-कैबिनेट का फैसला-12 सड़कें बनाने 4600 करोड़ का कर्ज लेने एमपीआरडीसी को अनुमति
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मप्र में सरकारी योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में चार गुना मुआवजा देने संबंधी प्रस्ताव में आपसी सहमति की नीति को भी शामिल किया गया है। अब किसी प्रोजेक्ट के लिए जरूरत के आधार पर सरकार आपसी सहमति से भूमि अधिग्रहण कर चार गुना भुगतान कर सकेगी। सरकार ने प्रदेश की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व नाममात्र मूल्य पर एमपीआरडीसी को देने का निर्णय भी लिया है। सरकार ने यह भी तय किया है कि प्रदेश में ऐसे युवाओं की तलाश की जाएगी, जिनके पास न रोजगार न कौशल है और न ही पढ़ाई कर रहे हैं।
मंगलवार को कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने एमपीआरडीसी को 12 मार्गों के निर्माण के लिए नाबार्ड इंफ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट अस्सिटेंस के माध्यम से 4,600 करोड़ रुपए के ऋण के लिए शासकीय गारंटी देने को मंजूरी दी। इन मार्गों में भोपाल-विदिशा मार्ग, खलघाट-मनावर-मांगोद, मंदसौर-सीतामऊ-मप्र, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग को 6-लेन मय पेव्ड, नीमच-मनासा-रामपुरा झालावाड मार्ग एसएस-7, इंदौर-देपालपुर मार्ग का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर, चापडा-नेवरी से देवास तक एसएच-64 का 2-लेन, दिनारा-दतिया, सेवड़ा मार्ग, आगर-सांरगपुर मार्ग, सोयत-माचलपुर-जीरापुर, राहतगढ़-खुरई से खिमलासा मार्ग तथा सुन्दरा-सिंहपुर-कोठी-बिरसिंहपुर-सेमरिया गोहदा-सिरमौर शामिल हैं।
22 प्रमुख सड़कें एमपीआरडीसी के हवाले
राज्य की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व हस्तांतरण नाममात्र मूल्य पर मप्र सड़क विकास निगम को किया जाएगा। इसके बदले निगम का संचालक मंडल राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी जारी करेगा। इस ऋण के ब्याज और ऋण का भुगतान हस्तांतरित मार्ग से मिलने वाली टोल राशि और अन्य स्त्रोतों से मिली राशि से किया जाएगा। इसके लिए मप्र राजमार्ग निधि अधिनियम, 2012 में संशोधन किया जाकर इस मार्गों पर टोल संग्रहण और अन्य स्त्रोतों से प्राप्त राशि को सीधे निगम की आय माना जाएगा। परियोजना में राशि का आहरण ‘जस्ट इन टाइम’ सिद्धांत के अनुसार केवल आवश्यकता पडऩे पर ही किया जाएगा।
सिवनी-बालाघाट 91.64 किमी मार्ग के लिए 3960 करोड़ मंजूर
कैबिनेट ने सिवनी-बालाघाट 91.64 किमी मार्ग, 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ निर्माण और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कुल 3,960 करोड़ 9 लाख रुपए मंजूर किए हैं। मार्ग निर्माण के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर परियोजना और वित्तीय लागत 3,458 करोड़ 93 लाख की स्वीकृति दी गई है। परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत राशि 704 करोड़ 38 लाख रुपए राज्य बजट के माध्यम से और शेष 60 प्रतिशत 2,253 करोड़ 39 लाख रुपए संचालन अवधि में 15 वर्षों तक 6 माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से व्यय किया जाएगा। मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सिवनी बालाघाट मार्ग की लंबाई 91.6 किमी है, इसे पेव्ड शोल्डर के साथ फोरलेन करने का निर्णय हुआ है। इसमें 6 ्यरू जंगल है। टाइगर कोर एरिया में भी आता है। इसके बनने से दूरी 2 घंटे से घटकर एक घंटे हो जाएगी। मार्ग निर्माण की लागत 3458 करोड़ होगी। हाईब्रिड एन्यूटी से मार्ग बनेगा। हाईब्रिड एन्यूटी माडल पर अन्य सड़कों को भी बनाया जाएगा।
राज्य कम्प्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट के लिए 80 करोड़
