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“जिन्होंने आंख मारी, वे स्पीकर पर सवाल उठा रहे : शाह

aaptak.co.in1@gmail.com March 12, 2026
amit shah speaker motion

—स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज

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नई दिल्ली। बुधवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव वॉइस वोट से खारिज हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की तरफ से 56 मिनट तक प्रस्ताव का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला किया।

शाह ने कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को BJP से दोगुना बोलने का समय मिला। फिर भी, विपक्षी नेता कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। जब मौका मिलता है, तो वे जर्मनी या इंग्लैंड में होते हैं।

शाह ने कहा, “पहली बात, वे बोलना नहीं चाहते। जब वे बोलना चाहते हैं, तो नियमों का पालन नहीं करते। यह सदन नियमों के अनुसार चलेगा। स्पीकर के पास नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को रोकने और टोकने का अधिकार है। यह सदन निष्पक्ष नहीं है, जो लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके माइक्रोफोन बंद कर दिए जाएंगे।”

गृह मंत्री ने कहा, “राहुल सदन में आते हैं और PM मोदी को गले लगाते हैं, आंख मारते हैं और उन्हें फ्लाइंग किस देते हैं।” मुझे बोलने में भी शर्म आती है। वे स्पीकर के व्यवहार पर सवाल उठाते हैं। अपने व्यवहार पर भी सवाल उठाएं। शाह के जवाब के दौरान विपक्ष ने भारी हंगामा किया और “अमित शाह माफी मांगें” की मांग करते हुए नारे लगाए।

शाह ने बताया कि कितना समय मिला

शाह ने कहा, कितना समय बोल सकते हैं, इसके नियम हैं। 17वीं लोकसभा में कांग्रेस को 157 घंटे 55 मिनट दिए गए, जबकि उनके 52 सदस्य थे। कांग्रेस को BJP से छह गुना ज्यादा समय दिया गया, जबकि BJP के छह गुना ज्यादा सदस्य थे।

18वीं लोकसभा में कांग्रेस को भी BJP से दोगुना समय मिला। विपक्ष के नेता कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। लेकिन जब मौका मिलता है, तो वे जर्मनी या इंग्लैंड में होते हैं। तब वे शिकायत करते हैं।

18वीं लोकसभा में कांग्रेस के सदस्यों ने 157 घंटे 55 मिनट तक बात की। मैं विपक्ष के नेता से पूछना चाहता हूं कि वे तब क्यों नहीं बोले। उन्हें किसने रोका? यह आपका हक है कि आप तय करें कि आपकी पार्टी से किसे बोलना चाहिए।

विपक्ष के नेता स्पीकर के खिलाफ मोशन पर भी नहीं बोलते। फिर मोशन क्यों लाए? पहली बात तो यह कि वे बोलना ही नहीं चाहते। अगर बोलना भी चाहते हैं, तो नियमों के हिसाब से नहीं बोलते।

राहुल वक्फ अमेंडमेंट और आर्टिकल 370 जैसी चर्चाओं से गायब रहे। SIR पर चर्चा हुई। विपक्ष के नेता को बोलने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने नहीं बोला। उन्होंने सदन में रुकावट डाली। उन्हें अचानक यह ख्याल आया कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा होनी चाहिए। आपके परदादा से लेकर आपकी दादी और आपके पिता तक, बड़े नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हुई।

16वीं लोकसभा में राहुल गांधी ने 2014, 2015, 2017 और 2018 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने 16वीं लोकसभा में केंद्रीय बजट पर किसी भी चर्चा में भी हिस्सा नहीं लिया।
उन्होंने किसी भी सरकारी बिल पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने 16वें, 17वें, 19वें, 20वें और 21वें सेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने 19वें, 20वें, 22वें और 23वें सेशन में केंद्रीय बजट पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया और न ही एक बिल को छोड़कर किसी भी कानूनी बहस में हिस्सा लिया। उन्होंने 18वीं लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।

