Sonia gandhi book Belonging a journy of love
-बोलीं-मोदी सरकार ने देश, लोकतंत्र और संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचाया
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के भविष्य को लेकर निराशा जताने के बजाय उम्मीद व्यक्त की है।
सोनिया गांधी ने यह बातें अपनी आगामी आत्मकथा Belonging: A Journey of Love के विमोचन से पहले दिए गए साक्षात्कार में कहीं। 7 नवंबर 2026 को प्रकाशित द हिंदू के साथ साक्षात्कार में उन्होंने व्यक्तिगत जीवन, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, आपातकाल, 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने और कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से बात की।
उनकी किताब 10 नवंबर को हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित की जानी है। इस बीच द गार्जियन को दिए एक अलग साक्षात्कार में भी उन्होंने अपने राजनीतिक और पारिवारिक जीवन से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं।
सोनिया गांधी का पूरा इंटरव्यू: सवाल-जवाब में जानिए उनके बड़े खुलासे
- सवाल: आपने अपनी आत्मकथा लिखने का फैसला क्यों किया?
जवाब (सोनिया गांधी): लंबे समय से दूसरे लोग मेरी कहानी लिखते रहे हैं। मैंने और राजीव गांधी ने भी महसूस किया था कि हमारे बारे में लिखी जा रही हर बात का जवाब देना संभव नहीं है। लेकिन एक समय ऐसा आया जब मुझे लगा कि अपनी कहानी खुद बतानी चाहिए। मैं अपनी जिंदगी, अपने रिश्तों, अपने अनुभवों और भारत से जुड़ाव को अपने नजरिये से सामने रखना चाहती थी। - सवाल: इस किताब को लिखने में कितना समय लगा?
जवाब: इस किताब के बारे में सोचने और लिखने की शुरुआत एक दशक से भी पहले हुई थी। हालांकि, मैंने लगभग पांच साल पहले गंभीरता से लिखना शुरू किया। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं थी। कई बार विचार और शब्द सहजता से आते थे, तो कई बार लिखना बेहद मुश्किल हो जाता था। - सवाल: क्या यह किताब केवल आपकी और राजीव गांधी की प्रेम कहानी है?
जवाब: यह राजीव और मेरे प्रेम की कहानी जरूर है, लेकिन केवल इतनी ही नहीं। यह उस परिवार की कहानी भी है, जिससे मैं जुड़ी और उस देश की कहानी है, जिसे मैंने अपना घर बनाया। इसी जुड़ाव ने मुझे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। जब मुझे लगा कि परिवार और कांग्रेस के लोगों के संघर्ष से जुड़े उद्देश्य खतरे में हैं और पार्टी कमजोर हो रही है, तब मैंने आगे आने का फैसला किया। - सवाल: इटली में पली-बढ़ी युवती से भारत की प्रमुख राजनीतिक नेता बनने तक के सफर में क्या बदला?
जवाब: बचपन में सीखे कुछ मूल्य आज भी मेरे भीतर हैं। परिवार और मित्रों के प्रति निष्ठा, दूसरों के प्रति संवेदनशीलता, ईमानदारी, कर्तव्य और जिम्मेदारी का भाव आज भी मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, जीवन के अनुभवों ने मुझे बहुत बदल दिया है। - सवाल: राजीव गांधी से आपकी पहली मुलाकात कैसे हुई थी?
जवाब: 1960 के दशक में कैंब्रिज में पढ़ाई के दौरान राजीव गांधी से मुलाकात हुई थी। उस समय मुझे उनके राजनीतिक परिवार और भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक घराने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। राजीव का व्यक्तित्व, उनका व्यवहार और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता मुझे आकर्षित करती थी। हमारा रिश्ता प्रेम में बदला और बाद में मैंने उनके साथ भारत आने का फैसला किया। - सवाल: इंदिरा गांधी के साथ आपके रिश्ते कैसे थे?
जवाब: शुरुआत में मैं उनसे काफी प्रभावित और कुछ हद तक भयभीत भी रहती थी। सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि बेहद मजबूत और सख्त नेता की थी, लेकिन घर में वह एक सामान्य मां की तरह थीं। वह अपने परिवार की चिंता करती थीं। उनके जीवन में राजनीतिक दबाव बहुत ज्यादा था और उस पद पर रहते हुए उन्हें अकेलेपन का भी सामना करना पड़ता था। - सवाल: क्या इंदिरा गांधी आपातकाल लगाने के फैसले से सहज थीं?
जवाब: सोनिया गांधी ने कहा कि उनका मानना है कि इंदिरा गांधी मूल रूप से लोकतांत्रिक सोच वाली नेता थीं। आपातकाल का फैसला उनके लिए भी सहज नहीं था। उन्हें लगता है कि इस फैसले का बोझ इंदिरा गांधी पर रहा। उन्होंने यह भी माना कि आपातकाल लगाना गलती थी। - सवाल: आपातकाल के फैसले में संजय गांधी की क्या भूमिका थी?
