नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर रोग में मस्तिष्क की कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) के मरने के पीछे के एक मुख्य कारण का पता लगाया है, जिसे अक्सर “डेथ स्विच” (Death Switch) कहा जा रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक विशेष हानिकारक प्रोटीन इंटरैक्शन मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट करने का संकेत देता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्य खोज और इसके कार्य करने का तरीका
NMDA रिसेप्टर और TRPM4 चैनल: हीडलबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पहचान की है कि अल्जाइमर में NMDA रिसेप्टर और TRPM4 आयन चैनल के बीच एक जहरीला तालमेल बनता है।
कोशिका मृत्यु का ट्रिगर: जब ये दोनों प्रोटीन आपस में जुड़ते हैं, तो वे न्यूरॉन्स के लिए एक “डेथ ट्रिगर” के रूप में काम करते हैं, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं मरना शुरू हो जाती हैं और याददाश्त कम होने लगती है।
नया यौगिक (Compound): शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नया यौगिक विकसित किया है जो इस “डेथ स्विच” को बंद कर सकता है। चूहों पर किए गए परीक्षणों में, इस यौगिक ने प्रोटीन की इस घातक जोड़ी को अलग कर दिया, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा हुई और बीमारी की गति धीमी हो गई।
अन्य संबंधित महत्वपूर्ण शोध
अल्जाइमर में कोशिका मृत्यु के अन्य “स्विच” या तंत्रों पर भी शोध हुए हैं।
MEG3 मॉलिक्यूल: यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के वैज्ञानिकों ने पाया कि MEG3 नामक अणु का स्तर बढ़ने से न्यूरॉन्स में नेक्रोप्टोसिस (Necroptosis – प्रोग्राम्ड सेल डेथ) सक्रिय हो जाता है।
CD95 रिसेप्टर: इसे “डेथ रिसेप्टर” भी कहा जाता है। हालिया शोधों से पता चला है कि कैंसर कोशिकाओं में इस रिसेप्टर को सक्रिय करने वाला “स्विच” खोजने से न केवल कैंसर बल्कि न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के उपचार में भी मदद मिल सकती है।
RNA इंटरफेरेंस: नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के शोध में पाया गया कि उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क में “सुरक्षात्मक” RNA कम हो जाते हैं और “जहरीले” RNA बढ़ जाते हैं, जो कोशिका मृत्यु को बढ़ावा देते हैं।
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश दवाएं केवल लक्षणों या अमाइलॉइड प्लाक (Amyloid Plaque) को लक्षित करती हैं, जबकि यह नया तरीका सीधे कोशिकाओं को मरने से रोकने की क्षमता रखता है।
