंग क्लास में एक बड़ी समस्या है।

अमेरिका में स्थिति: अमेरिका में लगभग 9% वयस्क (लगभग 18 मिलियन) इस समस्या से प्रभावित हैं।

स्वास्थ्य प्रभाव: यदि इसका इलाज (जैसे सीपीएपी, MSD Manuals के अनुसार) न किया जाए, तो यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के जोखिम को बढ़ाता है।

मुख्य तथ्य:

अल्प-निदान (Underdiagnosis): स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है, जिसका बहुत कम निदान होता है।

खतरे के कारक: मोटापा, अधिक उम्र, और गर्दन का मोटा होना इसके प्रमुख कारण हैं।

लक्षण: जोर से खर्राटे लेना, रात में हांफते हुए जागना, और दिन में अत्यधिक थकान महसूस होना।

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