हेल्थ डेस्क। यह वाकई विज्ञान की दुनिया में एक बहुत बड़ी और उत्साहजनक खबर है! शोधकर्ता अक्सर ऐसे ‘मेटाबॉलिक मास्टर स्विच’ (Metabolic Master Switch) की तलाश में रहते हैं, जो शरीर को स्वाभाविक रूप से वजन घटाने में मदद कर सके।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हालिया शोधों में ‘लिपस्टिन’ (Lipstine) या ‘ग्रेलिन’ (Ghrelin) के विपरीत काम करने वाले कुछ हॉर्मोन्स पर काफी चर्चा हुई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ हॉर्मोन शरीर की ‘ब्राउन फैट’ (Brown Fat) को सक्रिय करते हैं, जो कैलोरी जलाने में मदद करती है।
यह खोज इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
प्राकृतिक प्रक्रिया: यह बाहरी रसायनों के बजाय शरीर के अपने तंत्र का उपयोग करती है।
मेटाबॉलिज्म: यह हॉर्मोन शरीर की चयापचय दर को बढ़ा सकता है।
भूख पर नियंत्रण: यह मस्तिष्क को “पेट भर गया है” का संकेत देने में अधिक प्रभावी हो सकता है।
बीमारियों से बचाव: मोटापा कम होने से टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
अभी शुरुआती चरण: अधिकांश ऐसी खोजें अभी लैब या चूहों पर परीक्षण (Animal Trials) के स्तर पर हैं।
उपलब्धता: इसे आम जनता के लिए दवा के रूप में आने में कई साल लग सकते हैं।
जीवनशैली का महत्व: कोई भी हॉर्मोन संतुलित आहार और व्यायाम का पूरी तरह से विकल्प नहीं हो सकता।
क्या आप इनमें से किसी विशिष्ट हॉर्मोन के बारे में जानना चाहते हैं?
वैज्ञानिकों ने हाल ही में कई अलग-अलग हॉर्मोन्स पर काम किया है। क्या आप इनमें से किसी एक का जिक्र कर रहे हैं?
Irisin: इसे ‘एक्सरसाइज हॉर्मोन’ भी कहते हैं, जो वसा को ऊर्जा में बदलता है।
Leptin (लेप्टिन): जो तृप्ति का संकेत देता है।
GDF15: एक नया हॉर्मोन जिस पर शोध चल रहा है कि यह स्वाद और भूख को कैसे प्रभावित करता है।
हाल ही में वैज्ञानिकों ने FGF21 (Fibroblast Growth Factor 21) नामक एक प्राकृतिक हॉर्मोन की खोज की है, जो मोटापे को दूर करने में क्रांतिकारी साबित हो सकता है। यह खोज इसलिए खास है, क्योंकि यह हॉर्मोन सीधे मस्तिष्क (brain) पर काम करके वजन कम करने में मदद करता है।
मस्तिष्क पर सीधा असर
नया सर्किट: ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि FGF21 मस्तिष्क के ‘हाइंडब्रेन’ (hindbrain) हिस्से में एक विशिष्ट सर्किट को सक्रिय करता है।
ऊर्जा की खपत: Ozempic जैसी दवाओं के विपरीत (जो मुख्य रूप से भूख कम करती हैं), FGF21 शरीर की कैलोरी जलाने (energy burning) की क्षमता को बढ़ा देता है।
अन्य महत्वपूर्ण प्राकृतिक खोजें
सिर्फ FGF21 ही नहीं, वैज्ञानिकों ने कुछ और भी प्राकृतिक अणुओं (molecules) की पहचान की है।
BRP पेप्टाइड (Stanford की खोज): स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने AI की मदद से एक प्राकृतिक पेप्टाइड खोजा है जो Ozempic की तरह काम करता है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स (जैसे मतली या मांसपेशियों की हानि) नहीं होते।
FGF19: यह आंतों (intestines) में बनने वाला हॉर्मोन है जो मस्तिष्क को वसा (fat) जलाने के संकेत भेजता है।
Neuroestrogen: जापान के वैज्ञानिकों ने पाया कि मस्तिष्क में बनने वाला एस्ट्रोजन का एक रूप भूख को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह Ozempic/Wegovy से अलग कैसे है?
विशेषता वर्तमान दवाएं (GLP-1) नई खोज (जैसे FGF21)
मुख्य कार्य भूख कम करना (Appetite suppression) ऊर्जा जलाना (Energy expenditure)
साइड इफेक्ट्स उल्टी, मतली, मांसपेशियों का कम होना प्राकृतिक होने के कारण कम दुष्प्रभाव की उम्मीद
अन्य लाभ केवल वजन घटाना फैटी लिवर (MASH) जैसी बीमारियों में भी सहायक
दुनियाभर में 1 अरब से ज्यादा लोग मोटापे का शिकार
दुनियाभर में मोटापे के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं और अब इसे एक ‘वैश्विक महामारी’ के रूप में देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में अब 1 अरब से अधिक लोग मोटापे के शिकार हैं।
मोटापे के वैश्विक आंकड़े (2022-2024)
मोटापा अब केवल विकसित देशों की समस्या नहीं रही, बल्कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में भी यह तेजी से फैल रहा है।
कुल आबादी: दुनिया का हर 8वां व्यक्ति मोटापे के साथ जी रहा है।
वयस्क: लगभग 89 करोड़ वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं। यदि ‘ओवरवेट’ (अधिक वजन) लोगों को भी मिला लिया जाए, तो यह संख्या 2.5 अरब तक पहुँच जाती है।
बच्चे और किशोर: 5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 16 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे का शिकार हैं।
छोटे बच्चे: 5 वर्ष से कम उम्र के 3.7 करोड़ बच्चे ओवरवेट पाए गए हैं।
भारत की स्थिति
भारत में मोटापे की समस्या एक गंभीर मोड़ ले चुकी है।
वर्तमान संख्या: भारत में लगभग 35 करोड़ लोग मोटापे से जूझ रहे हैं।
भविष्य का अनुमान: अनुमान है कि 2050 तक हर तीसरा भारतीय मोटापे से ग्रस्त होगा और यह संख्या 45 करोड़ तक पहुंच सकती है।
बच्चे: भारत में 5 से 15 साल के लगभग 1.25 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार हो चुके हैं।
मोटापे के मुख्य कारण और जोखिम
मोटापा बढ़ने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं।
अस्वास्थ्यकर आहार: फास्ट फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और चीनी वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन।
शारीरिक सक्रियता की कमी: गतिहीन जीवनशैली और व्यायाम न करना।
आनुवंशिकी: कुछ लोगों में जेनेटिक कारणों से भी वजन बढ़ने की प्रवृत्ति होती है।
नींद की कमी: पर्याप्त नींद न लेना मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।
मोटापे से होने वाली बीमारियां
मोटापा अपने साथ कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर आता है:
टाइप 2 डायबिटीज: मोटापे के कारण भारत में 10 करोड़ से ज्यादा डायबिटीज मरीज हैं।
हृदय रोग: हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
कैंसर: मोटापा कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
मानसिक स्वास्थ्य: अवसाद (डिप्रेशन) और आत्मसम्मान की कमी।