ट्रेड डील से किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा

शाह ने कहा कि AI समिट दिल्ली में हुआ था। 80 देशों की बड़ी कंपनियाँ शामिल हुईं। 20 से ज़्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए और कांग्रेस के सदस्यों ने वहाँ कपड़े उतारकर विरोध किया। उनका दावा है कि यह उनका अधिकार है, जबकि विरोध के लिए दिल्ली में जंतर-मंतर बनाया गया है। कांग्रेस ने BJP का विरोध करते-करते भारत का विरोध करना शुरू कर दिया है।

शाह ने कहा कि कांग्रेस आरोप लगा रही है कि US के साथ ट्रेड डील में भारतीय किसानों को नुकसान हुआ है। मैं कहना चाहता हूँ कि एक भी डील से भारतीय किसानों को नुकसान नहीं हुआ है। 2013 में कांग्रेस ने ही किसानों को नुकसान पहुँचाया था।

शाह ने कहा कि कांग्रेस चीन के साथ सीमा विवाद पर चर्चा करना चाहती थी। वे एक ऐसी किताब का हवाला देकर इस पर चर्चा करना चाहते थे जो पब्लिश ही नहीं हुई थी। इसलिए, उन्हें इस पर चर्चा नहीं करने दी गई। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि किसके कार्यकाल में अक्साई चिन के 38,000 वर्ग किलोमीटर पर कब्ज़ा किया गया था। यह कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल में कब्ज़ा किया गया था। तब PM नेहरू ने विपक्ष को जवाब दिया था कि वहाँ घास का एक तिनका भी नहीं उगता। यह उनकी मानसिकता है।

बिरला ने प्रस्ताव का समाधान होने तक सदन में नहीं आने का फैसला किया

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के बाद से लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं की थी। लगभग 119 विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि स्पीकर सदन चलाते समय पक्षपात कर रहे थे और विपक्ष को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा था। जब प्रस्ताव पेंडिंग था, ओम बिरला ने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे।

अब CEC को हटाने मोशन, विपक्ष के हाथ एक और मुदृदा

अब तक स्पीकर के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव

लोकसभा के इतिहास में अब तक कुल 4 बार स्पीकर (लोकसभा अध्यक्ष) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (या उन्हें पद से हटाने का संकल्प) लाया गया है। सबसे हालिया घटना 11 मार्च 2026 की है, जब वर्तमान स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में ध्वनिमत से खारिज हो गया।

स्पीकर के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्तावों का विवरण:

ओम बिरला (2026): विपक्षी दलों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए यह प्रस्ताव पेश किया था। गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान इसे ‘अफसोसजनक’ बताया और कहा कि यह लगभग 40 वर्षों के बाद किसी स्पीकर के खिलाफ लाया गया ऐसा प्रस्ताव है।

जी.वी. मावलंकर (1954): भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार दिसंबर 1954 में तत्कालीन स्पीकर गणेश वासुदेव मावलंकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसे 21 विपक्षी सांसदों ने पेश किया था, लेकिन यह सदन में गिर गया था।

हुकुम सिंह (1966): इनके खिलाफ भी विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था, जो असफल रहा।

बलराम जाखड़ (1987): अस्सी के दशक में बलराम जाखड़ के खिलाफ भी विपक्ष ने मोर्चा खोला था, लेकिन प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

मुख्य बिंदु:

संवैधानिक प्रक्रिया: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिसके लिए 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।

सफलता: भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक कोई भी स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के जरिए अपने पद से नहीं हटाया गया है। सभी प्रस्ताव या तो खारिज कर दिए गए या गिर गए।

हालिया घटनाक्रम (मार्च 2026): ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर करीब 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 42 सांसदों ने भाग लिया। अंततः हंगामे के बीच इसे Jagdambika Pal (जो उस समय सदन की अध्यक्षता कर रहे थे) ने खारिज घोषित किया।

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