-नरोत्तम के आंसुओं में बह गए आशुतोष के अरमान
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल विधासनभा सीटों में से एक दतिया के उपचुनाव ट्रेंड कर रहे हैं। दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6 हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया। दतिया उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए उसके सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ में लगा बड़ा झटका माना जा रहा है। साथ ही भाजपा की चुनावी रणनीति, स्थानीय संगठन और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस उपचुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला भाजपा का प्रत्याशी बदलना माना जा रहा है। पार्टी ने कई बार दतिया से जीत दर्ज करने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट बदलने के फैसले को स्थानीय स्तर पर लेकर कई तरह की चर्चाएं रहीं। चुनाव प्रचार में भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और भीतरघात की अटकलें लगातार राजनीतिक गलियारों में सुनाई देती रहीं। अब भाजपा के दतिया के कार्यकर्ताओं की नाराजगी को हार की बड़ी वजह माना जा रहा हैं।
भाजपा का वोटर शहरों में ज्यादा होता है। दतिया चुनाव में ग्रामीण इलाको से कम वोटिंग शहरों में हुई। ग्रामीण इलाकों के कई मतदान केंद्रों पर 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान दर्ज हुआ। सबसे अधिक बूथ क्र. 62 पर 92.19 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके उलट दतिया शहर के कई केंद्रों पर मतदान 55 प्रतिशत से भी कम रहा। बूथ क्र. 110 पर केवल 43.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र का सबसे कम मतदान प्रतिशत रहा। हालांकि, तीसरे राउंड से ही कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बढ़त बनाना शुरू कर दी थी।
2023 विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी थी। टिकट घोषित होने से पहले ही उन्होंने गांव-गांव और वार्ड-वार्ड संपर्क अभियान शुरू कर दिया था। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने स्वीकार किया कि पिछली बार उनसे कुछ कमियां रह गई थीं और जनता से एक और अवसर देने की अपील की थी। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। नरोत्तम दतिया में 2008 से 2018 तक लगातार चुनाव जीतते आए। वह शिवराज सरकार में नंबर दो कहलाते थे। उनका टिकट कटने के बावजूद वह चुनाव में प्रचार करने उतरे और लगातार संभाएं कीें।
टिकट कटने के बाद दतिया में भाजपा की पहली बड़ी संभा में नरोत्तम ने आशुतोष तिवारी को जिताने घर-घर जाने का ऐलान किया। साथ ही अंत में वह भावुक हो गए। जानकारों का कहना है कि मंच पर उनके आसूंओं ने उनके समर्थकों के बीच भावनात्मक माहौल बना दिया। इससे पहले भाजपा में पहली बार टिकट कटने पर इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और जिलाध्यक्ष समेत पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए। जानकारों का कहना है कि इस असंतोष के कारण कार्यकर्ताओं ने प्रचार में रुचि नहीं दिखाई। यह भी चर्चा है कि कई जगह पार्टी के खिलाफ काम किया।
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए संकेत
राजनीतिक जानकारों की मानें तो दतिया उपचुनाव का परिणाम भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक अहम संकेत है। दतिया जैसे क्षेत्र में जनाधार वाले नेता की उपेक्षा कर सर्वे के आधार पर टिकट बदलने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ा। यदि भविष्य में भी सिर्फ सर्वे के आधार पर प्रत्याशियों का चयन किया गया, तो ऐसे परिणाम स्वाभाविक हैं।
कांग्रेस के लिए संजीवनी
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। लंबे समय तक भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली इस जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल जरूर बढ़ा है। वहीं, भाजपा के लिए यह परिणाम आगामी चुनावों से पहले संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का संकेत माना जा रहा है। प्रदेश की सबसे हाईवोल्टेज सीट के नतीजे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
