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2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए चेतावनी, ये सिरप जानलेवा: NFI

aaptak.co.in1@gmail.com April 17, 2026
Toxic Cough Syrup Deaths India Bans1

हेल्थ डेस्क। बच्चों की हेल्थ से जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बहुत जरूरी होती हैं, खासकर जब बात छोटे बच्चों और शिशुओं की हो। माता-पिता अक्सर बच्चों को खांसी होने पर कफ सिरप दे देते हैं, इस उम्मीद में कि इससे जल्दी आराम मिलेगा। हालांकि, छोटे बच्चों को कफ सिरप देना सेफ है। 2025 में, राजस्थान और मध्य प्रदेश में नकली कफ सिरप के मामले सामने आए, जिससे कई बच्चों की मौत हो गई।

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भारत में बच्चों की हेल्थ को लेकर एक बड़ा और जरूरी अपडेट जारी हुआ है। इंडियन फार्माकोपिया कमीशन की तरफ से जारी नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया (NFI) 2026 में साफ कहा गया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं देना चाहिए। यह सलाह सिर्फ एक चेतावनी नहीं है, बल्कि डॉक्टरों और माता-पिता के लिए एक ज़रूरी गाइडलाइन है, जिसे नज़रअंदाज़ करना छोटे बच्चों की हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

खांसी को समझना क्यों जरूरी?

लोग अक्सर खांसी को बीमारी समझ लेते हैं और उसे दबाने के लिए तुरंत कोई सिरप दे देते हैं। लेकिन, NFI 2026 के अनुसार, खांसी हमारे शरीर का नैचुरल डिफेंस मैकेनिज्म है, जो सांस की नली में जमा बलगम, धूल या बाहरी कणों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसका मतलब है कि हर खांसी को दबाना ज़रूरी नहीं है; कभी-कभी यह बस शरीर को साफ करने का एक प्रोसेस होता है।

छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप खतरनाक क्यों हैं?

दो साल से कम उम्र के बच्चों का शरीर बहुत नाजुक होता है। इसलिए, कफ सिरप में मौजूद दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे:

सांस लेने में दिक्कत
बहुत ज्यादा नींद आना या सुस्ती

हार्ट रेट पर असर
सबसे जरूरी बात यह है कि इन दवाओं के छोटे बच्चों के लिए बहुत कम फायदे और ज्यादा रिस्क पाए गए हैं, यही वजह है कि NFI 2026 इस उम्र के बच्चों के लिए डोज़ नहीं बताता है।

कौन सी दवाएं शामिल हैं?

फॉर्मूलरी में सिर्फ दो कफ सप्रेसेंट, कोडीन और डेक्सट्रोमेथॉर्फन का जिक्र है। कोडीन को सिर्फ बड़े बच्चों (12 साल से ज्यादा उम्र) और बड़ों के लिए सुरक्षित माना जाता है। डेक्सट्रोमेथॉर्फन 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी रिकमेंड नहीं किया जाता है। इसका मतलब है कि अगर बच्चा दो साल से कम उम्र का है, तो उसे कफ सिरप देने से पूरी तरह बचना चाहिए।

सूखी और कफ वाली खांसी में क्या अंतर है?

NFI 2026 के अनुसार, हर खांसी एक जैसी नहीं होती। सूखी और कफ वाली खांसी अलग-अलग होती हैं, जिनके लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं।

सूखी खांसी: इसके लिए दवा दी जा सकती है।

कफ वाली खांसी: इसे दबाना नहीं चाहिए, क्योंकि यह शरीर को साफ करने वाला एजेंट है।

माता-पिता को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

अगर आपका बच्चा छोटा है और उसे खांसी आ रही है, तो घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि ये आसान उपाय मदद कर सकते हैं।

अपने बच्चे को खूब सारे लिक्विड (पानी, दूध) दें।
कमरे में नमी बनाए रखें।
डॉक्टर से सलाह लिए बिना कोई दवा न दें।

अगर जरूरी हो तो बच्चों के डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि हर खांसी का इलाज दवा से नहीं किया जा सकता।

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कप सिरप से बच्चों की मौतें

कफ सिरप से बच्चों की मौत की घटनाएं समय-समय पर सामने आई हैं, जो मुख्य रूप से दवाओं में हानिकारक रसायनों (जैसे डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल) की मिलावट के कारण हुई हैं।

प्रमुख घटनाएं और मौतें (वर्षवार)

2025: भारत (मध्य प्रदेश और राजस्थान)

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप पीने से कम से कम 20 बच्चों की मौत दर्ज की गई। जांच में इस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा 48.6% पाई गई, जो एक घातक जहर है।

राजस्थान के भरतपुर और झुंझुनू में भी कथित तौर पर इसी सिरप के कारण बच्चों की मौत की खबरें आईं।

2023: उजबेकिस्तान
भारतीय निर्मित कफ सिरप के सेवन से 18 बच्चों की मौत हुई।

2022: गाम्बिया और इंडोनेशिया
गाम्बिया:
दूषित कफ सिरप के कारण 28 बच्चों की मौत हुई।

इंडोनेशिया: इसी तरह की विषाक्तता के कारण बड़े पैमाने पर मौतें हुईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2022 में दूषित दवाओं से कुल मौत का आंकड़ा 268 तक पहुंच गया था।

1998: भारत (हरियाणा)
गुड़गांव के एक अस्पताल में दूषित सिरप के कारण 33 बच्चों की मौत हुई थी।
1986: भारत (मुंबई)
जेजे अस्पताल में ग्लिसरीन की जगह डायथिलीन ग्लाइकॉल के इस्तेमाल से 14 बच्चों की मौत दर्ज की गई थी।

मौत का मुख्य कारण
इन सभी मामलों में मौत का मुख्य कारण कफ सिरप में विलायक के रूप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल का उपयोग था। यह रसायन गुर्दे (kidney) को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है और अंगों के फेल होने का कारण बनता है।
वर्ष स्थान अनुमानित मौतें सिरप/कारण
2025 भारत (मध्य प्रदेश, राजस्थान) 20+ Coldrif (DEG मिलावट)
2023 उजबेकिस्तान 18 दूषित कफ सिरप
2022 गाम्बिया 28 दूषित कफ सिरप
1998 भारत (हरियाणा) 33 DEG विषाक्तता
1986 भारत (मुंबई) 14 DEG विषाक्तता

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी कफ सिरप नहीं देना चाहिए।

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