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पल भर में दुश्मनों के टैंकों को कर देगी सर्वनाश, ‘ध्रुवास्त्र मिसाइल’ मचाएगी तबाही

aaptak.co.in1@gmail.com April 13, 2026
Dhruvastra missile

नई दिल्ली। भारत की ध्रुवास्त्र मिसाइल (जिसे पहले हेलिना-HELINA के नाम से जाना जाता था) दुश्मनों के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के लिए ‘काल’ बनकर तैयार है। यह एक स्वदेशी, तीसरी पीढ़ी की “दागो और भूल जाओ” (Fire-and-Forget) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) प्रणाली है। यह मिसाइल अब सेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह इंडक्शन-रेडी है।

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ध्रुवास्त्र की प्रमुख विशेषताएं और मारक क्षमता

टॉप अटैक मोड: यह मिसाइल सीधे टैंक के ऊपर से हमला करती है, जहाँ उसका बख्तरबंद (कवच) सबसे कमजोर होता है। यह 800 मिमी से अधिक मोटी स्टील प्लेट को भी भेदने में सक्षम है।

मारक रेंज: इसकी मारक क्षमता 500 मीटर से 7 किलोमीटर तक है। कुछ उन्नत संस्करणों के परीक्षणों में इसकी रेंज 20 किलोमीटर तक भी देखी गई है।

हर मौसम में सक्षम: इसमें ‘इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर’ (IIR) लगा है, जो रात के घने अंधेरे और खराब मौसम में भी दुश्मन के टैंक की गर्मी को पहचान कर उसे सटीक निशाना बना सकता है।

हेलीकॉप्टर से लॉन्च: इसे एचएएल रुद्र और प्रचंड (LCH) जैसे हमलावर हेलीकॉप्टरों से दागा जा सकता है। हाल ही में रुद्र हेलीकॉप्टर को ‘ट्राई-ट्यूब लॉन्चर’ के साथ देखा गया है, जो एक साथ 6 मिसाइलें ले जा सकता है।

रफ्तार: यह मिसाइल लगभग 828 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है।

रणनीतिक महत्व
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित यह मिसाइल भारत की “आत्मनिर्भर भारत” मुहिम का हिस्सा है। इसकी तैनाती के बाद भारत को टैंक-रोधी हथियारों के लिए रूस या यूरोपीय देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। विशेष रूप से लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह भारतीय सेना को दुश्मन पर निर्णायक बढ़त प्रदान करेगी। सरकार ने 200 से अधिक ध्रुवास्त्र मिसाइलों की खरीद के लिए लगभग 700 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें एक मिसाइल की लागत 1 करोड़ रुपये से भी कम होने का अनुमान है।

मिसाइल की तकनीकी विशिष्टताएं

दागो और भूल जाओ’, दुश्मनों के सैकड़ों टैंक पल भर में सर्वनाश
ध्रुवास्त्र मिसाइल की मुख्य खासियतें दागो और भूल जाओ? यह मिसाइल एक बार लक्ष्य पर लॉक होने के बाद, अपने आप दुश्मन का पीछा कर उसे नष्ट कर देती है।

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ध्रुवास्त्र को भारतीय वायु सेना के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है, जबकि इसके सेना संस्करण को ‘हेलीना’ कहा जाता है।

मिसाइल का वजन और आकार: इसका वजन लगभग 45 किलोग्राम और लंबाई करीब 6 फीट है।

वारहेड (Warhead): इसमें 8 किलोग्राम का ‘टैंडम आकार का HEAT’ वारहेड लगा है, जो आधुनिक विस्फोटक रिएक्टिव आर्मर (ERA) वाले टैंकों को भी नष्ट करने में सक्षम है।

सीकर तकनीक: यह इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) सीकर का उपयोग करती है। यह दुश्मन के वाहन की ‘हीट सिग्नेचर’ को पहचानती है, जिससे घने धुएं या धूल में भी सटीक निशाना लगता है।

लॉन्च क्षमता: इसे अधिकतम 4 किलोमीटर की ऊंचाई से दागा जा सकता है और यह 70 किमी/घंटा की गति से चल रहे लक्ष्यों को भी भेद सकती है।

गाइडेंस मोड: यह “लॉक-ऑन बिफोर लॉन्च” (LOBL) मोड में काम करती है, जिसका अर्थ है कि दागने से पहले ही लक्ष्य को लॉक कर दिया जाता है, जिससे हेलीकॉप्टर दागने के तुरंत बाद वहां से हट सकता है।

