न्यूयार्क। यदि आप भी स्नूज वाला बटन दबाकर थोड़ा और सोने की इच्छा रखने वालों में से हैं, तो यह आदत आपके स्वास्थ्य के बारे में काफी कुछ कहती है। नींद विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात पर बहुत कम रिसर्च हुई है कि स्नूज करने से आपकी सेहत या जिंदगी की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ता है। लेकिन इस पर उपलब्ध अध्ययन बताते हैं कि अकसर सुबह की सुस्ती उन्हीं लोगों को परेशान करती है, जो अलार्म को बार-बार स्नूज करते हैं। इसका जवाब इस बात पर भी निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति अलार्म क्यों स्नूज कर रहा है और क्या यह आदत खराब नींद की आदतों को बढ़ा रही है या उन्हें बढ़ावा दे रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हाल ही में एक अध्ययन में दुनिया भर के 21,000 से ज्यादा वयस्कों की नींद की आदतों पर ध्यान दिया गया, इसमें शोधकर्ताओं ने एक हैरान करने वाली प्रवृत्ति देखी। रिकॉर्ड की गई आधी से ज्यादा रातों के बाद, भागीदारों ने जागने से पहले औसतन 2.4 बार अलार्म का स्नूज बटन दबाया। आमतौर पर लोग अलार्म को इसलिए स्नूज करते हैं, ताकि जागने से पहले थोड़ी और नींद ले सकें। कुछ लोग ज्यादा स्नूज करते हैं, जिनमें रात में देर तक जागने वाले वे लोग शामिल हैं, जिन्हें जागने पर अक्सर नींद आती है, और जो रात भर बार-बार जागते हैं।
कुछ नींद विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आपको मिलने वाली गहरी नींद की मात्रा कम हो सकती है। गहरी नींद दिमाग की सेहत और याददाश्त बढ़ाने, भावनाओं को समझने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। गहरी नींद का यह चरण ज्यादातर सुबह के शुरुआती घंटों में होता है।
बोस्टन के ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल की स्लीप साइंटिस्ट रेबेका रॉबिन्स ने कहा कि स्नूज करना एक बुरा विचार हो सकता है। अगर अलार्म स्नूज करने से आप कभी-कभी सामान्य से आधे घंटे देर से उठते हैं, तो आपके शरीर की अंदरूनी घड़ी खराब हो सकती है, जिससे भविष्य में समय पर सोना और उठना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा।
न्यूयॉर्क सिटी के अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन में न्यूरोलॉजी और साइकेट्री की क्लिनिकल एसोसिएट प्रोफेसर शेल्बी हैरिस ने कहा कि कभी-कभी खराब नींद की आदतों या नींद की बीमारियों को प्रबंधित करने के लिए स्नूजिंग का इस्तेमाल सहारे के तौर पर किया जाता है।
डॉ. गोल्डस्टीन कहते हैं, चूंकि स्नूज करने वाले लोग अपनी नींद का आखिरी हिस्सा हल्की नींद में बिताते हैं, इसलिए उन्हें कभी-कभी सुबह की सुस्ती कम करने में मदद भी मिल सकती है।
दुनियाभर में 88% वयस्क करते हैं अलार्म का उपयोग
दुनियाभर में लगभग 80% वयस्क अपने दिन की शुरुआत करने के लिए किसी न किसी तरह के अलार्म का उपयोग करते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा काम के दिनों (weekdays) के लिए अधिक सटीक है।
अलार्म का उपयोग
कुल उपयोग: एक अनुमान के अनुसार, 80% लोग सप्ताह के दौरान अलार्म का सहारा लेते हैं, लेकिन इनमें से केवल 7 में से 1 व्यक्ति ही सुबह उठने पर खुद को पूरी तरह तरोताजा महसूस करता है।
स्मार्टफोन का प्रभुत्व: वर्तमान में लगभग 85% लोग अलार्म घड़ी के बजाय अपने स्मार्टफोन को अलार्म के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
स्नूज (Snooze) की आदत: एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, 55.6% नींद के सत्र स्नूज़ बटन दबाने के साथ समाप्त होते हैं।
प्राकृतिक जागरण: केवल 20% लोग ही नियमित रूप से बिना किसी बाहरी सहायता या अलार्म के प्राकृतिक रूप से जागते हैं।
उम्र और लिंग के आधार पर अंतर
युवा पीढ़ी: 35 वर्ष से कम आयु के लगभग 48% लोग अलार्म के साथ उठते हैं।
बुजुर्ग: 55 वर्ष से अधिक आयु के 82% लोग प्राकृतिक रूप से जागना पसंद करते हैं।
लिंग: महिलाओं में पुरुषों की तुलना में स्नूज बटन दबाने की संभावना 50% अधिक होती है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव:
विशेषज्ञों के अनुसार, अलार्म का अचानक बजना शरीर में तनाव हार्मोन (stress hormones) को बढ़ा सकता है और रक्तचाप में 74% तक की वृद्धि कर सकता है। प्राकृतिक रूप से जागने वाले लोग अक्सर अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करते हैं।
