इंदौर। दूषित पानी से शहर में 10 लोगों की मौत की खबर के बाद मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव बुधवार को शाम करीब 6:30 बजे इंदौर पहुंचे। वह सबसे पहले परदेशीपुरा इलाके में वर्मा हॉस्पिटल गए, जहां उन्होंने मरीजों से बात की और उनका हालचाल पूछा। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर इस संकट पर दुख जताया और लिखा, “इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से नागरिकों के बीमार पड़ने की घटना को बहुत गंभीरता से लेते हुए जोन नंबर 4 के संबंधित जोनल ऑफिसर, असिस्टेंट इंजीनियर और PHE के इंचार्ज असिस्टेंट इंजीनियर को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।”
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सीएम ने कहा, “PHE के इंचार्ज सब-इंजीनियर को तुरंत प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है। घटना की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
CM ने हर पीड़ित परिवार के लिए 2 लाख के मुआवज़े की भी घोषणा की और कहा कि सरकार मरीज़ों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी, और अधिकारियों को स्थिति पर कड़ी नज़र रखने और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
मृतकों की सूची
रिपोर्ट्स के अनुसार, भागीरथपुरा में एक पाइपलाइन लीक होने से पीने का पानी सीवेज से दूषित हो गया, जिससे स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया। अब तक 1,100 से ज्यादा लोगों का इलाज हो चुका है। मृतकों की पहचान अव्यान साहू, 50 वर्षीय गोमती रावत, 31 वर्षीय उमा कोरी और संतोष बिगोलिया के रूप में हुई है। गोमती रावत और उमा कोरी भाऊ गली, भागीरथपुरा की रहने वाली थीं। इससे पहले मंगलवार को नंदलाल पाल (75), उर्मिला यादव (69), उमा कोरी (31), दिगंबर की पत्नी मंजुला (74), और सीमा प्रजापत (50) की मौत की खबर आई थी।
MP हाईकोर्ट ने रिपोर्ट स्टेटस मांगी
राज्य के हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से इंदौर के भागीरथपुरा में मृत मरीज़ों और मौजूदा स्थिति पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सरकार को 2 जनवरी तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है।
