–भारत की Skyroot करेगी दो रॉकेट लॉन्च, अमेरिकी स्टार्टअप Reflect Orbital की अनोखी योजना
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। कल्पना कीजिए कि रात के समय भी किसी खास इलाके में सूर्य की रोशनी पहुंचाई जा सके। यह विज्ञान-कथा जैसा विचार अब एक व्यावसायिक अंतरिक्ष परियोजना का हिस्सा बन रहा है। अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित स्टार्टअप कंपनी Reflect Orbital ने भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी Skyroot Aerospace के साथ दो रॉकेट लॉन्च का समझौता किया है। इन प्रक्षेपणों के जरिए भविष्य में ऐसे उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की योजना है, जो विशेष परावर्तक शीशों की मदद से सूर्य की रोशनी को धरती के चुनिंदा स्थानों तक पहुंचा सकेंगे। कंपनियों ने 14 अक्टूबर 2026 को इस समझौते की घोषणा की। हालांकि, लॉन्च की निश्चित तारीख और अनुबंध की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
कैसे काम करेगी अंतरिक्ष से रोशनी पहुंचाने की तकनीक?
Reflect Orbital ऐसी सैटेलाइट प्रणाली विकसित कर रही है, जिसमें बड़े परावर्तक शीशों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए सूर्य की रोशनी को परावर्तित कर धरती के निर्धारित क्षेत्रों की ओर भेजने का प्रयास करेंगे। कंपनी का लक्ष्य मांग के अनुसार चुनिंदा स्थानों पर अतिरिक्त रोशनी उपलब्ध कराना है। इसके लिए जमीन पर बड़े प्रकाश उपकरण लगाने की जरूरत कम हो सकती है। कंपनी ने लगभग पांच किलोमीटर तक के क्षेत्र में समायोजित सूर्यप्रकाश उपलब्ध कराने की योजना बताई है। हालांकि, इस क्षमता और इसके व्यावहारिक परिणामों का वास्तविक प्रदर्शन होना अभी बाकी है।
भारत की Skyroot Aerospace करेगी दो लॉन्च
इस परियोजना में भारत की हैदराबाद स्थित Skyroot Aerospace की भूमिका महत्वपूर्ण है। समझौते के तहत दो समर्पित रॉकेट लॉन्च किए जाएंगे।
- पहला लॉन्च: Skyroot के Vikram-1 रॉकेट से।
- दूसरा लॉन्च: कंपनी के विकासाधीन Vikram-1U प्रक्षेपण यान से।
Reflect Orbital के मुताबिक, इन लॉन्चों से उसके भविष्य के अंतरिक्ष यानों को प्रक्षेपित करने के लिए अतिरिक्त क्षमता और निर्धारित लॉन्च कार्यक्रम उपलब्ध होगा। फिलहाल दोनों मिशनों की तारीखें घोषित नहीं की गई हैं।
रात में सूर्य की रोशनी का क्या होगा इस्तेमाल?
कंपनी ने इस तकनीक के कई संभावित उपयोग बताए हैं।
सोलर प्लांट में बिजली उत्पादन बढ़ाने की कोशिश
सौर ऊर्जा संयंत्र दिन में सूर्य की रोशनी से बिजली बनाते हैं। कंपनी का विचार है कि अंतरिक्ष से अतिरिक्त प्रकाश पहुंचाकर कुछ परिस्थितियों में सोलर पैनलों के काम करने का समय बढ़ाया जा सके। हालांकि, रात में इस व्यवस्था से वास्तव में कितनी अतिरिक्त बिजली बनेगी, यह अभी प्रमाणित नहीं हुआ है।
आपदा के समय राहत और बचाव अभियान
बाढ़, भूकंप या अन्य आपदाओं के बाद रात में खोज एवं बचाव कार्यों के दौरान अतिरिक्त रोशनी उपयोगी हो सकती है। दूरदराज के क्षेत्रों में राहत दलों को इससे सहायता मिलने की संभावना जताई गई है।
दूरस्थ निर्माण स्थलों पर रोशनी
कंपनी इस तकनीक को ऐसे स्थानों पर भी उपयोगी मानती है, जहां रात के समय काम करने के लिए अतिरिक्त प्रकाश की जरूरत होती है और पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था स्थापित करना मुश्किल हो सकता है।
क्या अब रात में दिन जैसा उजाला होगा?
फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरिक्ष से परावर्तित रोशनी सूर्य के सीधे प्रकाश जैसी होगी या नहीं, यह उपग्रह की ऊंचाई, शीशों के आकार, प्रकाश की दिशा और लक्ष्य क्षेत्र पर निर्भर करेगा।
इस परियोजना का पहला उद्देश्य हर जगह दिन जैसा उजाला करना नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार चुनिंदा स्थानों पर अतिरिक्त प्रकाश पहुंचाना है। तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले इसकी प्रभावशीलता और सीमाओं का परीक्षण जरूरी होगा।
पर्यावरण और खगोल विज्ञान को लेकर चिंता
इस योजना को लेकर वैज्ञानिकों और पर्यावरण संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। रात के प्राकृतिक अंधेरे में बदलाव से वन्यजीवों, मनुष्यों की जैविक घड़ी और खगोलीय अनुसंधान पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
Reflect Orbital का कहना है कि वह इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए खगोलविदों, स्थानीय समुदायों और नियामक संस्थाओं के साथ संवाद जारी रखेगी। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने जुलाई 2026 में कंपनी के पहले प्रदर्शन उपग्रह के संचालन के लिए अनुमति दी थी। यह अनुमति अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि तकनीक का व्यावसायिक उपयोग सफल हो चुका है।
भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए नया अवसर
Skyroot Aerospace के साथ यह समझौता भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक अवसर का उदाहरण है। भारतीय कंपनी अब अपने Vikram रॉकेट परिवार के जरिए विदेशी ग्राहकों के उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की दिशा में काम कर रही है।
यदि Reflect Orbital की तकनीक परीक्षणों में सफल होती है, तो भविष्य में अंतरिक्ष आधारित प्रकाश सेवाओं के लिए एक नया बाजार विकसित हो सकता है। लेकिन अभी यह परियोजना विकास के चरण में है और इसके व्यापक व्यावसायिक इस्तेमाल की समयसीमा स्पष्ट नहीं है।
क्या इससे रात में बिजली कटौती खत्म हो जाएगी?
नहीं, फिलहाल ऐसा दावा करने का आधार नहीं है। अंतरिक्ष से सूर्य की रोशनी परावर्तित करना और बिजली का उत्पादन या भंडारण करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इस परियोजना से सोलर प्लांट को कुछ परिस्थितियों में मदद मिलने की संभावना है, लेकिन इससे घरों, गांवों या शहरों में रात के समय बिजली की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होती।
रात में सूर्य की रोशनी उपलब्ध कराने की योजना अंतरिक्ष तकनीक का एक नया प्रयोग है। भारत की Skyroot Aerospace और अमेरिकी Reflect Orbital के बीच दो लॉन्च का समझौता इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। फिर भी, तकनीक की वास्तविक क्षमता, लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और व्यावसायिक सफलता का आकलन इसके परीक्षणों के बाद ही किया जा सकेगा।
