हेल्थ डेस्क। health Care: आधुनिक दौर में भाग—दौड़ भरी जिंदगी और अनियमित और असुरक्षित खान—पान ने बीमारियों में भी बेतहासा वृद्धि की है। ऐसे में इन बीमारियों को लेकर वैज्ञानिक और विशेषज्ञ डॉक्टर भी समाधान निकालने नित नए रिसर्च कर रहे हैं। अधिकतर बीमारियों का इलाज उपलब्ध होने के बाद भी बीमारियों का दायरा बढ़ रहा है। हालांकि, अब विशेषज्ञ बेहतर और सुरक्षित खानपान पर भी जोर दे रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हालांकि, सर्वे में मिलेट्स (बाजरा) को लेकर कई जानकारियां सामने आई हैं। हालिया शोध इनके पोषण मूल्य, जलवायु अनुकूलन और बीमारियों से लड़ने की क्षमता पर केंद्रित हैं। भारत सरकार ने 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया था, जिसके बाद से इसके अनुसंधान में काफी तेजी आई है।
मिलेट्स पर शोध के मुख्य निष्कर्ष
पोषण और स्वास्थ्य अनुसंधान
अध्ययनों ने पुष्टि की है कि मिलेट्स न केवल सामान्य अनाज हैं, बल्कि ‘सुपरफूड’ की श्रेणी में आते हैं।
बीमारियों की रोकथाम: शोध बताते हैं कि बाजरा में मौजूद फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट कैंसर, हृदय रोग और टाइप 2 डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने में सहायक हैं।
पोषक तत्वों की प्रचुरता: इनमें गेहूं और चावल की तुलना में अधिक आयरन, कैल्शियम, जिंक और फाइबर पाया जाता है। विशेष रूप से रागी में कैल्शियम की मात्रा सबसे अधिक (344 mg/100g) पाई गई है।
ग्लूटेन-मुक्त और कम GI: शोध से पता चला है कि इनका ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ (GI) कम होता है, जिससे ये मधुमेह रोगियों के लिए उत्कृष्ट आहार हैं।
कृषि और जलवायु अनुसंधान
जलवायु परिवर्तन के दौर में मिलेट्स को ‘भविष्य की फसल’ माना जा रहा है।
पानी की कम खपत: शोध के अनुसार, मिलेट्स को धान की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है और ये सूखे की स्थिति में भी जीवित रह सकते हैं।
किस्मों का विकास: भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (IIMR) ऐसी किस्मों पर काम कर रहा है जो कम समय (70-80 दिन) में पक सकें और कीटों के प्रति प्रतिरोधी हों।
उत्पादकता में वृद्धि: जामनगर में किए गए शोध से बाजरा की औसत उपज 1961 में 310 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 2621 किग्रा/हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
आर्थिक और प्रसंस्करण अनुसंधान
प्रसंस्करण की चुनौतियां: शोध में पाया गया है कि बाजरा की खेती में लाभ गेहूं/धान की तुलना में केवल 33% से 42% ही मिल पाता है, जिसका मुख्य कारण बुनियादी ढांचे और प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी है।
मूल्य संवर्धन (Value Addition): मिलेट्स से बिस्कुट, रोटी, लड्डू और पास्ता जैसे उत्पाद बनाने पर शोध किया जा रहा है, ताकि इनकी बाजार में मांग बढ़े।
प्रमुख मिलेट और उनकी विशेषताएं
मिलेट का नाम शोध के अनुसार मुख्य लाभ
बाजरा (Pearl Millet) आयरन का बड़ा स्रोत, एनीमिया से लड़ने में सहायक
ज्वार (Sorghum) ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत और बायोमास उत्पादन में कुशल
रागी (Finger Millet) कैल्शियम का सबसे बड़ा स्रोत, हड्डियों के लिए वरदान
कोदो (Kodo Millet) रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं के लिए हृदय स्वास्थ्य में उपयोगी
मिलेट्स
मिलेट्स (Millets), जिन्हें हिंदी में मोटा अनाज या ‘श्रीअन्न’ भी कहा जाता है, छोटे बीज वाली घासों का एक समूह है जिनकी खेती दुनिया भर में अनाज या चारे के रूप में की जाती है। ये पोषक तत्वों से भरपूर, ग्लूटेन-मुक्त होते हैं और शुष्क जलवायु में भी आसानी से उग जाते हैं।
मिलेट्स के मुख्य प्रकार
मिलेट्स को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है।
प्रमुख मिलेट्स (Major Millets): इनमें बाजरा (Pearl Millet), ज्वार (Sorghum) और रागी (Finger Millet) शामिल हैं, जो सबसे अधिक खाए जाते हैं।
लघु मिलेट्स (Minor Millets): इसमें कंगनी (Foxtail Millet), कोदो (Kodo Millet), सावां (Barnyard Millet), कुटकी (Little Millet) और चीना (Proso Millet) जैसे अनाज आते हैं।
सूडो मिलेट्स (Pseudo Millets): कुट्टू (Buckwheat) और राजगिरा (Amaranth) को भी अक्सर इसी श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इनका पोषण मूल्य मिलेट्स जैसा ही होता है।
स्वास्थ्य के लिए फायदे
मिलेट्स को गेहूं और चावल के मुकाबले अधिक पौष्टिक माना जाता है।
पोषक तत्वों का खजाना: इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।
मधुमेह (Diabetes) नियंत्रण: इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
हृदय स्वास्थ्य: फाइबर की अधिकता के कारण ये कोलेस्ट्रॉल कम करने और वजन घटाने में सहायक होते हैं।
पाचन में हल्का: ये ग्लूटेन-मुक्त होते हैं, इसलिए ग्लूटेन एलर्जी वाले लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
मिलेट्स का उपयोग कैसे करें?
मिलेट्स का उपयोग पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के व्यंजनों में किया जा सकता है।
रोटी और पूरी: ज्वार या बाजरे के आटे से बनी रोटियां काफी लोकप्रिय हैं।
दलिया और खिचड़ी: सावां या कोदो का उपयोग चावल के विकल्प के रूप में पुलाव या खिचड़ी बनाने में किया जा सकता है।
स्नैक्स: आजकल बाजार में मिलेट्स से बने बिस्कुट, चिप्स और लड्डू भी उपलब्ध हैं।
