भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का एक विशेष सत्र 27 अप्रैल को आहूत किया गया है। विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर दी है। इस विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण बिल यानी ‘नारी शक्ति वंदन’ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने BJP के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विशेष सत्र को बुलाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को BJP ने भोपाल में ‘नारी शक्ति वंदन’ के समर्थन में एक विरोध रैली भी आयोजित की थी। इस रैली के माध्यम से पार्टी ने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में अपना पक्ष रखा। रैली के दौरान प्रदेशभर से भाजपा कार्यकर्ताओं ने महिला आरक्षण को लेकर अपनी बात रखते हुए विपक्ष के प्रति आक्रोश जाहिर किया था।
महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस की पीसी
इधर, महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को देश के विभिन्न शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) की है। कांग्रेस का मुख्य विरोध बिल को लागू करने में हो रही देरी और इसमें शामिल “शर्तों” को लेकर है।
तत्काल लागू करने की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के वर्तमान 543 सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जाए।
सीटों का आंकड़ा: पार्टी चाहती है कि लोकसभा की 181 सीटें (एक तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं।
शर्तें हटाने की मांग: कांग्रेस का कहना है कि आरक्षण को जनगणना और परिसीमन (Delimitation) जैसी शर्तों से अलग रखा जाना चाहिए।
ओबीसी कोटा: राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से कोटा और जाति जनगणना की मांग दोहराई है।
राष्ट्रव्यापी अभियान: प्रियंका गांधी और जयराम रमेश के नेतृत्व में पार्टी इन मुद्दों को लेकर देशभर में रैलियां और प्रचार करेगी।
राजनीतिक घमासान और विरोध
बीजेपी का पलटवार: भाजपा ने कांग्रेस को “महिला विरोधी” बताते हुए कई शहरों (जैसे दिल्ली, लखनऊ, भोपाल) में जन आक्रोश रैलियां निकाली हैं।
संसद में मतदान: हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा एक संशोधन प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण गिर गया, जिसमें 298 पक्ष में और 230 विरोध में वोट पड़े थे।
सत्ता हथियाने का आरोप: कांग्रेस का आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए “गेरीमेंडरिंग” (Gerrymandering) कर सत्ता पर कब्जा करना चाहती है।
छोटे राज्यों के साथ अन्याय: पार्टी का दावा है कि वर्तमान प्रस्ताव से दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है।
