–28 से 30 अक्टूबर तक 230 विधायकों को दिया जाएगा NeVA का प्रशिक्षण
-दिसंबर के शीतकालीन सत्र से कागजरहित कार्यवाही की तैयारी
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली को डिजिटल बनाने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। विधानसभा की कार्यवाही को कागजरहित बनाने के लिए सभी 230 विधायकों को नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 28, 29 और 30 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। योजना के तहत दिसंबर में प्रस्तावित शीतकालीन सत्र से विधानसभा के कामकाज को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की तैयारी है। इससे विधायकों को प्रश्न लगाने, सूचनाएं देने और सदन से संबंधित दस्तावेजों तक ऑनलाइन पहुंचने की सुविधा मिलेगी।
तीन दिन में सीखेंगे डिजिटल कामकाज
विधानसभा सचिवालय की तैयारियों के अनुसार, विधायकों को डिजिटल प्रणाली से परिचित कराने के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सदस्यों को पांच समूहों में बांटने की योजना है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें NeVA एप्लीकेशन के उपयोग और सदन से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी।
इस प्रणाली का उद्देश्य विधायी कामकाज में कागजों पर निर्भरता कम करना और जरूरी सूचनाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना है। विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था के संचालन के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रश्न, प्रस्ताव और विधेयक होंगे ऑनलाइन
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद विधायक सदन से संबंधित कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे। इनमें तारांकित और अतारांकित प्रश्न, ध्यानाकर्षण सूचनाएं, स्थगन प्रस्ताव, संकल्प, याचिकाएं और अशासकीय विधेयक प्रस्तुत करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
विधायक अपने डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सदन की कार्यसूची, विभागीय जवाब, विधेयकों और अन्य जरूरी दस्तावेजों को देख सकेंगे। इससे किसी विषय पर चर्चा की तैयारी करने और पुराने प्रश्नों एवं जवाबों को तलाशने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
टैबलेट पर उपलब्ध होंगे सदन के दस्तावेज
डिजिटल विधानसभा की व्यवस्था में टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके माध्यम से विधायकों को सदन के कामकाज से संबंधित दस्तावेज एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे कागजी प्रश्नोत्तर पुस्तिकाओं, कार्यसूची और अन्य दस्तावेजों के मुद्रण एवं वितरण की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, पूरी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तकनीकी सुविधाओं, बिजली की निर्बाध उपलब्धता, डिजिटल रिकॉर्ड की उपलब्धता और सदस्यों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।
सरकारी खर्च और कागज की खपत में कमी की उम्मीद
विधानसभा में प्रत्येक सत्र के दौरान प्रश्नों, जवाबों, विधेयकों, प्रस्तावों और कार्यसूची से जुड़े बड़ी संख्या में दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। इनके मुद्रण, वितरण और सुरक्षित रखरखाव पर संसाधनों की जरूरत होती है। डिजिटल प्रणाली लागू होने से कागज की खपत और मुद्रण संबंधी खर्च में कमी आने की संभावना है।
इसके अलावा, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल माध्यम से खोजना और जरूरत के समय प्राप्त करना भी आसान हो सकता है। इससे विधानसभा सचिवालय के कामकाज में समय की बचत और दस्तावेजों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।
जनता को भी मिल सकता है लाभ
डिजिटल विधानसभा का एक महत्वपूर्ण पहलू आम नागरिकों तक विधायी जानकारी की पहुंच बढ़ाना है। यदि प्रश्नों, विभागीय जवाबों और सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो नागरिक अपने क्षेत्र के विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों और उन पर सरकार की प्रतिक्रिया को आसानी से देख सकेंगे। हालांकि, जनता को मिलने वाली सुविधा इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन-कौन से रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी व्यापक होती है।
राष्ट्रीय ई-विधान परियोजना से जुड़ेगा कामकाज
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित की गई व्यवस्था है। इसका उद्देश्य देश की विधानसभाओं और विधान परिषदों के कामकाज को डिजिटल मंच पर लाना है। मध्यप्रदेश भी इस राष्ट्रीय परियोजना से जुड़ा हुआ है।
विधायकों के प्रशिक्षण और शीतकालीन सत्र से डिजिटल कामकाज शुरू करने की तैयारी के साथ प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। अब इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण के बाद विधायक और विधानसभा सचिवालय डिजिटल प्रणाली का नियमित उपयोग कितनी प्रभावी ढंग से कर पाते हैं।
क्या है नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA)?
