हेल्थ डेस्क। ताजा शोध बताते हैं कि विटामिन D डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हाल के अध्ययनों के अनुसार, विटामिन D और डिमेंशिया के बीच संबंध को लेकर अहम दावे किए गए हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जोखिम में कमी: एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि विटामिन D सप्लीमेंट लेने वाले लोगों में, न लेने वालों की तुलना में डिमेंशिया होने की संभावना 40% कम थी। विशेष रूप से, संज्ञानात्मक गिरावट शुरू होने से पहले सप्लीमेंट लेना अधिक फायदेमंद माना गया है।
कमी का प्रभाव: शरीर में विटामिन D के निम्न स्तर (25 nmol/L से कम) वाले बुजुर्गों में सामान्य स्तर वाले लोगों की तुलना में डिमेंशिया होने का खतरा 54% से 122% तक अधिक हो सकता है।
मस्तिष्क का कचरा साफ करना: वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन D मस्तिष्क में एमाइलॉइड प्लाक (amyloid plaques) जैसे विषाक्त प्रोटीन को साफ करने में मदद करता है, जो अल्जाइमर और डिमेंशिया के मुख्य कारण माने जाते हैं।
मस्तिष्क स्वास्थ्य: यह विटामिन याददाश्त के केंद्र (हिप्पोकैम्पस) को ठीक से काम करने में मदद करता है और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखता है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
परिणामों में भिन्नता: हालांकि कई अध्ययन सकारात्मक संबंध दिखाते हैं, कुछ अन्य शोधों में विटामिन D और डिमेंशिया के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया है।
अधिक सेवन के जोखिम: विटामिन D का बहुत अधिक सेवन (प्रतिदिन 4,000 IU से अधिक) शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह: सप्लीमेंट शुरू करने से पहले रक्त परीक्षण करवाना और डॉक्टर से सही खुराक की जानकारी लेना आवश्यक है।
डिमेंशिया के मरीज
डिमेंशिया (Dementia) या मनोभ्रंश कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह उन लक्षणों के समूह को कहते हैं जो याददाश्त, सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। यह आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखा जाता है।
डिमेंशिया के मुख्य लक्षण
याददाश्त की कमी: हाल ही की घटनाओं, बातचीत या लोगों के नाम भूल जाना।
दैनिक कार्यों में कठिनाई: खाना बनाना, पैसे का हिसाब रखना या घर का रास्ता भूल जाना जैसे सामान्य काम करने में परेशानी होना।
व्यवहार में बदलाव: जल्दी गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन, और व्यक्तित्व में अचानक बदलाव आना।
भ्रम की स्थिति: समय, स्थान या लोगों को पहचानने में भ्रम होना।
सामान्य प्रकार
अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease): यह डिमेंशिया का सबसे आम रूप है, जो लगभग 60-80% मामलों के लिए जिम्मेदार है।
वैस्कुलर डिमेंशिया (Vascular Dementia): मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह में बाधा आने के कारण होता है।
लेवी बॉडी डिमेंशिया (Lewy Body Dementia): इसमें मतिभ्रम (ऐसी चीजें देखना जो नहीं हैं) और एकाग्रता की समस्या होती है।
फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (Frontotemporal Dementia): यह मुख्य रूप से व्यक्तित्व और भाषा को प्रभावित करता है।
मरीजों की देखभाल के तरीके
Hopkins Medicine के अनुसार घर पर मरीजों की देखभाल के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं।
सुरक्षा का ध्यान: बाथरूम में ग्रैब बार लगाएं और फिसलने वाले कालीनों को हटा दें।
नियमित दिनचर्या: मरीज के लिए एक स्थिर और सरल दिनचर्या बनाएं ताकि वे भ्रमित न हों।
धैर्य और संचार: उनसे शांति से बात करें और सरल वाक्यों का उपयोग करें।
निदान और उपचार: डिमेंशिया का पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है, लेकिन दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने और रोग की गति को धीमा करने में मदद कर सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति में स्मृति हानि के लक्षण दिखें, तो विशेषज्ञ जैसे कि Neurologist से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।
