–1,398 KM का होगा नया नेटवर्क, भोपाल से ग्वालियर-मंदसौर समेत ये होंगे 5 रूट
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन की तस्वीर बदलने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार प्रदेश में करीब 63,296 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पांच नए ग्रीनफील्ड हाईवे कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इनकी कुल लंबाई 1,398 किलोमीटर प्रस्तावित है। पांचों कॉरिडोर बनने पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं में भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, जबलपुर-आशापुर, भोपाल-ग्वालियर और कटनी-सिंगरौली कॉरिडोर शामिल हैं। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के संचालक मंडल की 49वीं बैठक में इन पांचों परियोजनाओं की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने और उपयुक्त पाए जाने पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की अनुमति दी गई।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य है: अभी पांचों हाईवे के निर्माण की अंतिम प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति या निर्माण शुरू होने की तारीख घोषित नहीं हुई है। फिलहाल परियोजनाएं सर्वे, फिजिबिलिटी और DPR की तैयारी के चरण में हैं।
1,398 KM के पांच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
सरकार की प्रस्तावित योजना के अनुसार सभी पांचों कॉरिडोर फोरलेन और एक्सेस-कंट्रोल्ड होंगे। इनमें पेव्ड शोल्डर की सुविधा भी प्रस्तावित है।
- क्रम प्रस्तावित हाईवे लंबाई
- 1 भोपाल–मंदसौर 258 किमी
- 2 सागर–सतना 227 किमी
- 3 जबलपुर–आशापुर 358 किमी
- 4 भोपाल–ग्वालियर 320 किमी
- 5 कटनी–सिंगरौली 235 किमी
- कुल 1,398 किमी
- भोपाल–मंदसौर ग्रीनफील्ड हाईवे: 258 किलोमीटर
राजधानी भोपाल को पश्चिमी मध्यप्रदेश के मंदसौर क्षेत्र से जोड़ने वाला यह प्रस्तावित कॉरिडोर मालवा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस मार्ग के विकसित होने से भोपाल और मंदसौर के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे व्यापारिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और यात्रियों को सुविधा मिल सकती है।
वर्तमान स्थिति: इस कॉरिडोर के लिए कंसल्टेंट फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। अलग-अलग संभावित अलाइनमेंट विकल्पों का परीक्षण किया जा रहा है।
- सागर–सतना ग्रीनफील्ड हाईवे: 227 किलोमीटर
बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करने के लिहाज से सागर-सतना कॉरिडोर महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस परियोजना से क्षेत्रीय आवागमन, औद्योगिक गतिविधियों और माल परिवहन को गति मिलने की संभावना है।
वर्तमान स्थिति: इस मार्ग की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके संभावित अलाइनमेंट का परीक्षण जारी है।
- जबलपुर–आशापुर ग्रीनफील्ड हाईवे: 358 किलोमीटर
358 किलोमीटर लंबाई के साथ यह पांचों प्रस्तावित कॉरिडोर में सबसे लंबा होगा।
महाकौशल और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह सड़क परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। बेहतर सड़क नेटवर्क से क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और परिवहन को लाभ मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान स्थिति: इस कॉरिडोर के लिए भी कंसल्टेंट फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। अलग-अलग रूट विकल्पों का परीक्षण किया जा रहा है।
- भोपाल–ग्वालियर ग्रीनफील्ड हाईवे: 320 किलोमीटर
राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बीच 320 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रस्तावित है।
यह मार्ग मध्यप्रदेश के मध्य और उत्तरी हिस्सों के बीच सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की क्षमता रखता है। इसके बनने से यात्रियों को एक नया वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है।
वर्तमान स्थिति: इस कॉरिडोर की DPR तैयार करने के लिए कंसल्टेंट के चयन की निविदा प्रक्रिया चल रही है।
- कटनी–सिंगरौली ग्रीनफील्ड हाईवे: 235 किलोमीटर
कटनी से सिंगरौली के बीच प्रस्तावित 235 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पूर्वी मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है।
सिंगरौली को ऊर्जा और औद्योगिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को फायदा मिलने की संभावना है।
वर्तमान स्थिति: इस परियोजना की DPR तैयार करने के लिए कंसल्टेंट चयन की निविदा प्रक्रिया जारी है।
क्या होता है ग्रीनफील्ड हाईवे?
ग्रीनफील्ड हाईवे ऐसे नए सड़क मार्ग होते हैं, जिन्हें सामान्यतः पहले से मौजूद हाईवे को चौड़ा करने के बजाय नए अलाइनमेंट पर विकसित करने की योजना बनाई जाती है।
इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं होती हैं
- एक्सेस कंट्रोल: निर्धारित स्थानों से ही वाहनों को प्रवेश और निकास की सुविधा।
- फोरलेन सड़क: चार लेन का प्रस्तावित सड़क नेटवर्क।
- पेव्ड शोल्डर: मुख्य सड़क के किनारे पक्के हिस्से की सुविधा।
- नया अलाइनमेंट: जरूरत के अनुसार नए मार्ग का चयन।
- बेहतर कनेक्टिविटी: लंबी दूरी के यातायात और माल परिवहन को सुगम बनाने का उद्देश्य।
ध्यान रहे कि इन परियोजनाओं के अंतिम डिजाइन और सुविधाओं का विवरण DPR में स्पष्ट होगा।
अभी पांचों हाईवे का काम किस चरण में है?
