अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। सीएम योगी ने कहा- विपक्ष के लोग राम का नारा लगाने पर गोली चलवाते थे। इनके दोगुले चरित्र को तो देखिए। राम मंदिर बन न पाए, इसके लिए कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!योगी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा-सपा के दोहरे चरित्र को देखो, कहती है कि राम भक्तों का अपमान हुआ है। कारसेवकों और रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग उपदेश देने चले हैं। हमने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। मैं सभी से कहूंगा कि कोई भी अनर्गल टिप्पणी न करें, जो रामभक्तों को आहत करे।
योगी ने कहा- अगर किसी के पास कोई प्रूफ है तो उसे एसआईटी को दे दे। रामभक्तों से अपील है कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा का पाठ पढ़ाया है। 500 वर्षों तक राम मंदिर के लिए संघर्ष किया। 15 दिन और देख लो, इंतजार कर लो। चिंता मत करो। अयोध्या को बदमान करने वालों के बहकावे में न आएं। धाम को बदनाम न करें। अगर कोई अपराधी है, वह कोई भी होगा, बचेगा नहीं, यह सुनिश्चित है।
सपा प्रमुख और पूर्व मंत्री ने चोरी का मुद्दा उठाया था
सपा सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने रविवार 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से 5 से साढ़े 7 करोड़ रुपए तक की चोरी की गई। अखिलेश ने भी कहा था कि मामले पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। कोर्ट को मामला देखना चाहिए। चंपत राय ने सफाई दी थी कि अभी तक ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई है।
विवाद बढ़ा तो भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री को लेटर लिखकर सीबीआई जांच की मांग की। अगले दिन यानी 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंदिर ट्रस्ट से मामले की रिपोर्ट मांग ली।
चढ़ावा चोरी मामले में अब तक 5 लोगों- लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू के नाम सामने आए हैं। इन लोगों की निशानदेही पर अब तक 2 करोड़ रुपए की रिकवरी हुई है। ये सभी दान राशि की गिनती की ड्यूटी से जुड़े हैं। मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से 13 जून को सोना मिला। हालांकि, सोना कितना है, यह अभी कन्फर्म नहीं है।
एसआईटी ने अब तक किससे पूछताछ की
पहला दिन-एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जानकारी ली। चोरी के मामले में जिन कर्मचारियों पर शक है, उन्हें ट्रस्ट के एक कमरे में बैठाया गया था। ऐसे करीब 8 से 10 कर्मचारी थे। इन लोगों से करीब 6 घंटे पूछताछ की गई।
दूसरा दिन- टीम ने चंपत राय और गोपाल राव से चार-चार घंटे तक सवाल-जवाब किए।
तीसरा दिन- जांच टीम ने बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की। इस दौरान बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई।
चौथे दिन- टीम करीब 10 घंटे तक मंदिर परिसर में रही। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से करीब 4 घंटे तक पूछताछ की। अनिल मिश्र से राम मंदिर दान की रकम की गिनती और रख-रखाव समेत इसे बैंक में जमा करने की प्रकिया जानी। इसमें उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से समझा। अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र आदि की नियुक्ति की प्रकिया और उसमें अनिल मिश्र की भूमिका को भी समझा। टीम ने टिन्नू यादव से भी डेढ़ घंटे तक पूछताछ की। अनिल के बताए गए जवाब पर टिन्नू यादव की राय लेकर क्रॉस चेक किया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी अलग—अलग दावे
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित अनियमितता और चोरी के मामले में अलग-अलग दावे और आरोप सामने आए हैं। एक ओर जहां मंदिर ट्रस्ट ने शुरू में बड़ी गड़बड़ियों से इनकार किया था, वहीं कई संतों और राजनीतिक दलों ने करोड़ों रुपये के गबन का दावा किया है।
ट्रस्ट का रुख (आरंभिक): मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शुरुआत में दान के पैसों में किसी भी बड़ी गड़बड़ी या अनियमितता से इनकार किया था।
कर्मचारियों की संलिप्तता और बरामदगी: जांच के दौरान दान-पात्रों की गिनती करने वाले एक कर्मचारी के आवास से करीब ₹10 लाख की नकदी बरामद हुई। आरोप है कि उसने अलमारी और गोबर के ढेर में पैसे छिपाए थे।
विपक्ष और संतों के दावे: समाजवादी पार्टी और अन्य राजनीतिक हस्तियों द्वारा ₹200 करोड़ से ज्यादा के गबन की बात कही जा रही है। वहीं, कई संतों ने भी मंदिर प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अन्य आरोप: मंदिर के पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने बैंक टीम द्वारा गिनती में हेरफेर करने का दावा किया है।