जवाब: सोनिया गांधी के मुताबिक, इस मुद्दे पर परिवार के भीतर भी मतभेद थे। राजीव गांधी चाहते थे कि इंदिरा गांधी अगला चुनाव आने तक इंतजार करें, जबकि संजय गांधी आपातकाल लगाने के पक्ष में थे। एक पारिवारिक चर्चा के दौरान संजय गांधी ने विपक्ष को रोकने की जरूरत बताई थी। सोनिया के अनुसार, संजय गांधी को नियंत्रण में रखा जाता तो आपातकाल के बाद हुए कई नुकसान रोके जा सकते थे। उन्होंने यह भी बताया कि संजय गांधी के अलावा कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी इंदिरा गांधी पर आपातकाल लगाने के लिए दबाव बनाया था। - सवाल: आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को आप किस तरह देखती हैं?
जवाब: सोनिया गांधी ने स्वीकार किया कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकार सीमित किए गए थे और बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हैबियस कॉर्पस का अधिकार भी निलंबित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह सब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया था। उनके अनुसार, आपातकाल समाप्त होने के बाद ही उन्हें उस दौरान हुई घटनाओं की पूरी गंभीरता समझ में आई। आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहा था। - सवाल: 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद आपकी मन:स्थिति क्या थी?
जवाब: सोनिया गांधी ने बताया कि 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी पर गोलियां चलने के बाद वह उनके पास पहुंचीं। उन्होंने इंदिरा गांधी के खून से लथपथ शरीर को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। यह अनुभव उनके जीवन का बेहद दर्दनाक हिस्सा रहा। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद परिवार पर गहरा मानसिक आघात पड़ा। - सवाल: क्या आप राजीव गांधी को राजनीति में आने से रोकना चाहती थीं?
जवाब: हां। सोनिया गांधी ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए कहा गया, तब उन्होंने उन्हें राजनीति में आने से रोकने की कोशिश की थी। वह नहीं चाहती थीं कि परिवार फिर से राजनीतिक जोखिमों और खतरों में पड़े। राजीव गांधी का राजनीति में आना उनके लिए बेहद पीड़ादायक था। - सवाल: क्या आपको राजीव गांधी की हत्या का डर पहले से था?
जवाब: सोनिया गांधी ने बताया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद परिवार में भय का माहौल था। राजीव गांधी की सुरक्षा को लेकर वह हमेशा चिंतित रहती थीं। उन्हें अक्सर लगता था कि अगला निशाना राजीव गांधी हो सकते हैं। बच्चों राहुल और प्रियंका की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी और उनकी सामान्य जिंदगी प्रभावित हुई थी। - सवाल: क्या राजीव गांधी की हत्या के पीछे बड़ी साजिश की पूरी सच्चाई सामने आई?
जवाब: सोनिया गांधी का मानना है कि राजीव गांधी की हत्या के पीछे व्यापक साजिश से जुड़े सभी तथ्य सामने नहीं आए। उन्होंने दावा किया कि हत्या से पहले भारतीय खुफिया एजेंसियों को लिट्टे की ओर से राजीव गांधी को मिल रही धमकियों की जानकारी थी। इसके बावजूद उनकी शीर्ष स्तर की सुरक्षा हटा दी गई थी। उनका कहना है कि अब शायद इस मामले की पूरी सच्चाई कभी सामने नहीं आ पाएगी। - सवाल: राजीव गांधी की हत्या के बाद आपने भारत छोड़कर इटली लौटने के बारे में क्यों नहीं सोचा?
जवाब: सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी बहन ने उन्हें इटली लौटने के लिए कहा था, लेकिन उनके लिए यह संभव नहीं था। भारत उनका घर था और उनके बच्चों का भी घर था। राजीव गांधी के साथ बिताए जीवन और परिवार से जुड़े रिश्तों ने भारत को उनकी पहचान का हिस्सा बना दिया था। - सवाल: नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल को आप किस नजरिये से देखती हैं?
जवाब: सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद भी संस्थाओं को फिर से मजबूत करने में समय लगेगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को गंभीर प्रयास करने होंगे। - सवाल: क्या संसद में विपक्ष को पर्याप्त महत्व मिल रहा है?
जवाब: सोनिया गांधी ने कहा कि पहले सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा, बैठकें और विचार-विमर्श की परंपरा थी। सरकार विपक्ष की बात सुनती थी। लेकिन अब विपक्ष की भूमिका को महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक माहौल को निराशाजनक बताया। - सवाल: क्या कांग्रेस का राजनीतिक भविष्य कमजोर दिखाई देता है?
