नई दिल्ली। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन को लेकर सरकार और प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पाइपलाइन नेटवर्क पहले से बिछा हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू LPG सिलेंडर के आयात पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। प्रशासन ने नए निर्देश देते हुए कनेक्शन के लिए दबाव बढ़ा दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!घरेलू उपभोक्ताओं के लिए नियम
दोहरा कनेक्शन रखने पर रोक
जिन घरों में पहले से PNG कनेक्शन है, वे अब साथ में घरेलू LPG सिलेंडर नहीं रख सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य है।
अनिवार्य माइग्रेशन का अल्टीमेटम
जिन इलाकों में PNG पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां निवासियों को कनेक्शन के लिए आवेदन करने के लिए 90 दिनों (3 महीने) का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि के भीतर कनेक्शन नहीं लिया जाता है, तो उनकी LPG सप्लाई स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी।
सप्लाई में कटौती
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियां योग्य निवासियों को पंजीकृत डाक के माध्यम से सूचित करेंगी। सूचना मिलने के बाद भी कार्रवाई न करने पर सिलेंडर की रिफिलिंग रोक दी जाएगी।
व्यवसायिक (Commercial) और औद्योगिक नियम
दिल्ली में सख्त निर्देश
दिल्ली सरकार ने वाणिज्यिक LPG सिलेंडर की आपूर्ति के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। अब व्यवसायियों और उद्योगों को LPG तभी मिलेगा जब उन्होंने PNG कनेक्शन के लिए आवेदन कर दिया हो।
अनिवार्य पंजीकरण
जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां की इकाइयों को तेल विपणन कंपनी (OMC) के पास अपना PNG आवेदन जमा करना होगा। यदि वहां नेटवर्क नहीं है, तो उन्हें भविष्य में स्विच करने का लिखित घोषणा पत्र देना होगा।
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती, तय की समय सीमा
5 दिन में कनेक्शन
मध्य प्रदेश सरकार ने निर्देश दिया है कि आवेदन के बाद उपभोक्ताओं को 5 दिन के भीतर PNG कनेक्शन मिल जाना चाहिए।
त्वरित अनुमति
पाइपलाइन बिछाने के लिए प्रशासन को 24 घंटे के भीतर ‘राइट ऑफ वे’ (RoW) की अनुमति देनी होगी। यदि विभाग समय सीमा में अनुमति नहीं देता, तो उसे “डीम्ड अप्रूवल” (स्वतः स्वीकृत) मान लिया जाएगा।
अधिकारियों को लक्ष्य
नागरिक आपूर्ति विभाग ने गैस कंपनियों और जिला अधिकारियों को अगले तीन महीनों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने का निर्देश दिया है।
पीएनजी और एलपीजी कौन से गैस पड़ेगी सस्ती
आम तौर पर पीएनजी (PNG – Piped Natural Gas), एलपीजी (LPG) के मुकाबले 12% से 15% तक सस्ती पड़ती है। हालांकि, इसके लिए आपको शुरुआत में सिक्योरिटी डिपॉजिट देना पड़ता है, लेकिन लंबे समय के इस्तेमाल में यह अधिक किफायती साबित होती है।
दोनों गैसों की लागत और फायदों का विस्तृत तुलनात्मक विवरण।
- कीमत और बचत
पीएनजी (PNG): इसकी कीमत प्रति SCM (स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) के हिसाब से तय होती है। भारत के प्रमुख शहरों में यह लगभग 50 से 55 रुपए प्रति SCM के बीच है। खपत के हिसाब से देखें तो यह एलपीजी की तुलना में प्रति माह लगभग 100 से 200 रुपए तक की बचत करा सकती है।
एलपीजी (LPG): घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत वर्तमान में लगभग 900 से 1100 रुपए के बीच है। एलपीजी में आपको पूरे सिलेंडर की कीमत एडवांस में चुकानी पड़ती है।
- भुगतान का तरीका
पीएनजी (PNG): यह बिजली के बिल की तरह पोस्ट-पेड होती है। आप जितनी गैस इस्तेमाल करेंगे, महीने के अंत में केवल उतने का ही बिल आएगा।
एलपीजी (LPG): यह प्री-पेड है। आपको सिलेंडर बुक करते समय ही पूरी राशि देनी होती है, चाहे आपकी खपत कितनी भी हो।
- सुविधा और सुरक्षा
सुविधा: पीएनजी सीधे पाइपलाइन के जरिए आपके स्टोव तक पहुंचती है, इसलिए इसमें सिलेंडर खत्म होने या नया सिलेंडर बुक करने का झंझट नहीं होता।
सुरक्षा: पीएनजी हवा से हल्की होती है, इसलिए रिसाव होने पर यह जल्दी फैल जाती है और आग लगने का खतरा कम होता है। एलपीजी हवा से भारी होती है और रिसाव होने पर फर्श पर जम जाती है, जो अधिक खतरनाक हो सकता है।
- शुरुआती खर्च
पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए आपको शुरुआत में 5,000 से 7,000 रुपए तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट देना पड़ सकता है। वहीं, एलपीजी कनेक्शन की शुरुआती लागत इसकी तुलना में कम हो सकती है, लेकिन रिफिलिंग का खर्च लगातार बना रहता है।