NeVA यानी National e-Vidhan Application यह भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत संसदीय कार्य मंत्रालय की एक परियोजना है। इसका उद्देश्य राज्य विधानसभाओं और विधान परिषदों के कामकाज को डिजिटल मंच पर लाना, कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना और विधायी सूचनाओं के आदान-प्रदान को आसान बनाना है। इस परियोजना की अवधारणा “एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन” है। इसके तहत विधायी कामकाज के लिए एकीकृत डिजिटल प्रणाली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। राज्यों की जरूरत के अनुसार इसमें आवश्यक बदलाव भी किए जा सकते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा के आधिकारिक NeVA पोर्टल पर सदन की कार्यवाही, प्रश्न, विधायी कार्य, समितियों, सदस्यों, डिजिटल पुस्तकालय और वाद-विवाद से संबंधित अनुभाग उपलब्ध हैं।
विधायकों के कौन-कौन से काम होंगे ऑनलाइन?
NeVA लागू होने पर विधायकों के लिए सदन से संबंधित कई प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से करने की व्यवस्था होगी।
- प्रश्न लगाने की प्रक्रिया
विधायक तारांकित और अतारांकित प्रश्न ऑनलाइन भेज सकेंगे। इससे विभागों से जानकारी मांगने और प्राप्त उत्तरों का रिकॉर्ड रखने में सुविधा होगी।
- ध्यानाकर्षण और स्थगन संबंधी सूचनाएं
सदन में महत्वपूर्ण विषय उठाने के लिए संबंधित सूचनाएं और प्रस्ताव डिजिटल माध्यम से भेजने की व्यवस्था की जा सकेगी।
- संकल्प, याचिकाएं और विधेयक
संकल्प, याचिकाएं और गैर-सरकारी विधेयकों से जुड़ी प्रस्तुतियों को डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ने की तैयारी है।
- कार्यसूची और दस्तावेजों तक पहुंच
सदन की कार्यसूची, प्रश्नों के उत्तर, विधेयक और अन्य जरूरी दस्तावेज डिजिटल उपकरणों पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
सिर्फ विधायक नहीं, विभागीय अधिकारी भी होंगे डिजिटल व्यवस्था से जुड़ेंगे
डिजिटल विधानसभा तभी प्रभावी होगी, जब विधायकों के साथ सरकार के विभाग भी ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाएंगे। विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के जवाब तैयार करने, संबंधित दस्तावेज भेजने और समयसीमा में उत्तर उपलब्ध कराने में विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विधायकों के प्रशिक्षण के बाद मंत्रियों के कार्यालयों से जुड़े कर्मचारियों और विभागीय नोडल अधिकारियों को भी प्रशिक्षण देने की तैयारी है। विभागों के लिए 3 नवंबर को अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी खबर है।
इससे प्रश्नों और सूचनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड रखने, संबंधित विभाग तक उन्हें पहुंचाने और जवाबों की स्थिति पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इससे जवाब अपने-आप समय पर मिलेंगे, इसकी गारंटी नहीं है; विभागीय जिम्मेदारी और निर्धारित समयसीमा पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेंगी।
परियोजना पर कितना खर्च होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में NeVA परियोजना के क्रियान्वयन के लिए लगभग 23 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत होने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में विधानसभा की कार्यवाही, प्रश्नोत्तर और अन्य दस्तावेजों को डिजिटल बनाने के लिए टैबलेट तथा तकनीकी सुविधाओं का भी उल्लेख है।
डिजिटल विधानसभा से क्या होंगे फायदे?