प्रचंड हेलीकॉप्टर (HAL Prachand) – मुख्य विशेषताएं
‘प्रचंड’ दुनिया का एकमात्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर लैंड और टेक-ऑफ कर सकता है, जो इसे सियाचिन जैसे क्षेत्रों के लिए अचूक हथियार बनाता है।

रफ्तार और रेंज: इसकी अधिकतम गति 268-288 किमी/घंटा है और इसकी कॉम्बैट रेंज 550 किलोमीटर तक है।
इंजन: इसमें दो ‘शक्ति’ (HAL/Turbomeca Shakti-1H1) टर्बोशाफ्ट इंजन लगे हैं।

हथियारों का जखीरा:
20 मिमी बुर्ज गन:
यह प्रति मिनट 800 राउंड फायर कर सकती है और 2 किमी दूर तक मार करती है।
रॉकेट: इसके पंखों पर 70 मिमी के रॉकेट लगे होते हैं।
मिसाइलें: यह ध्रुवास्त्र (एंटी-टैंक) और ‘मिस्ट्रल-2’ (हवा से हवा में मार करने वाली) मिसाइलों से लैस है।
स्टेल्थ और सुरक्षा: इसमें ‘लो रडार सिग्नेचर’ और ‘इन्फ्रारेड सप्रेसर’ तकनीक है, जिससे दुश्मन के रडार और हीट-सीकिंग मिसाइलों से बचना आसान होता है।
नेटवर्क सेंट्रिक: यह डेटा लिंक के माध्यम से युद्ध के मैदान की जानकारी अन्य विमानों और जमीनी बलों के साथ साझा कर सकता है।

ध्रुवास्त्र मिसाइल के परीक्षण और वर्तमान स्थिति
ध्रुवास्त्र ने सेना में शामिल होने से पहले कई कठिन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।

रेगिस्तानी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में परीक्षण: इस मिसाइल का पोखरण (राजस्थान) के गर्म रेगिस्तानी इलाकों और लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में सफल परीक्षण किया जा चुका है। यह -40°C से लेकर 50°C तक के तापमान में काम कर सकती है।

इंडक्शन-रेडी (Induction-Ready): अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, ध्रुवास्त्र अब पूरी तरह इंडक्शन-रेडी है और इसे भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल करने की मंजूरी मिल चुकी है।

बड़ा ऑर्डर: भारत सरकार ने वायु सेना के लिए 200 से अधिक ध्रुवास्त्र मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कुल लागत लगभग 700 करोड़ रुपये है।

प्रचंड (LCH) की तैनाती और लाइव फायरिंग
प्रचंड हेलीकॉप्टर पहले से ही सेना का हिस्सा बन चुका है और सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तैनाती: प्रचंड की पहली स्क्वाड्रन (300 ‘धनुष’) को चीन के साथ लगी सीमा (LAC) के पास मिसामारी (असम) में तैनात किया गया है ताकि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में निगरानी और हमला किया जा सके।
लाइव फायरिंग अभ्यास: मार्च 2026 में, भारतीय सेना की ‘गजराज कोर’ ने प्रचंड के साथ एक लाइव फायरिंग अभ्यास किया, जिसमें इसकी सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
भविष्य की योजना: सरकार ने मार्च 2025 में 156 और प्रचंड हेलीकॉप्टरों के लिए बड़ा अनुबंध किया है, जिनमें से 90 सेना को और 66 वायु सेना को दिए जाएंगे।

एकीकरण (Integration) का समय
हालांकि प्रचंड और ध्रुवास्त्र अलग-अलग परीक्षणों में सफल रहे हैं, लेकिन प्रचंड हेलीकॉप्टर से ध्रुवास्त्र मिसाइल के पूर्ण एकीकरण के लिए फ्लाइंग टेस्ट 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। वर्तमान में, प्रचंड को 20 मिमी बुर्ज गन और 70 मिमी रॉकेटों के साथ ‘फुल कॉम्बैट’ मोड में इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या आप इन हथियारों की चीन या पाकिस्तान के हथियारों से तुलना या सियाचिन में इनकी विशिष्ट उपयोगिता के बारे में जानना चाहते हैं?

