नई दिल्ली। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने अपनी ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है। अनुसूचित जनजातियों (STs) के खिलाफ अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, MP में हर दिन 8 से ज्यादा रेप के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। यही नहीं रोजाना 32 अपहरण हो रहे हैं। दहेज से जुड़ी मौतों और बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों में भी देश का दिल कहा जाने वाला मप्र शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। अपहरण के मामलों में मप्र चौथे स्थान पर रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, NCRB ने यह रिपोर्ट 6 मई को जारी की। इसमें 2024 के दौरान पूरे देश में हुए अपराधों के आंकड़े दिए गए हैं। यह रिपोर्ट मूल रूप से सितंबर 2025 में जारी होने वाली थी, लेकिन इसके बजाय इसे मई 2026 में जारी किया गया। रिपोर्ट जारी होने में हुई देरी का कारण आपराधिक आंकड़ों का सत्यापन और डेटा मिलान बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में राज्य में दहेज से जुड़ी मौतों के 450 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 232 मामले IPC (भारतीय दंड संहिता) की धाराओं के तहत और 218 मामले BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धाराओं के तहत दर्ज किए गए। दहेज से जुड़ी मौतों के मामलों में MP देश में तीसरे स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश 2,038 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसके बाद बिहार दूसरे स्थान पर रहा।
यही नहीं लगातार चौथे वर्ष, महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश पांचवें स्थान पर रहा। राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल 32,832 मामले दर्ज किए गए। जहां 2022 में 32,765 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2023 में यह आंकड़ा घटकर 32,342 हो गया। 2024 में, राज्य में महिलाओं के खिलाफ औसतन 90 से ज़्यादा अपराध प्रतिदिन दर्ज किए गए।
अपहरण और हत्या के मामलों में चौथा स्थान
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, मप्र हत्या और अपहरण दोनों ही मामलों में देश में चौथे स्थान पर रहा। राज्य में हत्या के मामलों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। 2022 में हत्या के 1,978 मामले सामने आए थे, जो 2023 में घटकर 1,832 रह गए। 2024 में 1,813 मामले दर्ज किए गए। यह दर्शाता है कि दो साल की अवधि में हत्या के मामलों में 173 की कमी दर्ज की गई है।
राज्य में अपहरण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई, जहां 2022 में 10,409 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 11,768 हो गई। 2024 में यह आंकड़ा 11,847 तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश देश में चौथे स्थान पर रहा।
STs के खिलाफ अत्याचारों में MP पहले स्थान पर
अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी के खिलाफ किए गए अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। राज्य में ST समुदाय के खिलाफ अपराधों के कुल 3,165 मामले दर्ज किए गए। अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के खिलाफ अपराधों के 7,765 मामलों के साथ, MP देश में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, रिपोर्ट एक राहत भरी तस्वीर भी पेश करती है, जहां पिछले साल बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर था, वहीं इस बार राज्य तीसरे स्थान पर खिसक गया है। NCRB के अनुसार, 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराधों के 21,908 मामले दर्ज किए गए।
POCSO के तहत दर्ज मामले में टॉप—5 राज्य
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में मध्य प्रदेश में POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत 3,721 मामले दर्ज किए गए।
टॉप—5 राज्य
तमिलनाडु 5,320
महाराष्ट्र 4,829
उत्तर प्रदेश 3,671
मध्य प्रदेश 3721
