-भोपाल में कहा-स्वयंसेवक राष्ट्रभक्त हों, समाज की सेवा करें, बाकी लोग देखते रहें, ऐसा नहीं
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को राजधानी में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित एकत्रीकरण में जातिवाद और छुआछूत को हिंदू समाज पर कलंक बताया। उन्होंने कहा कि समाज की सेवा और राष्ट्रभक्ति केवल स्वयंसेवकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ‘स्वयंसेवक राष्ट्रभक्त हों, समाज की सेवा करें, बाकी लोग देखते रहें, ऐसा तो है नहीं।Ó होसबाले ने कहा कि संकट के समय समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए और देश व समाज के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
लाल परेड ग्राउंड में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित स्वयंसेवक एकत्रीकरण में होसबाले ने कहा कि जाति के नाम पर होने वाला दुर्व्यवहार समाज को कमजोर करता है। इसे केवल कानून, किसी अवतार या उपदेश से खत्म नहीं किया जा सकता। अपने घर और व्यवहार से इसकी शुरुआत करनी होगी। होसबाले ने कहा कि संकल्प लेना होगा कि हम जातिभेद नहीं करेंगे और छुआछूत का नाम-निशान नहीं रहेगा। समाज के सामने आने वाले सवाल किसी एक वर्ग या बिरादरी के नहीं, बल्कि सभी के हैं। जाति, पंथ, भाषा और प्रांत के आधार पर खुद को अलग मानने से संगठन की शक्ति कमजोर होती है। सभी को मिलकर समाज को जागृत और संगठित करना होगा।
होसबाले ने कहा कि जागृत और संगठित समाज ही देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभा सकता है। समाज के अलग-अलग वर्गों और बिरादरियों के नेतृत्वकर्ताओं को साथ आकर यह समझना होगा कि समाज के सामने आने वाले प्रश्न सभी के हैं। उन्होंने संगठन की ताकत समझाने के लिए कहा कि चार उंगलियां अलग-अलग कमजोर होती हैं, लेकिन मुट्टी बनने पर उनमें ताकत आ जाती है। समाज को भी इसी तरह संगठित होकर काम करना होगा।
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि देशभक्ति केवल 26 जनवरी जैसे किसी एक दिन का भाव नहीं, बल्कि 24 घंटे का भाव होना चाहिए। हर नागरिक को सोचना चाहिए कि वह अपने गांव, मोहल्ले और समाज के लिए राष्ट्रहित में क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि गांव, मोहल्ले और बस्ती में निस्वार्थ भाव से प्रतिदिन एक घंटा साथ रहकर समाज को संगठित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। शाखाएं व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करने का काम करती हैं।
पर्यावरण संरक्षण भी व्यवहार में उतारना होगा
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मंच से प्रस्ताव पारित करने मात्र से पर्यावरण की रक्षा नहीं होगी। घर, स्कूल, कार्यस्थल, बाजार, गली और बस्ती में पर्यावरण के प्रति जागरूक रहकर काम करना होगा। पौधे लगाने के साथ ऊर्जा का उपयोग कम करना और नदियों को स्वच्छ रखना भी जिम्मेदारी है।
समाज की सेवा में सभी की भागीदारी जरूरी
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने असम में बाढ़ के दौरान सेवा भारती के स्वयंसेवकों के राहत कार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि इस बार समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग, नौजवान और कॉलेज विद्यार्थी भी प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए। केवल संघ के स्वयंसेवक ही सेवा करेंगे, ऐसा नहीं है, संकट के समय समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव और बस्ती के विकास की जिम्मेदारी केवल शासन-प्रशासन की नहीं है। वहां रहने वाले हर व्यक्ति का भी दायित्व है। नई पीढ़ी को रामायण, महाभारत, संतों की वाणी और गुरुओं के उपदेशों से संस्कार देने की जरूरत है।
भारत हर संकट के बाद उठकर आया
उन्होंने ने कहा कि भारत की 5 हजार वर्षों की सभ्यता की यात्रा में संकट और संघर्ष आते रहे, लेकिन देश हर संकट के बाद उठकर खड़ा हुआ। समस्याएं आना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनका सामना करने का सामर्थ्य समाज में होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष और गुलामी के दौरान समाज में कई कुरीतियां और आपसी राग-द्वेष आए। लोगों ने राष्ट्रभाव और समाज के प्रति अपने कर्तव्य को भुला दिया। संघ की स्थापना के समय डॉ. हेडगेवार ने इसी सामाजिक शक्ति को जगाने का विचार रखा था। होसबाले ने कहा कि भारत कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और दुनिया में उसके प्रति सम्मान बढ़ रहा है। संघ जिस लक्ष्य को लेकर काम कर रहा है, उसका कोई अंत नहीं है।
