भोपाल। भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) 2047 के प्रस्तावित प्रारूप को लेकर राजधानी में विरोध का बिगुल बज चुका है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में सैकड़ों नागरिक, पर्यावरणविद और समाजसेवियों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) कार्यालय पहुंचकर हजारों की संख्या में औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। रहवासियों का सीधा आरोप है कि नया मास्टर प्लान भोपाल को सुनियोजित विकास की ओर ले जाने के बजाय अवैध निर्माणों और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के लिए तैयार किया गया प्रतीत होता है।
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प्रमुख विवादित बिंदु और आपत्तियों का मुख्य आधार
- अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण पर रोक
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन: विकास योजना के अध्याय 15.38 और बिंदु 15.39 (‘मार्केट स्ट्रीट’) के तहत आवासीय परिसरों में संचालित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने का प्रस्ताव रखा गया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार, यह प्रावधान माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश (सिविल अपील 17103/2026) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें अवैध गतिविधियों को सील करने और स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने ढांचों को ढहाने का निर्देश दिया गया था।
अरेरा कॉलोनी पर असर: अरेरा कॉलोनी (RG-3 क्षेत्र E-1 से E-5) जैसे शांत आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा देने से शांति, पार्किंग, ट्रैफिक और आम नागरिकों की सुरक्षा पर गहरा संकट मंडराएगा।
- पर्यावरण, हरित क्षेत्र और जलस्रोतों पर संकट
बड़े तालाब का कैचमेंट क्षेत्र एवं वेस्टर्न बायपास: ड्राफ्ट में बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया, ग्रीन बेल्ट (हरित क्षेत्र) और टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर में निर्माण की अनुमति देने तथा FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) बढ़ाने का प्रस्ताव है।
बेंगलुरु जैसी तबाही की चेतावनी: रहवासियों ने IISc बेंगलुरु के वैज्ञानिक डॉ. टी.वी. रामचंद्र के अध्ययन का हवाला देते हुए सचेत किया कि यदि अनियोजित शहरीकरण को तुरंत नहीं रोका गया, तो भोपाल भी जल संकट और अत्यधिक गर्मी के मामले में बेंगलुरु की राह पर चला जाएगा।
- नियमों और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी
फुटपाथ व इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: सुप्रीम कोर्ट (सिविल अपील 4665-4666/2025) के आदेश अनुसार आवासीय (1.8m) और व्यावसायिक (2.5m) मार्गों पर भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के तहत फुटपाथ अनिवार्य हैं, जिसे इस मास्टर प्लान से हटा दिया गया है।
तकनीकी एवं भाषाई त्रुटियां: मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की प्रतियां धुंधली हैं और अंग्रेजी वर्जन के लिंक पर भी हिंदी के दस्तावेज ही अपलोड किए गए हैं।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
- विरोध प्रदर्शन और आपत्ति दर्ज कराने में भोपाल के कई वरिष्ठ नागरिक और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले चेहरे प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- प्रमुख व्यक्ति / प्रतिनिधि पद / संबद्धता
- कविन्द्र कियावत पूर्व आईएएस अधिकारी
- विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाटी याचिकाकर्ता
- अरुण गुर्टू, पवन जैन, पूर्णेंदु शुक्ला वरिष्ठ नागरिक एवं रहवासी प्रतिनिधि
- मोहन खरपते एवं सोमकांत उमलकर अध्यक्ष, गौतम नगर
- अपर्णा वाशिष्ट अध्यक्ष, ‘प्रयास’ संस्था
- शुभ्रा गोयल अध्यक्ष, शाहपुरा विकास समिति
इन क्षेत्रों के रहवासियों ने दिखाई एकजुटता
अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, रचना नगर, बावडिया, साकेत नगर, भेल, लालघाटी, कोलार रोड, नेहरू नगर, गुलमोहर, शाहपुरा, ग्रीन सिटी सोसाइटी आदि क्षेत्रों के रहवासियों ने इस विरोध में एकजुटता दिखाई।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति की 7 प्रमुख मांगें
- अवैध गतिविधियों का नियमितीकरण रद्द हो: आवासीय क्षेत्रों (विशेषकर RG-3 क्षेत्र अरेरा कॉलोनी) में कमर्शियल गतिविधियों और ‘मार्केट स्ट्रीट’ के प्रावधानों को पूरी तरह हटाया जाए।
- IRC मानकों का पालन: भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में फुटपाथ, पार्किंग और सर्विस रोड का निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
- पार्क व खुले स्थान सुरक्षित रहें: पुराने मास्टर प्लान 2005 की तरह सभी स्वीकृत पार्कों और खुले स्थानों को संरक्षित रखा जाए; इन्हें गुमटियों या पार्किंग के नाम पर न बदला जाए।
- अनुच्छेद 21 की रक्षा: चौड़ाई के आधार पर आवासीय सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने का प्रावधान विलोपित हो, ताकि नागरिकों का ‘शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार’ सुरक्षित रहे।
- पर्यावरण संरक्षण प्राथमिकता बने: वेस्टर्न बायपास, बड़े तालाब कैचमेंट क्षेत्र और टाइगर कॉरिडोर में FAR बढ़ाने या निर्माण की अनुमति देने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए।
- मेट्रो रीजन में कमर्शियल विस्तार: व्यावसायिक गतिविधियों का दबाव शहर के आवासीय इलाकों पर डालने के बजाय इसे ‘भोपाल मेट्रो रीजन’ क्षेत्र में ले जाया जाए।
- न्यायालयीन आदेशों का अक्षरशः पालन: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाए।
अब आगे का रुख
समिति ने स्पष्ट किया है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (TNCP) को सभी दर्ज आपत्तियों पर पारदर्शी तरीके से विचार करना होगा और रहवासियों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान करना होगा। यदि विभाग ने अवैध निर्माणों को वैधता देने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्रावधानों को वापस नहीं लिया, तो याचिकाकर्ता आगामी सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस पूरे मामले को प्रस्तुत करेंगे।
