-रामपुर बघेलान एसडीएम को 60 दिन में मुआवजा दिलाने का आदेश
-बगहाई गांव का मामला, कलेक्टर कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पीड़ित ने ली थी हाईकोर्ट की शरण
-जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनाया फैसला
भोपाल/जबलपुर। सतना जिले की रामपुर बघेलान स्थित प्रिज्म जॉनसन सीमेंट लिमिटेड प्रबंधन की मनमानी और किसानों के शोषण के खिलाफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन को गैरकानूनी तरीके से जबरन किसान की जमीन पर अवैध उत्खनन का दोषी करार दिया है। हाईकोर्ट ने मामले में पीड़ित किसान को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। अदालत ने एसडीएम रामपुर बाघेलान को आदेशित किया है कि 60 दिनों के भीतर मुआवजा निर्धारित कर पीड़ित किसान को मुआवजा का भगुतान कराएं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवके रुसिया एवं न्यायमूर्मि प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है।

दरअसल, मामला सतना जिले की रामपुर बाघेलान जिले के ग्राम बगहाई का है। गांव में किसान विनोद अग्रवाल की सिंचित कृषि भूमि पर प्रिज्म जॉनसन सीमेंट लिमिटेड ने वर्ष 2025 में बिना अनुमति प्रवेश कर भारी-भरकम मशीनों के जरिए खदान लगा दी थी। पीड़िता द्वारा एसडीएम, कलेक्टर सहित शासन स्तर पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर हाईकार्ट की शरण ली गई।
प्रिज्म प्रबंधन पर जबरन खदान लगाने का आरोप
हाईकोर्ट जबलपुर की डबल बेंच ने 5 फरवरी 2026 को रिच याचिका क्रमांक-17947/2025 विनोद कुमार अग्रवाल बनाम मध्य प्रदेश शासन और अन्य मामले का निराकरण करते हुए यह आदेश दिया। हाईकोर्ट में दायर रिट पिटीशन में पीड़िता के वकील कौस्तुभ सिंह ने राहत मांगी थी। याचिका में पीड़िता की ओर से बताया गया कि प्रिज्म जॉनसन सीमेंट प्रबंधन द्वारा जमीन पर गैरकानूनी तरीके से माइनिंग की जा रही है।
हाईकोर्ट को बताया गया कि पीड़ित ग्राम बगहाई तहसील रामपुर बघेलान जिला सतना में खसरा नंबर ७ रकबा ०.०४५ हेक्टेयर, खसरा नंबर ९ रकबा ०.०४८ हेक्टेयर, खसरा नंबर १० रकबा ०.०४२ हेक्टेयर, खसरा नंबर ११/१०५३ रकबा ०.८०९ हेक्टेयर, खसरा नंबर ३२ रकबा ०.६२४ हेक्टेयर, खसरा नंबर ३७ रकबा ०.१८१ हेक्टेयर, खसरा नंबर ४१/१ रकबा ०.१८१ हेक्टेयर, खसरा नंबर ५३ रकबा ०.६१५ हेक्टेयर, खसरा नंबर ५४ रकबा ०.४२७ हेक्टेक्यर, खसरा नंबर ५५ रकबा ०.१६५ हेक्टेयर, खसरा नंबर ५६/२/के रकबा ०.३९२ हेक्टेयर, खसरा नंबर ५६/१०४०/१ रकबा ०.३४० हेक्टेयर, खसरा नंबर ५७/२ रकबा ०.०८४ हेक्टेयर, खसरा नंबर ५८/२ रकबा ०.३२४ हेक्टेयर, खसरा नंबर ५९/२/के रकबा ०.०१३ हेक्टेयर कुल रकबा ४.२९० हेक्टेयर भूमि का मालिक है।
जिला प्रशासन से नहीं मिली राहत तो ली हाईकोर्ट की शरण
प्रिज्म जॉनसन सीमेंट लिमिटेड प्रबंधन द्वारा इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर माइनिंग ली आवंटित कराई गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उनकी और अन्य किसनों की जमीन पर प्रिज्म सीमेंट प्रबंधन द्वारा बिना जमीन अधिग्रहित किए और बिना मुआवजा दिए गैरकानूनी रूप से खुदाई शुरू कर दी है, जो मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 247/4 और 5 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने यह रिच याचिका दायर करने से पहले 20 मार्च 2025 को कलेक्टर सतना को एमपीएलआरसी की धारा 31/32 के तहत एक आवेदन दिया था कि प्रिज्म जॉनसन कंपनी प्रबंधन को याचिकाकर्ता की जमीन की अवैध खुदाई करने से रोका जाए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो यह रिट याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट ने प्रिज्म प्रबंधन और प्रशासन की दलील की खारिज
याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। हालांकि, प्रविादियों की ओर से नोटिस के जवाब में कहा गया कि उचित अनुमति के बाद एक लीज दी गई थी और उसके बाद उन्होंने खनन कानूनों के प्रावधानों के तहत लीज वाली जमीन पर खुदाई शुरू कर दी है। साथ ही यह भी कहा गया कि एमपीएलआरसी की धारा 31/32 के तहत एक आवेदन दायर किया गया था, जिसमें रिट याचिका में मांगी गई राहत की मांग की गई थी, लेकिन उक्त आवेदन 04 जून 2025 को डिफाल्ट रूप से खारिज कर दिया गया, इसलिए याचिका खारिज किए जाने योग्य है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि याचिकाकर्ता का पूरा दावा एमपीएलआरसी की धारा 247 पर आधारित है।
हाईकोर्ट ने एमपीएलआरसी की धाराओं का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मप्र भू-राजस्व संहिता की धाराओं का हवाला देते हुए प्रिज्म प्रबंधन और जिला प्रशासन का तर्क खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने फैसले में मप्र भू-राजस्व संहिता की धाराओं का उल्लेख किया है।
हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा,
धारा 247 खनिज पर सरकार का अधिकार-
(1) जब तक सरकार द्वारा दिए गए अनुदान की शर्तों में स्पष्ट रूप से अन्यथा प्रावधान न किया गया हो, सभी खनिजों, खानों और खदानों का अधिकार राज्य सरकार में निहित होगा, जिसके पास ऐसे अधिकार का उचित उपयोग करने के लिए सभी आवश्यक शक्तियां होंगी।
(2) सभी खानों और खदानों के अधिकार में खनन और उत्खनन के उद्देश्य से भूमि तक पहुंच का अधिकार और ऐसी अन्य भूमि पर कब्जा करने का अधिकार शामिल है, जो उससे संबंधित सहायक उद्देश्यों के लिए आवश्यक हो सकती है, जिसमें कार्यालयों, श्रमिकों के आवासों और मशीनरी का निर्माण, खनिजों का भंडारण और कचरे का जमाव, सड़कों, रेलवे या ट्राम-लाइनों का निर्माण, और कोई अन्य उद्देश्य शामिल हो, जिसे राज्य सरकार खनन और उत्खनन के सहायक के रूप में घोषित कर सकती है।
(3) यदि सरकार ने किसी व्यक्ति को किसी खनिज, खान या खदान पर अपना अधिकार सौंपा है, और यदि ऐसे अधिकार का ठीक से इस्तेमाल करने के लिए यह जरूरी है कि उप-धारा (1) और (2) में बताई गई सभी या कोई भी शक्तियां इस्तेमाल की जाएं, तो कलेक्टर, लिखित आदेश द्ववारा, ऐसी शर्तों और आरक्षणों के अधीन रहते हुए, जो वह निदिष्ट करे, ऐसी शक्तियां उस व्यक्ति को सौंप सकता है, जिसे अधिकार सौंपा गया है, बशर्तें कि ऐसा कोई भी हस्तांतरण तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक प्रभावित भूमि में अधिकार रखने वाले सभी व्यक्तियों को विधिवत नोटिस नहीं दिया जाता है, और उनके आपत्तियों को सुना और उन पर विचार नहीं किया जाता है।
(4) यदि, किसी भूमि पर यहां संदर्भित अधिकार का उपयोग करने में, ऐसी भूमि की सतह पर कब्जा या गड़बड़ी से किसी व्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन होता है, तो सरकार या उसका असाइनी ऐसे व्यक्तियों को ऐसे उल्लंघन के लिए मुआवजा देगा और ऐसे मुआवजे की राशि की गणना उप-विभागीय अधिकारी द्वारा, या यदि उसका निर्णय स्वीकार नहीं किया जाता है, तो सिविल न्यायालय द्वारा जहां तक संभव हो, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (1894 का।) के प्रावधान के अनुसार की जाएगी।