परियोजना की मौजूदा स्थिति को समझना जरूरी है। सभी पांच कॉरिडोर को लेकर एक जैसी प्रगति नहीं हुई है।
- कॉरिडोर मौजूदा स्थिति
- भोपाल–मंदसौर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो रही है
- सागर–सतना फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो रही है
- जबलपुर–आशापुर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो रही है
- भोपाल–ग्वालियर DPR कंसल्टेंट चयन की निविदा प्रक्रिया
- कटनी–सिंगरौली DPR कंसल्टेंट चयन की निविदा प्रक्रिया
पहले तीन कॉरिडोर के लिए संभावित अलाइनमेंट विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है। वहीं शेष दो कॉरिडोर के लिए DPR तैयार करने वाले कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
इसका अर्थ है कि अभी जमीन अधिग्रहण, निर्माण एजेंसी, निर्माण की समयसीमा और हाईवे के अंतिम रूट को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
63,296 करोड़ रुपये कहां खर्च होंगे?
पांचों प्रस्तावित कॉरिडोर की कुल अनुमानित लागत 63,296 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, फिलहाल प्रत्येक कॉरिडोर की अलग-अलग अंतिम लागत, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण का विस्तृत बजट सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
DPR तैयार होने के बाद परियोजना की वास्तविक लागत, निर्माण की तकनीकी जरूरतें और आर्थिक व्यवहार्यता का अधिक स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।
MPRDC की बैठक में हुए 7 अन्य बड़े फैसले
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की 49वीं बैठक में केवल पांच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
- जावरा–नयागांव फोरलेन परियोजना
बीओटी योजना के अंतर्गत जावरा-नयागांव फोरलेन परियोजना में 100 प्रतिशत इक्विटी के विनिवेश की अनुमति दी गई।
- निगम में नए पदों का सृजन
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम में नए पद बनाए जाएंगे:
- मुख्य अभियंता के 2 पद।
- महाप्रबंधक के 3 पद।
- उप महाप्रबंधक के 5 पद।
- विधि सहायक का मानदेय बढ़ेगा
निगम में पदस्थ विधि सहायक के मानदेय में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
- अरेरा हिल्स स्थित भवन का अधिग्रहण
भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित मध्यप्रदेश तिलहन संघ भवन के अधिग्रहण को स्वीकृति दी गई।
- स्वतंत्र संचालक की नियुक्ति
निगम में स्वतंत्र संचालक की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
- सड़क परियोजनाओं का स्वामित्व
ऋण के माध्यम से उन्नयन की जाने वाली राज्य राजमार्ग और अन्य सड़क परियोजनाओं का स्वामित्व सड़क विकास निगम को सौंपने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
- कंबाइन हार्वेस्टर को टोल में छूट
कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को संबंधित टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
राजमार्ग निधि का नाम बदला, अब ‘विकसित मध्यप्रदेश संकल्प पथ’
बैठक में मुख्यमंत्री ने सड़क विकास निगम की प्रस्तावित राजमार्ग निधि का नाम बदलकर ‘विकसित मध्यप्रदेश संकल्प पथ’ करने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन, ग्रामीण विकास, उद्योग विभाग और मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सड़क परियोजनाओं पर काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं में तेजी लाने और उन्हें जल्द पूरा करने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों को बारहमासी सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।
मध्यप्रदेश के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये पांच हाईवे?
इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश के सड़क परिवहन में कई बड़े बदलाव संभव हैं।
- व्यापार को बढ़ावा: प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
- माल परिवहन: कृषि और औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई आसान हो सकती है।
- यात्रा में सुविधा: एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़कें लंबी दूरी के यातायात को अधिक सुगम बना सकती हैं।
- पर्यटन को फायदा: प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवागमन बेहतर हो सकता है।
- रोजगार के अवसर: निर्माण कार्य शुरू होने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
- क्षेत्रीय विकास: सड़क नेटवर्क के विस्तार से नए औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का क्या है लक्ष्य?
मुख्यमंत्री का जोर प्रदेश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक नेटवर्क तैयार करने पर है। इसके तहत स्टेट हाईवे, फोरलेन, सिक्सलेन, आठलेन और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के विकास की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य केवल बड़े शहरों को जोड़ना नहीं, बल्कि गांवों और कस्बों तक बेहतर सड़क सुविधा पहुंचाना भी है।
इन सवालों के जवाब जानना जरूरी
सवाल 1: क्या पांचों हाईवे को निर्माण की अंतिम मंजूरी मिल गई है?
जवाब: नहीं। अभी फिजिबिलिटी रिपोर्ट और DPR की तैयारी को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली है। निर्माण की अंतिम स्वीकृति अलग प्रक्रिया है।
सवाल 2: पांचों हाईवे की कुल लंबाई कितनी होगी?
जवाब: प्रस्तावित कुल लंबाई 1,398 किलोमीटर है।
सवाल 3: इनकी अनुमानित लागत कितनी है?
जवाब: लगभग 63,296 करोड़ रुपये।
सवाल 4: क्या ये सभी एक्सप्रेस-वे होंगे?
जवाब: इन्हें फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इन्हें अभी चालू एक्सप्रेस-वे नहीं कहा जा सकता।
सवाल 5: निर्माण कब शुरू होगा?
जवाब: अभी निर्माण शुरू होने की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। इसके लिए सर्वे, DPR, स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