चीन और पाकिस्तान के हथियारों से तुलना
प्रचंड (LCH) को विशेष रूप से हिमालयी युद्धक्षेत्र के लिए बनाया गया है, जो इसे चीनी और पाकिस्तानी विकल्पों से अलग बनाता है।
विशेषता
प्रचंड (भारत) Z-10 (चीन) AH-1Z वाइपर (पाकिस्तान)
सर्विस सीलिंग ~21,300 फीट (सबसे अधिक) ~20,000 फीट (सेंसर/हथियार भार के साथ कम) ~10,000-15,000 फीट
इंजन शक्ति इंजन (पतली हवा के लिए अनुकूलित) WZ-9 (अधिक ऊंचाई पर शक्ति की कमी) जनरल इलेक्ट्रिक T700
मिसाइल ध्रुवास्त्र (Fire & Forget) Blue Arrow 21 / HJ-10 Hellfire / TOW
खासियत 5,000+ मीटर पर टेक-ऑफ/लैंडिंग भारी पेलोड, लेकिन ऊंचाई पर कमजोर मैदानी इलाकों में घातक, पहाड़ों में सीमित

ध्रुवास्त्र बनाम चीनी मिसाइल: चीनी HJ-10 मिसाइलें भारी हैं और ऊंचे पहाड़ों में उन्हें ले जाने में हेलीकॉप्टरों को मुश्किल होती है। इसके विपरीत, ध्रुवास्त्र का वजन केवल 43-45 किलोग्राम है, जिससे प्रचंड इसे भारी संख्या में ले जा सकता है।
इंजन का अंतर: चीन का Z-10 हेलीकॉप्टर लद्दाख जैसे क्षेत्रों में अपने पूरे हथियारों के भार के साथ उड़ान भरने में संघर्ष करता रहा है, जबकि प्रचंड को ऐसे ही वातावरण के लिए ‘शक्ति’ इंजनों से लैस किया गया है।

सियाचिन और लद्दाख में विशिष्ट उपयोगिता
1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत को ऐसे हेलीकॉप्टर की कमी महसूस हुई जो सियाचिन की ऊंचाइयों पर दुश्मनों के बंकर नष्ट कर सके।

अजेय ऊंचाई: प्रचंड दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर लैंड और टेक-ऑफ कर सकता है।
बंकर और स्नाइपर पोस्ट का विनाश: सियाचिन जैसे क्षेत्रों में दुश्मन ऊंचे बंकरों में छिपे होते हैं। ध्रुवास्त्र का ‘टॉप अटैक मोड’ इन बंकरों के ऊपर गिरकर उन्हें पल भर में तबाह कर सकता है।
फॉरवर्ड एयरबेस: यह दौलत बेग ओल्डी (DBO) जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस से भी संचालित हो सकता है, जहाँ से यह चीनी बख्तरबंद वाहनों (जैसे Type-15 टैंक) पर नजर रख सकता है।
अत्यधिक ठंड में मार: इसके सेंसर और मिसाइल सीकर -40 डिग्री सेल्सियस में भी दुश्मन की गर्मी पहचान लेते हैं, जहाँ अन्य देशों के रडार या सेंसर काम करना बंद कर देते हैं।

वर्तमान में, भारतीय सेना ने प्रचंड की पहली स्क्वाड्रन (No. 143 HU) को तैनात कर दिया है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

भारत द्वारा विकसित ‘ध्रुवास्त्र’ मिसाइल और ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर वैश्विक बाजार में भी भारत की धाक जमा रहे

