प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर कथित टिप्पणी पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने भी किया पलटवार
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक विवाद तेज हो गया। भाजपा ने खड़गे के बयान के विरोध में देशभर में प्रदर्शन किए और उनसे माफी मांगने के साथ इस्तीफे की मांग उठाई। विवाद बिहार की राजधानी पटना में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ था। भाजपा ने टिप्पणी को प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि खड़गे की बात को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है।
पटना के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 25 अक्टूबर को पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में खड़गे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और उससे जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर बोल रहे थे। इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर टिप्पणी की। इसके जवाब में खड़गे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इस टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। भाजपा नेताओं ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद किसी नेता के दिवंगत परिजनों को विवाद में घसीटना उचित नहीं है।
हालांकि, कांग्रेस ने इस बयान की अलग व्याख्या की है। पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा के अनुसार, सभा में पहले खड़गे के खिलाफ टिप्पणी की गई थी और कांग्रेस अध्यक्ष का जवाब प्रधानमंत्री के वैचारिक समर्थन तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संदर्भ में था। इस तरह दोनों दलों के बीच बयान के आशय और संदर्भ को लेकर भी विवाद सामने आया है।
दिल्ली से पटना तक भाजपा का प्रदर्शन
भाजपा ने 26 अक्टूबर को सभी राज्यों की राजधानियों और प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। दिल्ली में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खड़गे के आवास के निकट प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
पटना में बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जन आक्रोश मार्च निकाला और खड़गे का पुतला जलाया। लखनऊ और जम्मू में भी विरोध प्रदर्शन हुए। बेंगलुरु में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग की। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ नेता से सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा की अपेक्षा की जाती है। पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व से इस बयान पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग भी की।
राजनाथ सिंह ने भी की टिप्पणी की आलोचना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खड़गे की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने बयान को दुखद बताते हुए कांग्रेस पर टिप्पणी का बचाव करने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी समेत भाजपा के अन्य नेताओं ने भी खड़गे और कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर इस तरह की भाषा राजनीतिक संवाद के स्तर पर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने खड़गे से माफी के साथ इस्तीफे की मांग भी उठाई।
कांग्रेस ने किया पलटवार, बयान के संदर्भ पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पटना के कार्यक्रम में खड़गे को पहले उकसाया गया था। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सभा में एक व्यक्ति ने खड़गे के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष ने बात कही।
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी खड़गे का बचाव किया। उनका कहना था कि टिप्पणी को उसके पूरे संदर्भ में समझा जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर चुनिंदा बयानों को मुद्दा बनाने का आरोप लगाया और कहा कि राजनीतिक संवाद में सभी पक्षों के बयानों को समान कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
पटना में शिकायत भी दर्ज
खड़गे की टिप्पणी को लेकर पटना में पुलिस के समक्ष लिखित शिकायत भी दी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के बारे में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच मर्यादा पर बहस
खड़गे की टिप्पणी ने एक बार फिर राजनीतिक विमर्श में भाषा और व्यक्तिगत मर्यादा को लेकर बहस तेज कर दी है। भाजपा इस बयान को प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे कार्यक्रम में हुए घटनाक्रम और वैचारिक संदर्भ से जोड़कर देख रही है। फिलहाल विवाद के केंद्र में तीन सवाल हैं—खड़गे की टिप्पणी का वास्तविक संदर्भ क्या था, सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक आलोचना की भाषा की सीमा कहां होनी चाहिए और क्या इस प्रकरण पर संबंधित नेताओं की ओर से माफी या अन्य कोई औपचारिक कदम उठाया जाएगा। इन सवालों पर दोनों दलों के रुख अलग-अलग हैं और राजनीतिक टकराव जारी है।
मप्र में भी भाजपा नेताओं ने की टिप्पणी की निंदा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खड़गे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को राजनीति में घसीटा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी बयान की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के विपरीत बताया।
