भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के आरोप सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। उपमुख्यमंत्री के ओएसडी (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी) दीपम रायचूरा पर भोपाल में शराब दुकानों के ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने और बैंक गारंटी के लिए कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) के इस्तेमाल में मदद करने के आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया के नाम से सामने आए बयान पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मामले के सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दीपम रायचूरा को ओएसडी के प्रभार से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। देवड़ा ने संबंधित विभाग को मामले की जांच के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शराब ठेकों में कथित अनियमितताओं की बात सामने आई है, वे वर्ष 2024-25 के हैं। उस समय रायचूरा भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ थे, न कि उनके ओएसडी के रूप में।
दो शराब दुकानों के ठेकों से जुड़ा है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोप लगाने वाले मोहित गोगिया के कथित बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई थी। आरोप है कि इन ठेकों के लिए बैंक गारंटी के रूप में इस्तेमाल की गई कथित फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में भी भूमिका निभाई गई।
कथित बयान में एक करोड़ रुपये के भुगतान का विवरण भी दिया गया है। दावा है कि इसमें से 50 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र में होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। नकद राशि दीपक दुबे नामक व्यक्ति के जरिए लिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
फिलहाल, इन कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले दस्तावेज सामने आने की जानकारी नहीं है, इसलिए इन दावों को जांच में सत्यापित किया जाना बाकी है।
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने क्या कहा?
मामले पर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि वर्ष 2024-25 में शराब ठेकों से संबंधित अनियमितताओं की जानकारी उन्हें समाचार माध्यमों से मिली। उन्होंने संबंधित विभाग को शीघ्र जांच करने के निर्देश दिए हैं। देवड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों से संबंधित अवधि में दीपम रायचूरा भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और उस समय उनके ओएसडी नहीं थे। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए रायचूरा को ओएसडी के प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर उठाया गया कदम है। हालांकि, ओएसडी को प्रभार से हटाया जाना अपने आप में आरोपों की पुष्टि या दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग
मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस ने सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित करने, कथित वित्तीय लेन-देन और शराब ठेकों की प्रक्रिया की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
विपक्ष का सवाल है कि शराब ठेकों की प्रक्रिया में बैंक गारंटी, लाइसेंस और कथित भुगतान से जुड़े पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा मामला
यह प्रकरण ऐसे समय सामने आया है, जब मोहित गोगिया करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी बताया जा रहा है। उसके नाम से सामने आए कथित बयान में शराब ठेकों के आवंटन, एफडीआर और भुगतान को लेकर कई दावे किए गए हैं। इन दावों की जांच में पुष्टि होना महत्वपूर्ण होगा।
मामले में प्रमुख सवाल यह हैं कि कथित एफडीआर वास्तविक थीं या नहीं, शराब दुकानों के ठेके किस प्रक्रिया से दिए गए, भुगतान के दावों के समर्थन में क्या दस्तावेज हैं और संबंधित अधिकारियों की वास्तविक भूमिका क्या रही। इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
डिप्टी सीएम के ओएसडी को प्रभार से हटाए जाने और विभागीय जांच के निर्देश के बाद अब पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं या भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
मध्य प्रदेश में शराब ठेकों से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, बैंक गारंटी की जांच और सरकारी ठेकों की निगरानी से जुड़े सवाल खड़े करता है। इसकी वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मध्य प्रदेश में बड़े रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामले
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के बड़े मामलों को समझने के लिए रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारियों, कथित रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और सरकारी धन की कथित हेराफेरी के मामलों को अलग-अलग देखना जरूरी है। कई मामलों में बरामद संपत्ति करोड़ों रुपये की रही है।
वर्षवार प्रमुख मामले
2010–2014: IAS दंपती के यहां छापा, करोड़ों की संपत्ति का मामला
भोपाल में 4 फरवरी 2010 को आईएएस अधिकारी अरविंद जोशी और टीनू जोशी के सरकारी आवास पर आयकर विभाग ने छापा मारा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छापे में लगभग 3.6 करोड़ रुपये नकद मिले थे। बाद में आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच हुई और 2014 में दोनों अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह रिश्वत की किसी एक रकम का मामला नहीं, बल्कि कथित अवैध संपत्ति से जुड़ा प्रकरण था।
2018–2019: लोकायुक्त के रिश्वत ट्रैप और संपत्ति जांच
2018-19 की रिपोर्टिंग में लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान 177 सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने और कुल 26.37 लाख रुपये की रिश्वत राशि का उल्लेख किया गया था। इसी अवधि की रिपोर्ट में आय से अधिक संपत्ति के अलग मामलों में 43.70 करोड़ रुपये की संपत्तियों को लेकर कार्रवाई का विवरण भी था।
2022: PWD सब-इंजीनियर 7 लाख रुपये लेते पकड़ा गया
नवंबर 2022 में पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में लोकायुक्त सागर की टीम ने लोक निर्माण विभाग के एक सब-इंजीनियर को कथित तौर पर 7 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। उस समय इसे बड़ी ट्रैप कार्रवाई बताया गया था।
2024: नर्सिंग कॉलेज मामले में CBI अधिकारियों की गिरफ्तारी
मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच के दौरान मई 2024 में CBI के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं। आरोप था कि कॉलेजों को मान्यता संबंधी लाभ पहुंचाने के बदले रिश्वत का लेन-देन किया जा रहा था।
2024: PWD के अधीक्षण यंत्री पर 10 लाख रुपये रिश्वत का आरोप
जुलाई 2024 में लोकायुक्त की भोपाल इकाई ने नर्मदापुरम संभाग के PWD अधीक्षण यंत्री आर.सी. तिरोले को कथित तौर पर 10 लाख रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था। शिकायतकर्ता ठेकेदार ने सड़क निर्माण कार्य की अवधि बढ़ाने से जुड़ी फाइल के लिए 20 लाख रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदार का लगभग 15 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित था।
2024–2025: पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा की संपत्ति की जांच
दिसंबर 2024 में पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा से जुड़े ठिकानों पर विभिन्न एजेंसियों की कार्रवाई चर्चा में रही। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14 करोड़ रुपये नकद, 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना और करीब 2 करोड़ रुपये की चांदी सहित अन्य संपत्तियों का उल्लेख हुआ। यह कथित आय से अधिक संपत्ति और जांच का मामला था।
2026: डिप्टी सीएम कार्यालय से जुड़े OSD पर 1 करोड़ रुपये का आरोप
हाल में सामने आए मामले में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े अधिकारी दीपम रायचूरा पर शराब ठेकों के संबंध में एक करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्टों में कथित फर्जी FDR और भुगतान के दावे भी सामने आए हैं। अधिकारी को OSD के प्रभार से हटाए जाने और जांच के निर्देश दिए हैं।
आय से अधिक संपत्ति
IAS अरविंद जोशी प्रकरण
41.87 करोड़ रुपये की कथित अनुपातहीन संपत्ति
बड़ी बरामदगी
सौरभ शर्मा प्रकरण
IAS अरविंद जोशी की कथित अनुपातहीन संपत्ति के संबंध में 41.87 करोड़ रुपये का आंकड़ा 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट में दिया गया है।
भ्रष्टाचार की जांच पर व्यापक सवाल
जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के पास साढ़े छह वर्षों में कुल 50,453 शिकायतें और आवेदन पहुंचे। इनमें से 486 मामलों में अदालत में चालान पेश किए जाने की जानकारी विधानसभा में दी गई थी।
