नई दिल्ली। Women’s Empowerment Bill: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल, 2026 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने पर गहरा दुख व्यक्त किया और देश की महिलाओं से क्षमा मांगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विपक्ष पर तीखा प्रहार
पीएम मोदी ने कांग्रेस, टीएमसी (TMC), डीएमके (DMK) और समाजवादी पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने “स्वार्थी राजनीतिक हितों” के लिए एक ईमानदार प्रयास की “भ्रूणहत्या” कर दी है।
नारी शक्ति का साथ
उन्होंने विश्वास जताया कि भले ही सदन में आवश्यक 66% बहुमत नहीं मिल सका, लेकिन देश की 100% नारी शक्ति उनके साथ है।
ऐतिहासिक चूक
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने इतिहास रचने और दशकों पुरानी गलतियों को सुधारने का मौका गंवा दिया है। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार पर दुख जताते हुए कहा कि विधेयक गिरने पर वे सदन में मेजें थपथपाकर खुश हो रहे थे, जो नारी के स्वाभिमान पर चोट थी।
संकल्प अटूट है
पीएम ने वादा किया कि वे महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली हर बाधा को खत्म करेंगे और इसे समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प अटूट है।
विधेयक का उद्देश्य
यह संबोधन 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद आया, जिसका लक्ष्य 2029 के चुनावों से पहले लोकसभा सीटों को 816 तक बढ़ाकर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना था।
देश कभी माफ नहीं करेगा
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार नारी शक्ति के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है और विपक्षी दलों को महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने के लिए जनता (विशेषकर महिलाएं) कभी माफ नहीं करेगी।
नारी शक्ति वंदन विधेयक
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (जिसे महिला आरक्षण विधेयक भी कहा जाता है) भारत में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक विधायी कदम है। हाल ही में, 18 अप्रैल 2026 को संसद के विशेष सत्र में इस अधिनियम में प्रस्तावित महत्वपूर्ण संशोधनों को पारित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका।
मुख्य बिंदु:
उद्देश्य: इस अधिनियम का मुख्य लक्ष्य लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसे सबसे पहले 19 सितंबर 2023 को 128वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किया गया था और तब संसद ने इसे पारित कर दिया था।
इसे संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
हालिया घटनाक्रम (अप्रैल 2026)
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था ताकि आरक्षण को लागू करने के लिए आवश्यक संशोधनों को तुरंत अमली जामा पहनाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने इस संशोधन को उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के सभी राज्यों में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास बताया।
विपक्ष (कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके आदि) के विरोध के कारण यह संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर गया।
लागू होने की समय सीमा: मूल अधिनियम के अनुसार, यह आरक्षण परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के बाद लागू होना है, जिसके वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों तक प्रभावी होने की संभावना है।
