भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड वरिष्ठ नेत्री उमा भारती एक बार फिर सक्रिय नजर आ रही हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उनकी मुलाकात, सागर के बंडा में जहरीली शराब मामले पर उनके तीखे सवाल और शराबबंदी को लेकर दोबारा उठाई गई मांग ने उनकी राजनीतिक सक्रियता को चर्चा में ला दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हालांकि, भाजपा में उनकी किसी नई संगठनात्मक भूमिका को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में उन्हें पार्टी का “संकट मोचक” बताना राजनीतिक आकलन है, लेकिन इतना जरूर है कि उनके हालिया बयानों ने प्रदेश की राजनीति में बहस को तेज किया है।
सीएम मोहन यादव से बंद कमरे में 40 मिनट की मुलाकात
सितंबर के मध्य में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अचानक भोपाल स्थित उमा भारती के आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। मुलाकात के बाद उमा भारती ने इसे राजनीतिक बैठक के बजाय “भाई-बहन की मुलाकात” बताया। मुख्यमंत्री की ओर से भी इस मुलाकात को लेकर किसी नए राजनीतिक दायित्व की घोषणा नहीं की गई।
इस मुलाकात का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि प्रदेश में भाजपा संगठन और सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। इससे पहले भाजपा के कई नेताओं की दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकातों की खबरें भी सामने आई थीं।
सागर शराबकांड पर सीधे सवाल
उमा भारती ने सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब की बिक्री की जानकारी स्थानीय स्तर पर थी तो सरपंच से लेकर विधायक और सांसद तक जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था तो स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी उन्होंने की।
सागर मामले में सरकार ने पहले ही न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए और सागर संभाग की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी आईजी इरशाद वली को दी गई।
फिर उठाया पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा
सागर की घटना के बाद उमा भारती ने मध्य प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग फिर दोहराई। उनका कहना है कि अवैध शराब के साथ-साथ वैध शराब से जुड़े स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
उमा भारती पहले भी मध्य प्रदेश में शराबबंदी को लेकर अभियान चला चुकी हैं। ताजा घटना के बाद उनका यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा में आया है।
शिवपुरी की महिलाओं के आंदोलन का किया समर्थन
उमा भारती ने शिवपुरी जिले में शराब दुकानों के विरोध में महिलाओं द्वारा किए गए आंदोलनों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका शराबबंदी की मांग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से तत्काल वहां नहीं पहुंच पाने की बात कही, लेकिन स्वस्थ होने के बाद आंदोलनकारी महिलाओं से मिलने की इच्छा जताई।
उज्जैन के मंदिर को लेकर भी सरकार से सवाल
मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले उमा भारती ने उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर से जुड़े रास्ते और धार्मिक स्थल के संरक्षण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करने की मांग की और कहा कि धार्मिक स्थलों के मामले में संवैधानिक व्यवस्था के तहत भेदभाव नहीं होना चाहिए। इस मुद्दे पर उनकी सक्रियता ने भी उन्हें प्रदेश की राजनीतिक बहस में बनाए रखा।
भाजपा के लिए उमा भारती की राजनीतिक अहमियत
उमा भारती मध्य प्रदेश भाजपा की प्रमुख नेताओं में रही हैं। वह मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और केंद्र सरकार में भी मंत्री का दायित्व संभाल चुकी हैं। प्रदेश में उनका राजनीतिक प्रभाव खासतौर पर बुंदेलखंड और महिला मतदाताओं से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में लंबे समय से चर्चा में रहा है।
हालांकि, वर्तमान भाजपा संगठन में उनकी कोई नई औपचारिक भूमिका घोषित नहीं हुई है। इसलिए उनकी मौजूदा सक्रियता को सीधे संगठनात्मक वापसी के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।
क्या पार्टी में कोई नई जिम्मेदारी मिलेगी?
मध्य प्रदेश भाजपा में हाल के दिनों में संगठनात्मक गतिविधियां तेज हुई हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई नेताओं की केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकातों की खबरें सामने आई हैं। सरकार और संगठन से जुड़े संभावित फैसलों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चलती रही हैं।
ऐसे माहौल में उमा भारती की मुख्यमंत्री से मुलाकात और उसके बाद उनके सार्वजनिक बयान राजनीतिक तौर पर ध्यान खींच रहे हैं। हालांकि, भाजपा ने उमा भारती को कोई नई जिम्मेदारी देने की घोषणा नहीं की है।
“संकट मोचक” वाली चर्चा का आधार क्या?
उमा भारती का नाम “संकट मोचक” के तौर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि वह भाजपा के भीतर रहते हुए भी कई मौकों पर सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर अपनी स्वतंत्र राय सार्वजनिक करती रही हैं। सागर शराबकांड में भी उन्होंने केवल प्रशासनिक कार्रवाई की बात नहीं की, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।
दूसरी ओर, उनकी मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को लेकर खुद उमा भारती ने इसे राजनीतिक बैठक नहीं बताया। इसलिए उनकी भूमिका को लेकर फिलहाल दो बातें अलग-अलग रखनी जरूरी हैं—एक तरफ उनकी बढ़ी हुई सार्वजनिक सक्रियता है और दूसरी तरफ किसी नई राजनीतिक या संगठनात्मक जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि का अभाव।
आगे क्या?
मध्य प्रदेश भाजपा में आने वाले दिनों में संगठन और सरकार से जुड़े फैसले होते हैं तो उमा भारती की भूमिका पर भी नजर रहेगी। फिलहाल उनके बयानों और मुलाकातों से इतना स्पष्ट है कि वह शराबबंदी, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर अपनी राजनीतिक आवाज बनाए हुए हैं।
उमा भारती की सक्रियता आने वाले दिनों में किस रूप में बदलती है, यह भाजपा के आधिकारिक फैसलों और उनके अगले राजनीतिक कदमों से ही स्पष्ट होगा।
