उज्जैन। वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ को लेकर धार्मिक नगरी उज्जैन में व्यापक स्तर पर परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े सुधार हो रहे हैं। इनमें नई सड़कों से लेकर एक्सप्रेसवे तक निर्माण शामिल है। इसके लिए कई नियमों में बदलाव भी किए जा रहे हैं। खासकर रिहायशी और कॉमर्शियल जगहों का विस्तार हो रहा है। शहर के विकास के साथ-साथ विवाद भी बढ़ते जा रहे हैं। स्थाई विकास परियोजनाओं को लेकर पहले से ही उज्जैन में भारतीय किसान संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। इसके बाद उज्जैन में लैंड पूलिंग को वापस लेने पड़ा था। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने उज्जैन को लेकर एक बड़ा दावा किया है। इस खुलासे के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर कांग्रेस ने हमला बोला है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रॉपर्टी का नया बाजार बना उज्जैन
महालोक बनने के बाद से ही उज्जैन मध्य प्रदेश में सबसे अधिक उभरता हुआ शहर है। हर साल पांच करोड़ से अधिक लोग यहां आ रहे हैं। इसके बाद उज्जैन में रियल एस्टेट और हॉस्पिटलिटी सेक्टर में तेजी से विकास हुआ है। बाहर के निवेशक भी उज्जैन आकर अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि प्रॉपर्टी क्षेत्र मुख्यमंत्री मोहन यादव की फैमिली ने भी बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इनमें उनके परिवार के करीबी सदस्य, भाई-बहन, चचेरे भाई-बहन शामिल हैं।
168 एकड़ जमीन खरीदने का आरोप
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में अपनी पड़ताल के आधार पर यह दावा किया है कि 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उनके परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने उन इलाकों में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं। यह प्लॉट करीब 168 एकड़ हैं। शहर में हो रहे विकास कार्यों का फायदा सबसे अधिक इन्हें पहुंचा है। इनमें से कुछ प्लॉट बेचे भी गए हैं। हालांकि इस पड़ताल में 2026 में हुई खरीद बिक्री शामिल नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, ये प्लॉट सीएम डॉ. मोहन यादव की पत्नी सीमा, बेटे वैभव की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाइयों गोविंद और नीलेश यादव ने खरीदे थे।
जीतू पटवारी ने जमीन खरीदी पर किया हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि बीजेपी राम मंदिर के चंदे की कथित चोरी और महाकाल की जमीन से जुड़े मामले में शामिल है। मोदी जी ने खुली छूट दे रखी है। पटवारी का आरोप है कि 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव मुख्यमंत्री बने। 2021 और 2023 के बीच, उनके परिवार के करीबी रिश्तेदारों के पास कथित तौर पर लगभग 194 प्लॉट में फैली करीब 253 एकड़ जमीन आ गई। इसका मतलब है कि 2021 और 13 दिसंबर 2023 को उनके मुख्यमंत्री बनने के समय के बीच जमीन की होल्डिंग में भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैसे हुआ? कुल जमीन के मालिकाना हक की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट में फैली 335 एकड़ जमीन है।
कब-कब खरीदे गए प्लॉट
2024-25 के बीच में 137 प्लॉट खरीदे गए जो 168 एकड़ है
2021-2023 के बीच में 57 प्लॉट खरीदे गए, जो 86 एकड़ है
सीएम की फैमिली के पास कुल 245 प्लॉट हैं, जो कुल मिलाकर 335 एकड़ हैं
परिवार के अलावे सीएम की पत्नी, बेटे और बहू के नाम पर भी जमीनें हैं
आरोप है कि इनमें से ज्यादातर प्लॉट या तो उज्जैन और उनके आस-पास घोषित नई सड़क परियोजनाओं के पास हैं या फिर उन इलाकों में हैं, जिन्हें उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत खेती वाली जमीन से रिहायशी या कॉमर्शियल जमीन में बदलने के लिए चिह्नित किया गया है।
2023 में जारी हुआ था उज्जैन का मास्टर प्लान
