हेल्थ डेस्क। हालिया वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, मस्तिष्क में मौजूद कुछ “छिपी हुई” कोशिकाएं और उनकी गतिविधियां ब्रेन कैंसर (विशेष रूप से ग्लियोब्लास्टोमा) को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि कैंसर कोशिकाएं अकेले नहीं बढ़तीं, बल्कि वे मस्तिष्क की सामान्य कोशिकाओं को अपने पक्ष में कर लेती हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुख्य कारण और तरीके
ओलिगोडेंड्रोसाइट्स (Oligodendrocytes) का व्यवहार बदलना
ये कोशिकाएं सामान्य तौर पर तंत्रिका तंतुओं (nerve fibers) की रक्षा करती हैं। हालांकि, शोध में पाया गया है कि ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं के साथ संचार (signaling) शुरू कर देती हैं, जिससे ट्यूमर को जीवित रहने और फैलने में मदद मिलती है। ScienceDaily की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संचार को रोकने से ट्यूमर की वृद्धि को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली से छिपना
कैंसर कोशिकाएं मस्तिष्क की रक्षा करने वाली माइक्रोग्लिया (Microglia) कोशिकाओं से बचने के लिए विशेष प्रोटीन का उपयोग करती हैं। ये प्रोटीन माइक्रोग्लिया को “मुझे मत खाओ” (don’t eat me) का संकेत देते हैं, जिससे ये “बीज कोशिकाएं” नष्ट होने के बजाय मस्तिष्क में अपनी जगह बना लेती हैं। Nagoya University के अध्ययन ने इस प्रक्रिया को पहली बार लाइव कैप्चर किया है।
न्यूरोप्लास्टिसिटी को “हाईजैक” करना
ग्लियोब्लास्टोमा जैसे घातक ट्यूमर मस्तिष्क की सीखने और बदलने की क्षमता (न्यूरोप्लास्टिसिटी) का फायदा उठाते हैं। वे मस्तिष्क के विकास के दौरान उपयोग होने वाले रास्तों को अपने विस्तार के लिए इस्तेमाल करते हैं। Stanford Medicine के अनुसार, यह खोज “कैंसर न्यूरोसाइंस” नामक एक नई शाखा को जन्म दे रही है।
सुप्त (Dormant) कोशिकाएं
कैंसर की कुछ कोशिकाएं लंबे समय तक शांत या “सोती” रहती हैं और उपचार (जैसे कीमोथेरेपी) के बाद फिर से सक्रिय हो सकती हैं, जिससे कैंसर दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है। Cancer Center के अनुसार, ये कोशिकाएं उपचार के दौरान छिपी रहती हैं और बाद में ट्यूमर को फिर से बढ़ा सकती हैं। इन छिपी हुई कोशिकाओं और उनके जटिल नेटवर्क को समझना भविष्य में ब्रेन कैंसर के अधिक प्रभावी इलाज और दवाओं के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ब्रेन कैंसर
ब्रेन कैंसर (मस्तिष्क कैंसर) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं असामान्य और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, जिससे एक गांठ या ट्यूमर बन जाता है। मस्तिष्क के भीतर शुरू होने वाले ट्यूमर को प्राइमरी और शरीर के अन्य हिस्सों से फैलने वाले ट्यूमर को सेकेंडरी या मेटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है।
ब्रेन कैंसर के लक्षण, कारण
प्रमुख लक्षण (Symptoms)
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इसके आकार और मस्तिष्क में इसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं।
लगातार सिरदर्द: विशेष रूप से सुबह के समय तेज दर्द जो समय के साथ गंभीर होता जाता है।
दौरे (Seizures): अचानक झटके आना या बेहोश होना, खासकर यदि पहले कभी दौरे न पड़े हों।
मतली और उल्टी: बिना किसी स्पष्ट कारण के उबकाई आना।
दृष्टि और सुनने में समस्या: धुंधला दिखना, दोहरा दिखना या कानों में घंटी बजना।
व्यवहार में बदलाव: व्यक्तित्व में अचानक बदलाव, भ्रम, या याददाश्त कम होना।
कमजोरी: शरीर के एक हिस्से या हाथ-पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना।
कारण और जोखिम कारक (Causes & Risks)
ब्रेन कैंसर का कोई एक निश्चित कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ जोखिम कारक इसे बढ़ा सकते हैं।
विकिरण (Radiation): एक्स-रे या पुरानी रेडियोथेरेपी के अत्यधिक संपर्क में आना।
आनुवंशिकता (Genetics): परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास या कुछ आनुवंशिक विकार।
कमजोर इम्यून सिस्टम: एचआईवी (HIV) जैसी बीमारियों के कारण शरीर की रक्षा प्रणाली कमजोर होना।
उम्र: हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ जाता है।
निदान और जांच (Diagnosis)
यदि डॉक्टर को संदेह होता है, तो वे निम्नलिखित परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं।
एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन: मस्तिष्क की विस्तृत तस्वीरें लेने के लिए।
बायोप्सी (Biopsy): ट्यूमर का एक छोटा नमूना लेकर प्रयोगशाला में जांच करना।
पीईटी स्कैन (PET Scan): कैंसर कोशिकाओं की सक्रियता देखने के लिए।
उपचार के विकल्प (Treatment)
उपचार योजना ट्यूमर के प्रकार और स्थान पर आधारित होती है।
सर्जरी: जितना संभव हो सके ट्यूमर को सुरक्षित रूप से बाहर निकालना।
रेडियोथेरेपी: उच्च-ऊर्जा किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना।
कीमोथेरेपी: दवाओं के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को मारना।
टारगेटेड थेरेपी: विशिष्ट असामान्यताओं को लक्षित करने वाली आधुनिक दवाएं।
