नई दिल्ली। भारत में हाल के सर्वेक्षणों (जैसे तेलंगाना जाति सर्वेक्षण 2024-25) और शैक्षणिक अध्ययनों के अनुसार, अय्यर/अयंगर (ब्राह्मण), ईसाई (BC/SC) और राजू समुदाय के लोगों में अंतरजातीय विवाह (Inter-caste marriage) की दर सबसे अधिक देखी गई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जातियों के आधार पर आंकड़े (तेलंगाना सर्वे 2024-25)
एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह (IEWG) द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार।
अय्यर/अयंगर (ब्राह्मण): इस समुदाय में सबसे ज्यादा 12% परिवारों ने अंतरजातीय विवाह किया है।
BC/SC ईसाई: इसके बाद ईसाई समुदाय का स्थान है, जहाँ 9.9% परिवारों में इंटरकास्ट मैरिज हुई है।
राजू: इस समुदाय में यह दर 8.7% पाई गई है।
अन्य: कापू और कुछ अन्य ब्राह्मण उप-जातियों में भी औसत से अधिक इंटरकास्ट मैरिज देखी गई है।
इसके विपरीत, रेड्डी और वेलामा जैसे प्रभावशाली जमींदार समुदायों में अंतरजातीय विवाह की दर काफी कम पाई गई है।
क्षेत्र और राज्य के आधार पर आंकड़े
मिजोरम: राष्ट्रीय स्तर पर, मिजोरम में सबसे ज्यादा 55% अंतरजातीय विवाह होते हैं।
सिक्किम और गोवा: इन राज्यों में भी यह दर काफी अधिक (क्रमशः 20% और 20.69%) है।
क्षेत्रीय अंतर: भारत के पश्चिमी क्षेत्र (17%) में दक्षिणी क्षेत्र (9.71%) की तुलना में अधिक अंतरजातीय विवाह होते हैं।
महत्वपूर्ण कारक
शहरीकरण: अध्ययनों के अनुसार, ब्राह्मणों में यह दर अधिक होने का एक बड़ा कारण उनका शहरों में निवास करना है (90% से अधिक ब्राह्मण शहरों में रहते हैं), जहाँ जातीय बंधन थोड़े लचीले होते हैं।
शिक्षा: पति की माता की शिक्षा का स्तर बढ़ने से अंतरजातीय विवाह की संभावना बढ़ जाती है।
बदलता नजरिया: वैवाहिक प्लेटफार्म ‘जीवनसाथी’ की एक रिपोर्ट (2026) के अनुसार, 2016 में 91% लोग जाति को सख्त प्राथमिकता देते थे, जो 2025 तक घटकर 54% रह गया है।
अंतरजातीय विवाह (Inter-caste marriage) को बढ़ावा कई योजनाएं
भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें अंतरजातीय विवाह (Inter-caste marriage) को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चलाती हैं। सबसे प्रमुख योजना ‘डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन’ के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा संचालित की जाती है।
- केंद्रीय योजना: डॉ. अंबेडकर सोशल इंटीग्रेशन स्कीम
प्रोत्साहन राशि: 2.50 लाख रुपए प्रति जोड़ा।
भुगतान का तरीका: 1.50 लाख रुपए शादी के तुरंत बाद बैंक खाते में और शेष 1.00 लाख (या कुछ मामलों में 1.5 लाख FD के रूप में) 3 साल बाद दिए जाते हैं।
मुख्य शर्तें:
दूल्हा या दुल्हन में से कोई एक अनुसूचित जाति (SC) से होना चाहिए और दूसरा किसी अन्य जाति (Non-SC) से।
शादी का पंजीकरण ‘हिंदू विवाह अधिनियम 1955’ या ‘विशेष विवाह अधिनियम’ के तहत होना चाहिए।
वार्षिक आय 5 लाख से कम होनी चाहिए।
शादी के एक साल के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।
राज्य स्तरीय योजनाएं (राज्यानुसार सहायता राशि)
विभिन्न राज्य अपनी ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं: राजस्थान: सबसे अधिक सहायता राशि 10 लाख तक (डॉ. सविता बेन अंबेडकर योजना के तहत)।
कर्नाटक: पुरुषों के लिए 2.5 लाख और महिलाओं के लिए 3 लाख; ST समुदायों के लिए कुल 5.50 लाख तक।
मध्य प्रदेश: अंतरजातीय विवाह के लिए 2 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
हरियाणा: 1.01 लाख की सहायता, जिसमें 51,000 शादी के तुरंत बाद मिलते हैं।
दिल्ली, उत्तराखंड और महाराष्ट्र: लगभग 50,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आमतौर पर निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र (Marriage Certificate)।
दोनों पति-पत्नी का जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)।
आयु प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र।
संयुक्त बैंक खाते का विवरण और पासपोर्ट साइज फोटो।
आय प्रमाण पत्र।