(5) सरकार का कोई भी असाइनी कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी भूमि की सतह पर प्रवेश नहीं करेगा या उस पर कब्जा नहीं करेगा, और जब तक मुआवजा निर्धारित नहीं किया जाता है और उन व्यक्तियों को नहीं दिया जाता है, जिनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
(6) यदि सरकार का कोई असाइनी उप-धारा (4) में बताए अनुसार मुआवजा देने में विफल रहता है, तो कलेक्टर हकदार व्यक्तियों की ओर से उससे ऐसा मुआवजा वसूल कर सकता है, जैसे कि वह भू-राजस्व का बकाया हो।
(7) कोई भी व्यक्ति जो बिना कानूनी अधिकार के किसी खान या खदान से खनिज निकालता है या हटाता है, जिसका अधिकार सरकार के पास है, और जिसे सरकार ने किसी को सौंपा नहीं है, तो उस पर की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के कलेक्टर के लिखित आदेश पर, निकाले गए या हटाए गए खनिजों के बाजार मूल्य के [चार गुना] से अधिक की राशि का जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा।
(8) एमपीएलआरसी की धारा 247 की उप-धारा 4 भूमि के मालिक को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के प्रावधान के अनुसार उप-विभागीय अधिकारी द्वारा गणना किए गए मुआवजे का दावा करने का अधिकार देती है। एमपीएलआरसी की धारा 247 की उप-धारा 5 के तहत एक रोक है कि सरकार का कोई भी असाइनी कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी भूमि की सतह पर प्रवेश नहीं करेगा या उस पर कब्जा नहीं करेगा, और जब तक मुआवजा निर्धारित नहीं किया जाता है और उन व्यक्तियों को नहीं दिया जाता है, जिनके अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
(9) अब, क्योंकि वह स्टेज खत्म हो गया है, हम पिटीशनर को एमपीएलआरसी के सेक्शन 247 के तहत सब डिविजनल आफिसर के सामने एक डिटेल्ड एप्लीकेशन जमा करने की आजादी देते हैं, ताकि पिटीशनर को मिलने वाले मुआवजे का हिसाब लगाया जा सके। अगर ऐसी एप्लीकेशन पिटीशनर या किसी दूसरे प्रभावित व्यक्तियों द्वारा फाइल की जाती है, तो उन एप्लीकेशन पर नए लैंड एक्विजिशन एक्ट के प्रोविजन के अनुसार एप्लीकेशन जमा करने की तारीख से 60 दिन के अंदर तेजी से फैसला किया जाएगा। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इसी के साथ रिट पिटीशन का निपटारा कर दिया।
पहले भी लगे अवैध खनन, भंडारण के आरोप
सतना, मध्य प्रदेश में प्रिज्म सीमेंट (अब प्रिज्म जॉनसन लिमिटेड) के खिलाफ अवैध खनन और भंडारण से संबंधित कई मामले समय-समय पर सामने आए हैं।
कोयले का अवैध भंडारण: वर्ष 2014 में, जिला प्रशासन और खनन विभाग ने प्रिज्म सीमेंट के संयंत्र पर छापा मारकर 12 करोड़ रुपए मूल्य का लगभग 40,000 मीट्रिक टन कोयला अवैध रूप से भंडारित पाया था। इसके लिए कंपनी पर 120 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था।
जीएसटी और कर विवाद: हाल ही में (अक्टूबर 2025), जीएसटी विभाग की 16 सदस्यीय टीम ने रामपुर बघेलान स्थित फैक्ट्री में सर्वे किया था। इसके अलावा, कंपनी का 34.10 करोड़ रुपए का एक कर विवाद मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है, जिसकी सुनवाई फरवरी 2026 में निर्धारित है।
नकली सीमेंट का मामला: सितंबर 2025 में सतना प्रशासन ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जो प्रिज्म जैसी नामी कंपनियों की बोरियों में राखड़ (फ्लाई ऐश) भरकर बेच रहे थे।
खनन पट्टे और अनुपालन: कंपनी के पास सतना के विभिन्न गांवों (जैसे हिनौती, बदरखा, सिजहटा, बगहाई) में चूना पत्थर (Limestone) के खनन पट्टे हैं। प्रिज्म प्रबंधन के खिलाफ इन गांवों में कई किसानों की जमीनों पर गैरकानूनी तरीके से जबरन कब्जा करने और मुआवजा नहीं देने के आरोप हैं।
