वॉशिंगटन/तेहरान। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की प्रमुख शक्तियों से होर्मुज स्ट्रेट में अपने नौसैनिक जहाज तैनात करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखेगा। ट्रंप ने लिखा कि ईरान की ओर से इस जलमार्ग को बाधित करने की कोशिशों से प्रभावित कई देश अमेरिका के साथ मिलकर यहां युद्धपोत भेजेंगे, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इस वजह से जहाजों की आवाजाही कम हो गई है और कई तेल टैंकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से दूरी बना रहे हैं, इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की ओर से इस मार्ग को बंद करने की कोशिशों से प्रभावित कई देश अमेरिका के साथ यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन, फ्रांस जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम समेत अन्य देश भी इस क्षेत्र में अपने जहाज भेजेंगे, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज किसी भी देश के लिए खतरा न बने।
ईरान के तटीय इलाकों पर हमले की चेतावनी
ट्रंप ने सहयोगी देशों से नौसैनिक तैनाती की अपील के साथ यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा नष्ट कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद ईरान ड्रोन, समुद्री बारूदी सुरंग या कम दूरी की मिसाइलों के जरिए इस जलमार्ग को बाधित करने की कोशिश कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तटवर्ती इलाकों पर भारी बमबारी कर सकता है और ईरानी नौकाओं व जहाजों को निशाना बना सकता है।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले से बढ़ा तनाव
खाड़ी क्षेत्र में स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही है। शुक्रवार को अमेरिकी हमलों में खर्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह संकेत भी दिया गया कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की कोशिश जारी रखता है तो इस द्वीप के महत्वपूर्ण तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ दुश्मनों के लिए बंद, अन्य लोगों के लिए नहीं: विदेश मंत्री अराघची
पश्चिम एशिया में जारी जंग अब अपने तीसरे हफ्ते में पहुंच गई है और हालात पल-पल बिगड़ रहे हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक बड़ा बयान सामने आया है। अराघची ने साफ कर दिया है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि यह सिर्फ दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों और टैंकरों के लिए बंद किया गया है। बाकी देशों के लिए यातायात सामान्य बना हुआ है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, विदेश मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि युद्ध के दौरान आम आबादी वाले इलाकों को बचाने के लिए पूरी सावधानी बरती जाएगी, ताकि नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान के तेल डिपो या पावर प्लांट जैसे ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया, तो इसका पहले से कहीं ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा।
यूएई के बंदरगाहों को खाली करने की चेतावनी
जंग के बीच ईरान ने पहली बार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की संपत्तियों को खुलेआम धमकी दी है। ईरान ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों से कहा है कि वे दुबई के जेबेल अली बंदरगाह, अबू धाबी के खलीफा बंदरगाह और फुजैरा बंदरगाह जैसे इलाकों को तुरंत खाली कर दें। ईरान का आरोप है कि अमेरिका इन बंदरगाहों और गुप्त ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खारग द्वीप पर हमला करने के लिए कर रहा है, इसीलिए ईरान ने अब इन जगहों को अपने निशाने पर ले लिया है।
बगदाद से दुबई तक बढ़ा तनाव
जमीन पर भी हमले तेज हो गए हैं। शनिवार को बगदाद में अमेरिकी दूतावास के अंदर एक हेलीपैड पर मिसाइल गिरी, जिससे हड़कंप मच गया। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया गया, जिसका मलबा एक तेल सुविधा पर जाकर गिरा। इन घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर तेल की सप्लाई रुकती है, तो इसका असर हर देश की जेब पर पड़ेगा।
ईरान ने यूएई के उन शहरों को भी दहलाने की धमकी दी है जहां दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे मौजूद हैं। ईरान का कहना है कि जहां-जहां अमेरिकी सेनाएं पनाह ले रही हैं, उन क्षेत्रों को लोग तुरंत खाली कर दें। पश्चिम एशिया के इन बंदरगाहों से ही दुनिया का ज्यादातर व्यापार और तेल की सप्लाई होती है, ऐसे में इन जगहों पर हमले की धमकी ने वैश्विक बाजार में दहशत पैदा कर दी है।
अमेरिका—ईरान वार: अब तक
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फरवरी 2026 के अंत से एक भीषण सैन्य संघर्ष (युद्ध) में बदल चुका है।
ताजा सैन्य घटनाक्रम (मार्च 2026)
ऑपरेशन एपिक फ्युरी (Operation Epic Fury): अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए।
ईरानी नेतृत्व पर हमला: युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की उनके परिसर पर हमले में मृत्यु हो गई। अब उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नामित किया गया है।
खारग द्वीप पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खारग द्वीप (Kharg Island) के सैन्य ठिकानों पर बमबारी का आदेश दिया।
क्षेत्रीय विस्तार: ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी सैन्य अड्डों और तेल बुनियादी ढांचे पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं।
राजनैतिक और आर्थिक स्थिति
सीजफायर से इनकार: राष्ट्रपति ट्रम्प ने वर्तमान में किसी भी संघर्ष विराम (ceasefire) वार्ता को खारिज कर दिया है, जबकि ईरान ने हमले रुकने तक बातचीत से मना किया है।
तेल और जलमार्ग: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। हालांकि, ईरान ने भारत के साथ संबंधों के कारण कुछ भारतीय तेल जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दी है।
राजनयिक चेतावनी: अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत इराक और लेबनान छोड़ने की सलाह दी है क्योंकि ईरान समर्थित मिलिशिया वहां अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।
युद्ध का अब तक का प्रभाव
क्षेत्र विवरण
नुकसान : अमेरिका ने युद्ध के पहले 10 दिनों में लगभग 140 सैनिकों के घायल होने और 8 सैनिकों की मौत की पुष्टि की है।
खर्च : युद्ध के पहले सप्ताह में ही अमेरिका का सैन्य खर्च $11.3 बिलियन से अधिक हो गया है।
ईरान की क्षमता: अमेरिकी रक्षा विभाग का दावा है कि ईरान की मिसाइल लॉन्च क्षमता को 90% तक कम कर दिया गया है।