- कागज और छपाई में कमी
- प्रश्नोत्तर, कार्यसूची और दस्तावेजों की बड़ी संख्या में प्रतियां छापने की जरूरत घट सकती है।
- पुराने रिकॉर्ड तक आसान पहुंच
- प्रश्नों, उत्तरों और पुराने विधायी दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से तलाशना आसान हो सकता है।
- विधायकों और विभागों में बेहतर समन्वय
- सूचनाओं और दस्तावेजों का इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान तेज और व्यवस्थित हो सकता है।
- जनता को जानकारी उपलब्ध कराने में सुविधा
- सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के माध्यम से नागरिक सदन की कार्यवाही और विधायी गतिविधियों को देख सकेंगे।
- ये परियोजना के संभावित लाभ हैं। वास्तविक बचत और कार्यक्षमता में सुधार का आकलन क्रियान्वयन के बाद ही किया जा सकेगा।
क्या आम जनता भी विधानसभा की कार्यवाही देख सकेगी?
हां, सार्वजनिक पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड नागरिक देख सकते हैं। NeVA के आधिकारिक FAQ में सदन में रखे गए दस्तावेजों को विधानसभा, सत्र और तारीख के आधार पर देखने की प्रक्रिया बताई गई है। पोर्टल पर प्रश्नों और सूचनाओं से संबंधित सार्वजनिक तथा सुरक्षित लॉगिन की अलग व्यवस्थाएं भी हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक आंतरिक दस्तावेज या विधायक की हर सूचना सार्वजनिक होगी। उपलब्धता दस्तावेज की प्रकृति और पोर्टल पर उसके प्रकाशन पर निर्भर करेगी।
देश में NeVA की स्थिति क्या है?
केंद्र सरकार के आधिकारिक NeVA पोर्टल पर राज्यों की स्थिति अलग-अलग श्रेणियों में दिखाई गई है। इनमें कुछ विधानसभाएं डिजिटल सदन के रूप में सक्रिय हैं, जबकि मध्यप्रदेश को पोर्टल पर MoU पर हस्ताक्षर करने वाले राज्यों की श्रेणी में दिखाया गया है। संसदीय कार्य मंत्रालय की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट में भी मध्यप्रदेश के लिए परियोजना संबंधी समझौते और स्वीकृति का उल्लेख मिलता है। इसलिए मध्यप्रदेश में परियोजना की तैयारी और प्रशिक्षण को पूर्ण डिजिटल क्रियान्वयन से अलग समझना जरूरी है। दिसंबर 2026 के सत्र से कागजरहित कामकाज शुरू करने की बात फिलहाल प्रकाशित रिपोर्टों में बताई गई योजना है; इसे शुरू हो चुकी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए।
डिजिटल बदलाव की राह में क्या होंगी चुनौतियां?
- सभी विधायकों और कर्मचारियों को नई प्रणाली का नियमित अभ्यास कराना।
- तकनीकी खराबी या इंटरनेट बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था रखना।
- सरकारी दस्तावेजों और लॉगिन की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- विभागों से समय पर और सही जानकारी प्राप्त करना।
- डिजिटल रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना और सार्वजनिक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना।
- कागजरहित व्यवस्था का लाभ तभी पूरी तरह मिलेगा, जब तकनीकी प्रणाली के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी सुचारु रूप से काम करेंगी।
मध्यप्रदेश विधानसभा में NeVA लागू करने की तैयारी प्रदेश के विधायी कामकाज को तकनीक से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। सभी 230 विधायकों के प्रशिक्षण, विभागीय अधिकारियों की भागीदारी और दिसंबर के शीतकालीन सत्र से डिजिटल कामकाज शुरू करने की योजना इस दिशा में अगले कदम हैं।
