-कांग्रेस का समर्थन करेगी सपा, बसपा नहीं उतारेगी उम्मीदवार
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। प्रदेश की दतिया सीट पर होने जा रहा उपचुनाव त्रिकोणीय समीकरणों में उलझ सकता है। भाजपा के आशुतोष तिवारी, कांग्रेस के घनश्याम सिंह और आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव में से किसका पलड़ा भारी है, फिलहाल ये कहना तक मुश्किल है। नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाने के बाद चंबल अंचल के इतिहास में पहली बार हुआ, जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध-प्रदर्शन किए।
ग्वालियर-झांसी एनएच पर 12 घंटे चक्काजाम हुआ। पथराव में एसपी समेत 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके चलते प्रशासन ने पूरे जिले में बीएनएसएसस की धारा 163 लागू कर दी। बिना अनुमति किसी भी सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया। 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई। 27 भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज कर ली गई। उधर, पार्टी हाईकमान के बुलावे पर नरोत्तम मिश्रा दिल्ली रवाना हुए हैं। वे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करेंगे।
खेल बिगाड़ सकते हैं नरोत्तम समर्थक
इस बगावत के पीछे की वजह दतिया के सांगठनिक ढांचे को माना जा रहा है। जिला हो या मंडल स्तर अधिकतर समर्थक नरोत्तम मिश्रा समर्थक और करीबियों की है। बूथ समितियों में भी उन्हीं की पसंद के कार्यकर्ता हैं। हालांकि, भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। नाराजगी कम करने के लिए नरोत्तम मिश्रा के प्रति पूरी हमदर्दी दिखाई जा रही है। टिकट काटने के फैसले को दिल्ली आलाकमान के सर्वे और इंटरनल रिपोर्ट का हवाला देकर बचाव किया जा रहा है।
सूबे में बीजेपी की सरकार है, इसलिए सत्ता और संगठन पूरी ताकत आशुतोष को जिताने में झोंकेंगे। खुद नरोत्तम भी आशुतोष का नामांकन दाखिल कराने जा रहे हैं। वे प्रचार की कमान भी संभालेंगे, लेकिन सवाल यह है कि कार्यकर्ता कितनी दमदारी से चुनावी मैदान में पसीना बहाएंगे। हालांकि, यहां मायावती की बसपा ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारने की बात कही है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इंडिया गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही है। ऐसे में दतिया उपचुनाव में रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।