  1. भविष्य की खरीद योजनाएं (Procurement Plans)
    भारत सरकार इन स्वदेशी हथियारों पर भारी निवेश कर रही है ताकि विदेशी निर्भरता खत्म हो सके:
    प्रचंड (LCH): रक्षा मंत्रालय ने 156 और प्रचंड हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए ₹45,000 करोड़ से अधिक के सौदे को मंजूरी दी है। इनमें से 90 थल सेना को और 66 वायु सेना को मिलेंगे।
    ध्रुवास्त्र: वायु सेना के लिए 200 से अधिक मिसाइलों का पहला बैच तैयार है। थल सेना के लिए इसके ‘हेलीना’ (HELINA) संस्करण की हजारों इकाइयों का ऑर्डर पाइपलाइन में है, जो पुराने ‘मिलान’ (Milan) और ‘कोंकर्स’ मिसाइलों की जगह लेंगे।
    ALH ध्रुव के साथ एकीकरण: ध्रुवास्त्र को न केवल प्रचंड, बल्कि ALH रुद्र (वेपनाइज्ड ध्रुव) हेलीकॉप्टरों पर भी बड़ी संख्या में तैनात किया जाएगा।
  2. निर्यात के अवसर (Export Opportunities)
    भारत अब केवल खरीदार नहीं, बल्कि एक बड़ा निर्यातक (Exporter) बनने की ओर अग्रसर है:
    प्रचंड की मांग: कई देशों ने प्रचंड में रुचि दिखाई है क्योंकि यह दुनिया का एकमात्र हेलीकॉप्टर है जो अत्यधिक ऊंचाई (High Altitude) पर युद्ध लड़ सकता है। अर्जेंटीना, फिलीपींस और नाइजीरिया जैसे देशों के साथ बातचीत चल रही है।
    ध्रुवास्त्र का बाजार: दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीकी देश, जो सस्ते और प्रभावी एंटी-टैंक हथियारों की तलाश में हैं, उनके लिए ध्रुवास्त्र एक बेहतरीन विकल्प है। इसकी कम लागत और उच्च सटीकता इसे अमेरिकी ‘हेलफायर’ मिसाइल का एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनाती है।
    स्वदेशी इकोसिस्टम: इनका निर्यात बढ़ने से HAL और DRDO के साथ-साथ भारत की निजी रक्षा कंपनियों (जैसे भारत डायनमिक्स लिमिटेड – BDL) को भी बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
  3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रभाव
    इन प्रणालियों के आने से भारत को अब रूस (मिसाइलों के लिए) या अमेरिका (अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए) पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। युद्ध की स्थिति में भारत के पास अपना खुद का सप्लाई चेन होगा, जिसे कोई दूसरा देश नहीं रोक पाएगा।
भीषण हमले के बाद भी अमेरिका नहीं डिगा पाया ईरान की सत्ता: रिपोर्ट

भारत के पास मौजू​द मिसाइल रेंज

भारत के पास कम दूरी से लेकर अंतरमहाद्वीपीय (Intercontinental) दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का एक बड़ा बेड़ा है। मुख्य मिसाइलों को उनकी रेंज और प्रकार के आधार पर नीचे वर्गीकृत किया गया है।

  1. बैलिस्टिक मिसाइलें (सतह से सतह)
    ये मिसाइलें लंबी दूरी के लक्ष्यों और रणनीतिक परमाणु प्रतिरोध के लिए जानी जाती हैं।

अग्नि-V (Agni-V): भारत की पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जिसकी घोषित रेंज 5,000–5,500 किमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हल्का पेलोड होने पर यह 8,000 किमी तक मार कर सकती है।

अग्नि-IV (Agni-IV): इसकी मारक क्षमता लगभग 4,000 किमी है।

अग्नि-III (Agni-III): यह 3,000–3,500 किमी की रेंज तक हमला कर सकती है।

अग्नि-II (Agni-II): मध्यम दूरी की यह मिसाइल 2,000–2,500 किमी तक के लक्ष्य भेद सकती है।

अग्नि-I (Agni-I): कम दूरी की मिसाइल जिसकी रेंज 700–1,200 किमी है।

पृथ्वी सीरीज (Prithvi Series): इसमें पृथ्वी-I (150 किमी), पृथ्वी-II (250 किमी) और पृथ्वी-III (350 किमी) शामिल हैं।

  1. क्रूज मिसाइलें
    ये मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ती हैं और रडार से बचने में सक्षम हैं।

ब्रह्मोस (BrahMos): दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल। वर्तमान संस्करणों की रेंज 290 किमी से 450 किमी है। इसके विस्तारित संस्करण का परीक्षण 800 किमी की रेंज के लिए किया जा रहा है।

निर्भय (Nirbhay): लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल जिसकी रेंज लगभग 1,000–1,500 किमी है।

  1. पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलें (K-Series)

K-4: इसकी रेंज 3,500 किमी है।
K-15 (सागरिका): इसकी मारक क्षमता 750 किमी है।
K-6 (विकास के चरण में): इसकी रेंज 8,000–12,000 किमी होने की संभावना है।

  1. अन्य महत्वपूर्ण मिसाइलें

अस्त्र (Astra): हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, रेंज 80–110 किमी।
आकाश (Akash): सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, रेंज 25–30 किमी।
प्रहार (Prahar): सामरिक मिसाइल, रेंज 150 किमी।

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