मुंबई। महान गायिका आशा भोंसले का रविवार 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया है। उनके बेटे, आनंद भोंसले ने अंतिम संस्कार की जानकारी साझा की है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक उनके निवास स्थान ‘कासा ग्रैंड’ (लोअर परेल) में एवं अंतिम संस्कार सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजे दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। वे अब हमारी यादों में रहेंगी। महान गायिका आशा भोंसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को हुआ था। वे न केवल एक बेहतरीन गायिका हैं, बल्कि एक सफल व्यवसायी और अभिनेत्री भी रही हैं। उन्हें प्यार से ‘आशा ताई’ कहा जाता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: साल 2011 में, उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (सिंगल्स) करने वाली कलाकार के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई। उन्होंने 20 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं में 11,000 से भी ज्यादा गाने गाए हैं।
प्रमुख पुरस्कार:
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2000)
पद्म विभूषण (2008)
दो बार नेशनल फिल्म अवार्ड और सात बार फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवार्ड
पहली उपलब्धि: वे ग्रैमी अवार्ड (1997) के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं।
कुछ सदाबहार और मशहूर गीत
उनकी आवाज़ की बहुमुखी प्रतिभा (versatility) के कारण उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप और कैबरे तक हर शैली में अपनी छाप छोड़ी है।
दम मारो दम (हरे रामा हरे कृष्णा)
पिया तू अब तो आजा (कारवां)
चुरा लिया है तुमने जो दिल को (यादों की बारात)
इन आंखों की मस्ती (उमराव जान)
ओ मेरे सोना रे (तीसरी मंजिल)
व्यक्तिगत जीवन और अन्य शौक
शुरुआती संघर्ष: उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से विवाह किया था, जो सफल नहीं रहा। बाद में 1980 में उन्होंने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से शादी की।
रेस्तरां व्यवसाय: आशा जी को खाना बनाने का बहुत शौक है। वे ‘Asha’s’ नाम से दुबई, कुवैत और यूके सहित कई देशों में सफल रेस्तरां चेन चलाती हैं।
आशा भोंसले और आर.डी. बर्मन (पंचम दा) की जोड़ी न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि संगीत की दुनिया में भी सबसे क्रांतिकारी जोड़ियों में से एक मानी जाती है।
आशा भोंसले और पंचम दा: एक संगीतमय सफर
इन दोनों की पहली मुलाकात 1956 में हुई थी, जब पंचम दा सिर्फ 17 साल के थे। उनकी असली संगीतमय साझेदारी 1960 के दशक में शुरू हुई, जिसने बॉलीवुड संगीत की परिभाषा ही बदल दी।
क्रांतिकारी बदलाव: पंचम दा ने आशा जी की आवाज की बहुमुखी प्रतिभा को पहचाना और उनसे ऐसे गाने गवाए जो उस दौर के हिसाब से बहुत आधुनिक थे। उन्होंने जैज़, रॉक और वेस्टर्न बीट्स को भारतीय संगीत के साथ मिलाकर नए प्रयोग किए।
तीसरी मंज़िल (1966): इस फिल्म के गाने जैसे “आजा आजा मैं हूँ प्यार” और “ओ मेरे सोना रे” ने आशा जी को एक नई पहचान दी। शुरुआत में उन्हें लगा था कि वे इतने पश्चिमी धुनों वाले गाने नहीं गा पाएंगी, लेकिन पंचम दा के भरोसे ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे वर्सटाइल गायिका बना दिया।
सदाबहार हिट्स:
दम मारो दम (हरे रामा हरे कृष्णा): इस गाने ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।
पिया तू अब तो आजा (कारवां): इस गाने ने ‘कैबरे’ गानों को एक नया स्तर दिया।
चुरा लिया है तुमने (यादों की बारात): एक ऐसी रूमानी धुन जो आज भी उतनी ही ताजा लगती है।
विवाह: सालों तक साथ काम करने के बाद, दोनों ने 1980 में शादी कर ली।
प्रमुख पुरस्कार और सम्मान
आशा जी का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2000): भारतीय सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सर्वोच्च सम्मान।
पद्म विभूषण (2008): भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान।
नेशनल फिल्म अवार्ड्स: उन्होंने दो बार यह पुरस्कार जीता:
उमराव जान (1981) के गाने “दिल चीज़ क्या है” के लिए।
इजाजत (1987) के गाने “मेरा कुछ सामान” के लिए।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: 2011 में उन्हें दुनिया में सबसे ज़्यादा स्टूडियो रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता मिली।
फिल्मफेयर अवार्ड्स: उन्होंने कुल 9 फिल्मफेयर अवार्ड्स जीते हैं, जिनमें 7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के लिए और एक लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड शामिल है।
आशा और बड़ी बहन लता मंगेशकर के रिश्ते
आशा भोंसले जी का जीवन उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ रिश्तों और उनके निजी एल्बमों (Non-film albums) के कारण बहुत दिलचस्प रहा है। लता जी और आशा जी के बीच का रिश्ता प्यार, सम्मान और पेशेवर मुकाबले का एक अनोखा मिश्रण था।
