नई दिल्ली। चांद पर माइनिंग अब केवल विज्ञान कथा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक उभरता हुआ अरबों डॉलर का व्यवसाय क्षेत्र बनता जा रहा है। चंद्रमा की सतह पर प्लैटिनम, हीलियम-3 और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के विशाल भंडार होने की संभावना है। दरअसल, कई निजी कंपनियां और अंतरिक्ष एजेंसियां चंद्रमा के संसाधनों का उपयोग करने के लिए ‘लूनर इकोनॉमी’ विकसित कर रही हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन कंपनियां की नजर
स्टारपाथ कंपनी चंद्रमा पर बर्फ की माइनिंग करने के लिए काम कर रही है। इन्होंने हाल ही में बर्फ निकालने के लिए 12 मिलियन डॉलर की धनराशि जुटाई है। इस बर्फ से भविष्य के मिशनों के लिए पानी और रॉकेट ईंधन (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) बनाया जा सकेगा।
फायरफ्लाई एयरोस्पेस चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर पहले मल्टी-रोवर मिशन के लिए नासा के साथ काम कर रही है। इनका ‘ब्लू घोस्ट’ लैंडर चंद्रमा की सतह पर पेलोड पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन कंपनी नासा के अर्टमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति और व्यावसायिक विकास के लिए तकनीक विकसित कर रही है।
एलन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी लूनर सिटी प्रोजेक्ट के माध्यम से चंद्रमा पर शहर बसाने और संसाधनों के उपयोग की तैयारी कर रही है।
लूनर एम्बेसी एक ऐसी निजी संस्था है, जिसने चंद्रमा पर जमीन बेचने के विचार को लोकप्रिय बनाया है। हालांकि, इसके कानूनी पहलुओं पर अंतरराष्ट्रीय विवाद हैं।
चांद पर मौजूद खनिज
हीलियम-3: यह पृथ्वी पर बहुत दुर्लभ है, लेकिन चंद्रमा पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो सकता है। यह स्वच्छ परमाणु संलयन ऊर्जा के लिए एक महत्वपूर्ण ईंधन है।
बर्फ: चंद्रमा के धु्रवों पर मौजूद बर्फ का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों के पीने के पानी और भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों के लिए रॉकेट ईंधन बनाने के लिए किया जा सकता है।
बहुमूल्य धातुएं: चंद्रमा की सतह पर खरबों डॉलर मूल्य का प्लैटिनम और अन्य दुर्लभ धातुएं मौजूद हो सकती हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी तकनीक के लिए आवश्यक हैं।
लूनर प्रॉस्पैक्टर: मूल रूप से 1998 में नासा द्वारा लॉन्च किया गया एक टोही मिशन था, जिसने चंद्रमा के धु्रवों पर हाइड्रोजन (बर्फ के रूप में) और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की उपस्थिति के स्पष्ट संकेत दिए थे।
चांद पर मौजूद प्रमुख खनिज तत्व
चंद्रमा की सतह मुख्य रूप से ऑक्सीजन, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, लोहा, कैल्शियम और एल्यूमीनियम जैसे तत्वों से बनी है। हाल के वर्षों में, भारत के चंद्रयान-3 और अन्य देशों के मिशनों ने चंद्रमा पर कई महत्वपूर्ण खनिजों और तत्वों की पुष्टि की है।
चंद्रमा पर अन्य मुख्य खनिज तत्व भी पाए जाते हैं।
- प्रमुख रासायनिक तत्व
चंद्रमा की मिट्टी (रेगोलिथ) में कई महत्वपूर्ण तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
ऑक्सीजन (Oxygen): चंद्रमा की सतह का लगभग 45% हिस्सा (भार के अनुसार) ऑक्सीजन से बना है, जो खनिजों में ऑक्साइड के रूप में मौजूद है।
सिलिकॉन (Silicon): यह धूल और चट्टानों में सिलिकेट के रूप में पाया जाता है।
लोहा (Iron): यह मुख्य रूप से लौह ऑक्साइड (Iron Oxide) के रूप में मौजूद है।
मैग्नीशियम और कैल्शियम: ये तत्व चंद्रमा की चट्टानों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एल्यूमीनियम: यह भविष्य के निर्माण कार्यों के लिए एक प्रमुख संसाधन माना जाता है।
- विशिष्ट खनिज और दुर्लभ संसाधन
हीलियम-3 (Helium-3): यह चंद्रमा का सबसे मूल्यवान संसाधन माना जाता है। नासा के अनुसार, वहां लगभग दस लाख टन हीलियम-3 मौजूद है, जिसका उपयोग भविष्य में स्वच्छ परमाणु ऊर्जा के लिए किया जा सकता है।
इल्मेनाइट (Ilmenite): यह टाइटेनियम और लोहे का एक प्रमुख स्रोत है।
आर्मल्कोलाइट (Armalcolite): अपोलो 11 के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा खोजा गया यह खनिज केवल चंद्रमा पर ही पाया जाता है।
चेंजसाइट-(Y) (Changesite-Y): चीन के चांग’ई-5 मिशन द्वारा खोजा गया यह एक नया फास्फेट खनिज है, जो क्रिस्टल के रूप में पाया गया है।
सल्फर (Sulphur): चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सल्फर की मौजूदगी की स्पष्ट पुष्टि की है।
- अन्य महत्वपूर्ण खोजें
पानी और हाइड्रॉक्सिल: चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ के रूप में पानी और सतह पर हाइड्रॉक्सिल अणुओं के साक्ष्य मिले हैं।
टाइटेनियम और सोडियम: इसरो (ISRO) ने चंद्रमा पर सोडियम की प्रचुरता और टाइटेनियम जैसे भारी तत्वों की उपस्थिति का भी पता लगाया है।
इन खनिजों की खोज भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्तियां बसाने और वहां से संसाधन निकालने (Lunar Mining) की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
