नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और उसकी कैंसर एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फार रिसर्च आन कैंसर (आइएआरसी) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लगभग 92 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार कैंसर से प्रभावित होंगे, जबकि हर पांच में से एक व्यक्ति इस बीमारी का शिकार होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंसर केवल मरीज ही नहीं, बल्कि उसके परिवार पर भी गहरा शारीरिक, मानसिक और आर्थिक असर डालता है। रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार और सहायक देखभाल तक पहुंच में देशों के बीच बड़ी असमानता बनी हुई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर से पीडि़त 87 प्रतिशत महिलाएं निदान के पांच वर्ष बाद तक जीवित रहती हैं, जबकि निम्न आय वाले देशों में यह आंकड़ा केवल 42 प्रतिशत है। तीन में से एक से भी कम देशों ने कैंसर उपचार को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) में शामिल किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में हर वर्ष करीब 2.06 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आते हैं और लगभग एक करोड़ लोगों की मौत इस बीमारी से होती है। प्रतिदिन 26 हजार से अधिक लोगों की जान जाने के कारण कैंसर, हृदय रोगों के बाद दुनिया में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत देशों के पास राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण योजना है, लेकिन इनका लाभ अपेक्षित गति से लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में कैंसर की 20 प्रमुख आवश्यक दवाओं की उपलब्धता केवल नौ से 54 प्रतिशत तक है, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह 68 से 94 प्रतिशत के बीच है। रिपोर्ट में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निजी क्षेत्र से कैंसर नियंत्रण को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का हिस्सा बनाने, सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया गया है।
कैंसर की बीमारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में हर 5 में से 1 व्यक्ति अपने जीवनकाल में कैंसर की बीमारी से पीड़ित होता है। वैश्विक स्तर पर हर साल कैंसर के लगभग 2.1 करोड़ (21 मिलियन) नए मामले सामने आते हैं और इस बीमारी के कारण करीब 1 करोड़ लोगों की मौत हो जाती है।
वैश्विक आंकड़े और भविष्य का अनुमान
2050 तक का संकट: विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया भर में कैंसर के नए मामलों की संख्या बढ़कर सालाना 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।
व्यापक प्रभाव: रिपोर्ट दर्शाती है कि दुनिया के करीब 92% लोग किसी न किसी रूप में इस बीमारी से प्रभावित हैं, या तो वे खुद इससे पीड़ित हैं या उनके परिवार का कोई सदस्य इसका सामना कर रहा है।
सबसे आम कैंसर: दुनिया भर में फेफड़ों का कैंसर, स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल (आंत का) कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इनमें से फेफड़ों का कैंसर सबसे घातक माना जाता है। कैंसर के मुख्य कारण (रिस्क फैक्टर्स)कैंसर से होने वाली मौतों में से करीब 33% से अधिक मामलों को जीवनशैली में बदलाव करके रोका जा सकता है।
इसके प्रमुख कारण
तंबाकू और धूम्रपान: कैंसर से होने वाली मौतों का यह सबसे बड़ा और रोकने योग्य कारण है।
शराब का सेवन और मोटापा: अधिक वजन (BMI का ज्यादा होना) और शराब पीने से कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।
खराब खान-पान: आहार में फलों और सब्जियों की कमी तथा शारीरिक निष्क्रियता (व्यायाम न करना)।
संक्रमण: निम्न और मध्यम आय वाले देशों में लगभग 30% कैंसर के मामले हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) जैसे संक्रमणों के कारण होते हैं।
देशों के बीच असमानता
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के अनुसार, अमीर और गरीब देशों के बीच कैंसर के इलाज और शुरुआती जांच की सुविधाओं में बहुत बड़ी असमानता है। गरीब देशों में स्वास्थ्य संसाधनों और डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे वहां मृत्यु दर अधिक है।
भारत में कैंसर की वर्तमान स्थिति
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
बढ़ते आंकड़े: भारत में हर साल 14.6 लाख (1.46 मिलियन) से अधिक नए कैंसर के मामले दर्ज किए जाते हैं।
द लैंसेट की रिपोर्ट: द लैंसेट (The Lancet) के हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में निदान (Diagnosis) के बाद 5 में से 3 कैंसर मरीज जीवित नहीं बच पाते, जिसका मुख्य कारण देर से बीमारी का पता चलना है।
पुरुषों में प्रमुख कैंसर: भारतीय पुरुषों में ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) सबसे आम है, जो कुल मामलों का लगभग 16% है। इसके बाद फेफड़ों और पेट का कैंसर आता है।
महिलाओं में प्रमुख कैंसर: महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) सबसे आम है (लगभग 30%), जिसके बाद गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (Cervical Cancer) (लगभग 19%) आता है।
कैंसर के 10 शुरुआती लक्षण (Early Symptoms)
कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर यदि तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए, तो इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
अचानक वजन कम होना: बिना किसी प्रयास या डाइटिंग के शरीर का वजन तेजी से गिरना।
लगातार थकान: भरपूर आराम करने के बाद भी शरीर में अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना।
शरीर में गांठ (Lump): स्तन, बगल, गले या शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द रहित या दर्द वाली गांठ का बनना।
ठीक न होने वाले छाले: मुंह में या त्वचा पर ऐसे छाले या घाव जो दवाओं के बाद भी हफ्तों तक ठीक न हों।
कफ और आवाज में बदलाव: लगातार खांसी आना, बलगम में खून आना या आवाज का भारी (Hoarseness) हो जाना।
शौच की आदतों में बदलाव: लगातार कब्ज, दस्त होना या मल-मूत्र के रास्ते से खून आना।
असामान्य रक्तस्राव: महिलाओं में पीरियड्स के अलावा या मेनोपॉज (माहवारी बंद होने) के बाद भी ब्लीडिंग होना।
तिल या मस्से में बदलाव: त्वचा पर मौजूद किसी तिल या मस्से के रंग, आकार या रूप में अचानक बदलाव आना।
निगलने में कठिनाई: खाना खाते समय गले में लगातार अटकन या दर्द महसूस होना।
लगातार दर्द या बुखार: शरीर के किसी हिस्से में बिना वजह हफ्तों तक दर्द रहना या रात में पसीना आना व बुखार रहना।
कैंसर से बचाव के अचूक उपाय (Prevention Methods)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लगभग 30 से 50% कैंसर के मामलों को अपनी जीवनशैली में सुधार करके रोका जा सकता है।
तंबाकू से दूरी: धूम्रपान, गुटखा, खैनी और बीड़ी का पूरी तरह त्याग करें। भारत में ओरल कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू ही है।
शराब पर नियंत्रण: शराब का सेवन बंद या बेहद सीमित करें।
स्वस्थ खान-पान (Healthy Diet): अपने भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज शामिल करें। प्रोसेस्ड मीट, डिब्बाबंद भोजन और अत्यधिक तली-भुनी चीजों से बचें।
नियमित व्यायाम: वजन को नियंत्रित रखें (मोटापे से बचें) और रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करें।
टीकाकरण (Vaccination): लिवर कैंसर से बचने के लिए हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) का टीका लगवाएं। महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) कैंसर से बचाने के लिए 9 से 14 वर्ष की उम्र में एचपीवी (HPV) वैक्सीन जरूर लगवाएं।
नियमित स्क्रीनिंग (Screening): 40 की उम्र के बाद महिलाओं को मैमोग्राफी (स्तन की जांच) और पैप स्मीयर (गर्भाशय की जांच) तथा पुरुषों को ओरल व प्रोस्टेट की नियमित जांच करानी चाहिए।