कैबिनेट ने राज्य कम्प्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट, रेसपान्स ऑपरेशन सेंटर की स्थापना से संबंधित योजना की वित्तीय वर्ष 2026-2027 से 2030-2031 तक निरंतर संचालन के लिए 80 करोड़ की स्वीकृति दी है। इसके लिए प्रशासनिक, तकनीकी, परामर्श, इंसीडेंट रिस्पॉन्स, फॉरेंसिक और एसओसी कार्य के लिए 25 नए पदों सहित वित्तीय लागत राशि 3.99 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही पूर्व से स्वीकृत 21 मानव संसाधनों के वेतन पुनर्निर्धारण के लिए 3.24 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के इंफ्रॉस्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, सायबर सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को गति देने के लिए 10 हजार 630 करोड़ के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
निर्धन एवं कमजोर वर्गों से जुड़ी 19 जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए 1740 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए।
उज्जैन स्थित मप्र धन्वंतरि स्वास्थ्य विवि के संचालन के लिए 244 पदों के सृजन तथा साइबर सुरक्षा प्रबंधन के लिए एमपी-सीईआरटी योजना में 80 करोड़ मंजूर किए गए।
नई दिल्ली स्थित मप्र भवन एवं अतिथि गृहों के उन्नयन के लिए 250 करोड़ 67 लाख स्वीकृत किए गए।
वर्ष 2024 के पहले ईओडब्ल्यू द्वारा 1860 के अधिनियम के अंतर्गत अपराध दर्ज किए जाते रहे हैं। अब एक जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता लागू हुई है। इसलिए पुरानी धाराओं को बदल कर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के आधार पर कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में निरंतरता के लिए 80 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। 13 पदों को समर्पित करते हुए 25 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। सामाजिक न्याय दिव्यांग जन विभाग की 1740 करोड़ की निरंतरता की स्वीकृति दी गई है।
खेल और युवा कल्याण विभाग की ओर से महिला टी 20 ब्लाइंड में भारतीय टीम में एमपी के तीन खिलाड़ी और तीन ट्रेनर शामिल थे। इन तीनों खिलाडिय़ों को 25-25 लाख और प्रशिक्षकों को एक-एक लाख रुपए प्रोत्साहन राशि देने की कार्योत्तर स्वीकृति दी गई है।
पशुपालन और डेयरी विभाग में विकास योजनाओं की निरंतरता को स्वीकृति दी गई है।
कैबिनेट ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की निर्धन और कमजोर वर्ग के सामाजिक और आर्थिक विकास से संबंधित 19 योजनाओं के वित्तीय वर्ष 2026 से 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 1 हजार 740 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है।
कैबिनेट बैठक के पहले इन विषयों पर चर्चा
जहां कम वर्षा हुई है वहां कलेक्टर और अधिकारी योजना बनाकर काम करें ताकि पानी की कमी से होने वाले संकट से निबटने के लिए कार्ययोजना तैयार कर काम करा सकें। जन विश्वास अभियान के तीन सप्ताह पूरे हुए हैं। अगली बार 29 अगस्त और पांच सितम्बर को जन विश्वास अभियान के कार्यक्रम होंगे।
युवाओं को 5 कैटेगरी में बांटा
लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि नीति आयोग ने विकसित भारत के लिए जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें युवाओं को पांच भाग में बांटा गया है। इसमें पांचवीं श्रेणी ऐसे युवाओ की है जिनके पास न रोजगार न कौशल है और न ही पढ़ाई कर रहे हैं। रिपोर्ट में ऐसे युवाओं को नीड कहा है। एमपी मेंं ऐसे युवाओं को चिन्हित कर कौशल, रोजगार, स्वरोजगार देने के लिए काम करना है। इसके लिए वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा, जिसमें उच्च शिक्षा, कौशल, खेल और युवा कल्याण विभाग समेत अन्य विभाग शामिल किए गए हैं।