उज्जैन मास्टर प्लान 2035 को मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनने से पहले मई 2023 में जारी किया गया था। सीएम बनने से पहले यादव उज्जैन में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़े रहे हैं। 2004 से 2010 के दौरान वह उज्जैन डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन रहे। 2011-13 के बीच एमपी टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष रहे। 2013 से उज्जैन दक्षिण से वह विधायक हैं। मोहन यादव के सीएम बनने के बाद राज्य सरकार ने इन्हीं इलाकों में कई नए रोड लिंक और हाईवे बनाने की घोषणा की। ऐसे में इन इलाकों में जमीन की कीमतें आसमान छूने लगी। इसकी वजह से शुरुआती निवेश करने वाले लोगों को फायदे हो गए। अखबार की रिपोर्ट में कथित रूप से दावा किया गया है कि मोहन यादव के सीएम बनने के बाद इनके परिवार ने जमीन की खरीद बढ़ा दी है। इसमें सीएम मोहन यादव के बेटे वैभव और बहन कलावती भी शामिल हैं। इनके पास उज्जैन के आसपास करीब 108 प्लॉट थे। 85 एकड़ जमीन तब खरीदी गई थी, जब मोहन यादव शिक्षा मंत्री थे।
सीएम बनने के बाद परिवार ने 137 प्लॉट खरीदे
दिसंबर 2023 में इनके सीएम बनने के बाद परिवार ने दिसंबर 2025 तक, उनके परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं। कुल मिलाकर 168 एकड़ से ज्यादा जमीन है।
लैंड पूलिंग विरोध की बीच जमीन खरीदने का आरोप
वहीं, सिंहस्थ कुंभ के लिए पक्का इंफ्रास्ट्रक्चर का विरोध हो रहा था। स्थानीय स्तर पर किसान संगठन लगातार लैंड पूलिंग के खिलाफ थे। इस दौरान सीएम की फैमिली और उनकी कंपनियों ने कम से कम 62 प्लॉट खरीदे हैं। यह करीब 92 एकड़ है। 2023 के चुनावी हलफनामे के अनुसार सीएम मोहन यादव के पास करीब 17 एकड़ जमीन थी। इसमें चार एकड़ जमीन विरासत में मिली थी और 13 एकड़ जमीन 1998 में खरीदी के तौर पर दिखाया गया था।
उनकी पत्नी सीमा यादव के पास सीधेतौर पर कम से कम 10.6 एकड़ जमीन है, जिसे सीएम मोहन यादव ने अपनी संपत्ति के ब्यौरे में दिखाया था। सीएम और उनकी पत्नी के पास सिद्धि विनायक डेवकॉन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 39.5 एकड़ जमीन और थी। यह एक पारिवारिक कंपनी है, जिसमें कुल 73 फीसदी हिस्सेदारी है। इसमें से 12 एकड़ जमीन सितंबर 2024 में चचेरे भाई नीलेश यादव को बेची गई। वहीं, सिद्धि विनायक डेवकॉन ने 2024-25 के दौरान कम से कम तीन प्लॉट खरीदे।
विकास परियोजनाओं के आसपास 111 एकड़ जमीन
वहीं, मोहन यादव के सीएम बनने के बाद उनके परिवार ने 168 एकड़ जमीन खरीदी है, उनमें से 111 एकड़ जमीन उज्जैन और उसके आसपास घोषित सड़क विकास परियोजनाओं के पास हैं। इनमें गरोठ, झालावाड़, नागदा, बडऩगर, इंदौर और भोपाल से जुड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं कि उज्जैन नगर निगम पर दबाव डालकर मास्टर प्लान में बदलाव करवाया गया है।
सीएम के परिवार से हैं, इसलिए बंद कर दें कारोबार
सीएम के चचेरे भाइयों की ओर से इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अनंत यादव ने कहा कि हमारा परिवार 2010 से रियल एस्टेट के कारोबार में है, जब मेरे पिता ने 100 बीघा जमीन पर रियल एस्टेट का प्रोजेक्ट डेवलप किया था। मेरे चाचा के कई हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं। हमें निजी व्यक्ति के तौर पर जमीन खरीदने और बेचने का पूरा अधिकार है। अनंत यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, क्या हमें सिर्फ इसलिए अपना काम बंद कर देना चाहिए क्योंकि मुख्यमंत्री हमारे परिवार से हैं।
कांग्रेस हमलावर, कहा—मप्र के नए जमींदार से मिलिए
इंडियान एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट के आधार कांग्रेस सीएम मोहन यादव पर हमलावर है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, बीजेपी की मध्य प्रदेश की डबल इंजन की सरकार में लूट का इंजन तेज रफ्तार से चल रहा है। खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री लूट के कर्ताधर्ता बने हुए हैं। चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ खबर की खेती एमपी से गए कृषि मंत्री ने ही करवाई है। आपसी लड़ाई कुर्सी। वहीं कांग्रेस नेता श्रीनिवास बी ने कहा कि मप्र के नए जमींदार से मिलिए। इसके साथ ही कांग्रेस ने सवाल किया है कि उज्जैन में विकास के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने बेशकीमती जमीनें खरीदी।