जवाब: सोनिया गांधी ने कांग्रेस के भविष्य को लेकर निराशा से इनकार किया। उनका कहना है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को मौजूदा सरकार के कार्यकाल में समान अवसर नहीं मिले हैं। उन्होंने चुनाव आयोग, मुख्यधारा के मीडिया, आर्थिक संसाधनों और धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता गांवों और जिलों में संविधान के मूल्यों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर आगे बढ़ रही है और उसकी संभावनाएं बेहतर हो रही हैं।
- सवाल: क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कांग्रेस को कुछ सीखने की जरूरत है?
जवाब: सोनिया गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक और वैचारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से अलग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में भी डॉ. मनमोहन सिंह और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं के उदाहरण हैं, जिन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में राजनीति में सफलता हासिल की। उन्होंने आरएसएस से सीखने की जरूरत से इनकार किया। - सवाल: 2004 में कांग्रेस की जीत के बाद आपने प्रधानमंत्री बनने से इनकार क्यों किया?
जवाब: सोनिया गांधी ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने का विचार उनके मन में पहले से नहीं था। चुनाव से कई महीने पहले जब उनके परिवार के एक सदस्य ने उनसे पूछा था कि कांग्रेस की जीत होने पर क्या वह प्रधानमंत्री बनेंगी, तो उनका जवाब था कि बिल्कुल नहीं। उन्होंने कहा कि 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की जीत के बाद उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को सरकार का नेतृत्व सौंपने का फैसला किया। उनके अनुसार, दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं। मनमोहन सिंह सरकार चलाते थे और वह पार्टी का नेतृत्व करती थीं। उनका यह अनुभव कुल मिलाकर सकारात्मक रहा।
- सवाल: क्या आपको लगता है कि प्रधानमंत्री बनने का फैसला बदलने से कांग्रेस की सरकार का स्वरूप अलग होता?
जवाब: सोनिया गांधी ने कहा कि उन्होंने कभी इस तरह से विचार नहीं किया। उनका मानना था कि सरकार और पार्टी के नेतृत्व की अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं और यह व्यवस्था अच्छी तरह काम कर रही थी। - सवाल: क्या आपने भाजपा और आरएसएस के साथ कभी राजनीतिक समझौता किया?
जवाब: सोनिया गांधी ने कहा कि राजनीति में कई बार समझौते करने की परिस्थितियां बनती हैं, लेकिन कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस के साथ वैचारिक समझौता नहीं किया है और आगे भी ऐसा नहीं करेगी। - सवाल: आपकी आत्मकथा के भारतीय प्रकाशन को लेकर विवाद क्यों हुआ?
जवाब: सोनिया गांधी ने द गार्जियन से बातचीत में कहा कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया सरकार की आलोचना वाले हिस्सों को लेकर सहज नहीं था। उन्होंने कुछ सुझाए गए संपादकीय बदलाव स्वीकार नहीं किए, जिसके बाद प्रकाशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने इसे अपनी किताब की अभिव्यक्ति को सीमित करने की कोशिश के रूप में देखा। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस आरोप से असहमति जताई और कहा कि किताब प्रकाशित नहीं करने के निर्णय के पीछे संपादकीय बदलावों को लेकर लेखक की असहमति वाली व्याख्या सही नहीं है। बाद में हार्पर कॉलिन्स इंडिया ने भारतीय संस्करण प्रकाशित करने की जिम्मेदारी ली।
- सवाल: आत्मकथा में आप पाठकों को क्या बताना चाहती हैं?
जवाब: सोनिया गांधी के मुताबिक, यह किताब उनके जीवन, प्रेम, परिवार, व्यक्तिगत संघर्षों और भारत से उनके जुड़ाव की कहानी है। वह चाहती हैं कि पाठक उनके जीवन को केवल राजनीतिक घटनाओं के माध्यम से नहीं, बल्कि एक इंसान के व्यक्तिगत अनुभवों के नजरिये से भी समझें।
आत्मकथा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
Belonging: A Journey of Love
- लेखिका: सोनिया गांधी
- भारतीय प्रकाशक: हार्पर कॉलिन्स इंडिया
- प्रकाशन की घोषित तारीख: 10 नवंबर 2026
- पृष्ठ संख्या: 544
- विषय: निजी जीवन, राजीव गांधी से प्रेम, परिवार, राजनीति और भारत से जुड़ाव।
राजनीतिक मायने
सोनिया गांधी ने एक साथ अतीत और वर्तमान पर खोली बात
सोनिया गांधी के इन साक्षात्कारों को कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एक तरफ उन्होंने आपातकाल को गलती मानते हुए इंदिरा गांधी के उस फैसले पर अपनी बात रखी, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाए।
राजीव गांधी की हत्या, परिवार के भीतर आपातकाल को लेकर मतभेद और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले पर उनकी टिप्पणियां भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह साक्षात्कार केवल एक आत्मकथा के प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के इतिहास, गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत और मौजूदा भारतीय राजनीति पर सोनिया गांधी का विस्तृत पक्ष सामने रखता है।
