भोपाल। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस समेत चार राजनीतिक दलों ने यूसीसी से दूरी बनाते हुए इसे व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सहमति के बिना लागू करने का विरोध किया है। इन दलों का कहना है कि देश की विविधता और विभिन्न समुदायों की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए किसी भी बड़े कानूनी बदलाव पर सभी पक्षों से व्यापक चर्चा आवश्यक है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विपक्षी दलों का आरोप है कि यूसीसी को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसे लेकर और भी चर्चाएं होने की संभावना है।
राजधानी भोपाल के प्रशासन अकादमी में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की राज्य स्तरीय समिति की अंतिम दौर की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई दिल्ली में एक अन्य आवश्यक मीटिंग होने के कारण व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं। उनकी अनुपस्थिति में समिति के अन्य सदस्य-शत्रुघ्न सिंह (रिटायर्ड आईएएस और पूर्व मुख्य सचिव), बुद्ध सिंह, गोपाल शर्मा, अनूप नायर, और शोभा पैठणकर ने समिति के सदस्य सचिव अजय कटेसरिया के साथ मिलकर अलग-अलग चार सत्रों में विभिन्न पक्षों से महत्वपूर्ण सुझाव लिए।
बैठक के पहले सत्र में मप्र के विभिन्न आयोगों, जिनमें महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण अधिकार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग शामिल हैं, के अध्यक्षों, सदस्यों और सचिवों से विस्तार से सुझाव लिए गए। इसके बाद मप्र के अलग-अलग सरकारी विभागों ने भी प्रेजेंटेशन के जरिए अपने-अपने प्रस्ताव समिति के सामने रखे।
छह दलों को मिला था आमंत्रण
समान नागरिक संहिता की इस राज्य स्तरीय बैठक में देश की 6 राष्ट्रीय पार्टियों-भाजपा, कांग्रेस, बसपा, आप और कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेताओं को आमंत्रित किया गया था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण चर्चा में केवल भाजपा और सीपीएम के नेता ही शामिल होने पहुंचे, जबकि कांग्रेस सहित अन्य दल बैठक से नदारद रहे।
कम्युनिस्ट पार्टी की दलील
बैठक के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राज्य प्रतिनिधि सदस्य पीवी रामचंद्रन ने मप्र में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने के फैसले का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस समय देश और प्रदेश में बेरोजगारी, भुखमरी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याएं आम लोगों को परेशान कर रही हैं, और सरकार नीट की परीक्षा तक ठीक से आयोजित नहीं करवा पा रही है, ऐसे समय में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी की जा रही है। रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था आदिवासी वर्ग और अन्य वर्गों को परेशान करने वाली है, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
भाजपा ने समिति को सौंपे अहम प्रस्ताव
यूसीसी के मुख्य उद्देश्य यानी सभी नागरिकों के व्यक्तिगत कानूनों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेना आदि) में एकरूपता लाने के लिए मप्र भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और प्रदेश संयोजक (निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग) एसएस उप्पल द्वारा लिखित में समिति को कई अहम सुझाव सौंपे गए हैं। इनमें एनआरआई से शादी पर पंजीयन को अनिवार्य किया जाए। पार्टी ने अन्य मामलों में भी सुझाव दिए हैं।
क्या है यूसीसी
यूसीसी (UCC) का पूर्ण रूप ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के सभी नागरिकों (बिना किसी धर्म, जाति या लिंग भेद के) के लिए विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून लागू करना है।
यूसीसी के मुख्य बिंदु
समानता पर जोर: वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के अपने पर्सनल लॉ (जैसे हिंदू मैरिज एक्ट, मुस्लिम पर्सनल लॉ) हैं। यूसीसी लागू होने पर सभी धर्मों के लिए एक ही नियम होगा, जिससे विशेषकर महिलाओं को उनके अधिकारों में कानूनी समानता मिलेगी।
संवैधानिक आधार: भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) में सरकार को पूरे देश के लिए यूसीसी लागू करने का निर्देश दिया गया है।
वर्तमान स्थिति: गोवा में पुर्तगाली नागरिक संहिता (Portuguese Civil Code) के रूप में यह आजादी से पहले से लागू है। हाल ही में, उत्तराखंड इसे लागू करने वाला स्वतंत्रता के बाद देश का पहला राज्य बना है। अन्य कई राज्य भी इसे लागू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं।