शुरुआती दरार: 1949 में, जब 16 साल की आशा ने लता जी के सेक्रेटरी गणपतराव भोंसले के साथ भागकर शादी कर ली, तो लता जी और उनके परिवार ने उनसे सारे रिश्ते तोड़ लिए थे। यह अनबन कई सालों तक रही।
पहचान की लड़ाई: शुरुआती दौर में आशा जी की आवाज लता जी से मिलती-जुलती थी। खुद आशा जी ने स्वीकार किया था कि वे दीदी की छाया में महसूस करती थीं। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी एक अलग और बोल्ड शैली विकसित की।
रिश्तों में सुधार: 1960 में जब आशा जी अपने पहले पति से अलग होकर वापस आईं, तब भाई-बहनों के बीच सुलह हुई। वे दोनों एक ही बिल्डिंग में अलग-अलग फ्लैटों में रहती थीं और अक्सर साथ समय बिताती थीं।
साझा विरासत: दोनों बहनों ने “मन क्यों बहका रे” और “कोई आएगा आएगा” जैसे कई यादगार गाने साथ गाए। आशा जी कहती थीं कि लोगों ने उनके बीच की ‘प्रतिद्वंद्विता’ की खबरें फैलाईं, जबकि वे दोनों इन बातों पर हंसती थीं।
मशहूर प्राइवेट और इंडी-पॉप एल्बम
फिल्मों से अलग, आशा जी ने इंडी-पॉप और गज़लों के क्षेत्र में भी बड़े रिकॉर्ड बनाए।
दिल पड़ोसी है (1987): यह एल्बम आशा जी, आर.डी. बर्मन और गुलजार की एक शानदार त्रिमूर्ति का परिणाम था। इसे उनके 54वें जन्मदिन पर रिलीज किया गया था।
जानम समझा करो (1997): लेस्ली लुईस के साथ यह एल्बम बेहद सफल रहा और इसने 90 के दशक में इंडी-पॉप की लहर पैदा कर दी। इसके टाइटल ट्रैक के लिए उन्हें 1997 का ‘एमटीवी अवार्ड’ भी मिला।
कभी तो नजर मिलाओ (2000): अदनान सामी के साथ उनकी यह जुगलबंदी जबरदस्त हिट रही। इस एल्बम ने अदनान सामी को भारत में एक बड़ा स्टार बना दिया।
गजल एल्बम: उन्होंने ‘मेराज-ए-गजल’ (गुलाम अली के साथ), ‘आबशार-ए-गज़ल’ और ‘कशिश’ जैसे मशहूर गज़ल एल्बम भी रिकॉर्ड किए।
आप की आशा (2001): इस एल्बम के साथ वे संगीत संगीतकार (composer) भी बनीं, जिसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Guinness World Records)
संगीत की दुनिया में आशा जी का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
सर्वाधिक रिकॉर्डिंग का रिकॉर्ड: साल 2011 में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक तौर पर उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी।
विशाल संग्रह: उन्होंने 1943 से अपने करियर की शुरुआत की और 20 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं में 11,000 से भी अधिक गाने (सोलो, युगल और कोरस) रिकॉर्ड किए।
रिकॉर्ड का आधार: इस खिताब को हासिल करने में संगीत शोधकर्ता विश्वास नेरुरकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने उनके गानों का पूरा डेटा संकलित कर गिनीज बुक को सौंपा था।
आशा जी ने भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी
ब्रिटिश बैंड ‘Gorillaz’ के साथ आखिरी सहयोग: मार्च 2026 में रिलीज हुए एल्बम The Mountain के गाने “The Shadowy Light” में उनकी आवाज़ सुनाई दी। इसे उनके करियर का अंतिम महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सहयोग माना जा रहा है।
ब्रिमफुल ऑफ आशा (Brimful of Asha): 1997 में ब्रिटिश बैंड ‘Cornershop’ ने उन्हें समर्पित यह गाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय चार्ट्स पर शीर्ष पर रहा और उन्हें वैश्विक पॉप संस्कृति का हिस्सा बना दिया।
ग्रैमी नामांकन: 2005 में उन्होंने Kronos Quartet के साथ मिलकर ‘You’ve Stolen My Heart’ एल्बम पर काम किया, जिसके लिए उन्हें 2006 में ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया।
प्रमुख वैश्विक सितारे: उन्होंने बॉय जॉर्ज (Boy George), माइकल स्टाइप (Michael Stipe) और नेली फर्टाडो (Nelly Furtado) जैसे दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ भी काम किया।
वर्ल्ड टूर्स: उन्होंने अमेरिका, यूके और कनाडा जैसे देशों में अनगिनत हाउसफुल कॉन्सर्ट किए। 2007 में उनका ‘The Incredibles’ टूर विशेष रूप से चर्चित रहा, जिसमें उनके साथ सोनू निगम और कैलाश खेर भी थे।
उन्हें शनिवार शाम (11 अप्रैल) को सीने में संक्रमण (chest infection) और अत्यधिक थकान के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, उनका निधन मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण हुआ।
अंतिम रिकॉर्डिंग (Last Recording)
उनकी अंतिम महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग के रूप में ब्रिटिश बैंड ‘Gorillaz’ के साथ उनके सहयोग को याद किया जा रहा है। उन्होंने उनके 2026 के एल्बम The Mountain के गाने “The Shadowy Light” में अपनी आवाज दी थी। यह गीत आत्मा के एक सफर और जीवन के बाद की यात्रा के विषयों को दर्शाता है, जो संयोगवश उनके जीवन के इस मोड़ पर बेहद मार्मिक है।
सुरों की यह रानी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनके 12,000 से अधिक गाने और उनकी जादुई आवाज हमेशा गूंजती रहेगी।
