स्कूलों के लिए ₹3,000 करोड़ स्वीकृत
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार और शिक्षा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के लिए नई कंपनी के गठन, स्कूलों में परिवहन व्यवस्था मजबूत करने और शासकीय शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए राशि स्वीकृत करने के निर्णय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद मीडिया को फैसलों की जानकारी दी।
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए बनेगी कंपनी
कैबिनेट ने प्रदेश के तीन प्रमुख आर्थिक केंद्रों जबलपुर, भोपाल और इंदौर को औद्योगिक कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ने की योजना के क्रियान्वयन के लिए नई कंपनी बनाने को मंजूरी दी है। इसका नाम जबलपुर इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड होगा। कंपनी पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में रहेगी और सरकार इसके लिए शुरुआती तौर पर ₹100 करोड़ की पूंजी उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके जरिए संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। कॉरिडोर के अंतर्गत योजनाबद्ध औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे, जहां उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य
परियोजना के पहले चरण में लगभग 3,000 से 10,000 एकड़ भूमि विकसित करने की योजना है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना जताई गई है। इससे करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। ये लक्ष्य और अनुमान हैं, सुनिश्चित निवेश या सृजित हो चुके रोजगार के आंकड़े नहीं।
योजना से जबलपुर क्षेत्र में इंजीनियरिंग, विनिर्माण और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी इकाइयों, नरसिंहपुर और रायसेन में खाद्य प्रसंस्करण व वेयरहाउसिंग, भोपाल में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इंदौर में उन्नत विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं। कंपनी के गठन के 30 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी करने और छह महीने में कॉरिडोर की जीआईएस मैपिंग तथा लैंड बैंक तैयार करने का कार्यक्रम भी रिपोर्ट किया गया है।
स्कूलों में परिवहन व्यवस्था के लिए 241 करोड़
कैबिनेट ने विद्यालयों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग 241 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बसों के संचालन और रखरखाव में जिलों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी जिला स्तर पर कलेक्टरों को सौंपी जाएगी।
इस व्यवस्था में स्थानीय परिस्थितियों और परिवहन दरों के अंतर के अनुसार बसों का संचालन तथा रखरखाव किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों के साथ ओबीसी और अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी विद्यालय तक आने-जाने की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 3,000 करोड़
स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में कैबिनेट ने लगभग 3,000 करोड़ की राशि स्वीकृत करने की जानकारी दी। इस राशि से सांदीपनि विद्यालयों के साथ शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, आवासीय संस्थानों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के विकास एवं उन्नयन की योजना है। इसमें विधायकों और सांसदों सहित विभिन्न मदों से उपलब्ध संसाधनों को भी जोड़कर शैक्षणिक संस्थानों की सुविधाएं बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
औद्योगिक विकास और शिक्षा पर सरकार का जोर
15 अक्टूबर की बैठक के फैसलों में एक ओर औद्योगिक कॉरिडोर के माध्यम से निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में परिवहन सुविधा और शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना सामने आई है। औद्योगिक कॉरिडोर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीन, आधारभूत सुविधाओं, निवेशकों की भागीदारी और परियोजना क्रियान्वयन से जुड़े अगले चरण कितनी तेजी से पूरे होते हैं। इसी तरह शिक्षा संबंधी स्वीकृतियों का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी संचालन और निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
